
पटना: बिहार में जमीन खरीदने और रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार अब ऐसी नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत किसी भी जमीन की रजिस्ट्री से पहले उसकी पूरी जांच की जाएगी। इस नई प्रणाली का उद्देश्य जमीन विवाद, फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी जैसी समस्याओं पर रोक लगाना है।
राजस्व एवं निबंधन विभाग द्वारा तैयार की गई इस नई व्यवस्था के अनुसार अब जमीन खरीदने वाले व्यक्ति को रजिस्ट्री से पहले ही उस जमीन की पूरी “कुंडली” मिल जाएगी। यानी खरीदार को पहले से पता चल जाएगा कि जमीन विवादित है या नहीं, उस पर बैंक लोन है या नहीं और उसके दस्तावेज पूरी तरह सही हैं या नहीं।
सरकार इस नई व्यवस्था को इसी महीने पूरे बिहार में लागू करने की तैयारी में जुटी हुई है।
रजिस्ट्री से पहले देनी होगी 13 जरूरी जानकारियां
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी रैयती जमीन की खरीद-बिक्री के लिए आवेदक को ऑनलाइन पोर्टल पर जमीन से जुड़ी 13 महत्वपूर्ण जानकारियां और दस्तावेज जमा करने होंगे।
इनमें खाता संख्या, खेसरा संख्या, रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी, विक्रेता की पहचान, स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज और अन्य कानूनी जानकारियां शामिल होंगी।
सरकार का कहना है कि अब केवल कुछ कागज लेकर रजिस्ट्री ऑफिस पहुंच जाना पर्याप्त नहीं होगा। पूरी जानकारी पहले डिजिटल सिस्टम में अपलोड करनी होगी, जिसके बाद जांच प्रक्रिया शुरू होगी।
अंचल अधिकारी करेंगे पूरी जांच
नई प्रणाली में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अंचल अधिकारी यानी सीओ की होगी। आवेदन जमा होने के बाद संबंधित सीओ दस्तावेजों और जमीन की स्थिति की जांच करेंगे।
वे यह सुनिश्चित करेंगे कि विक्रेता द्वारा दी गई जानकारी सही है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि जमीन पर कोई कानूनी विवाद, बैंक लोन, सरकारी रोक या अन्य समस्या तो नहीं है।
सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए 10 दिनों की समय सीमा तय की है। यानी आवेदन जमा होने के बाद तय समय के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट जारी करनी होगी।
खरीदार को पहले ही मिल जाएगी असली स्थिति
सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा जमीन खरीदने वालों को मिलेगा। अक्सर लोग बिना पूरी जांच-पड़ताल के जमीन खरीद लेते हैं और बाद में विवाद या कानूनी परेशानी में फंस जाते हैं।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद खरीदार को रजिस्ट्री से पहले ही पता चल जाएगा कि जमीन पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं।
यदि जमीन पर पहले से कोई पारिवारिक विवाद चल रहा होगा, किसी बैंक का लोन होगा या सरकार की ओर से कोई रोक लगी होगी, तो उसकी जानकारी पहले ही सामने आ जाएगी।
इससे लोगों को गलत जमीन खरीदने से बचने में मदद मिलेगी।
जमीन विवाद कम करने की तैयारी
बिहार में लंबे समय से जमीन विवाद एक बड़ी समस्या रहे हैं। गांवों से लेकर शहरों तक कई मामले ऐसे सामने आते रहे हैं, जहां अधूरी जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के कारण लोग कानूनी लड़ाई में फंस जाते हैं।
सरकार का मानना है कि जमीन विवादों की बड़ी वजह सही दस्तावेजों की कमी और पारदर्शिता का अभाव है। इसी कारण अब पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो भविष्य में जमीन से जुड़े मामलों में काफी कमी आ सकती है।
डिजिटल सिस्टम से बढ़ेगी पारदर्शिता
राज्य सरकार पहले ही जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को काफी हद तक ऑनलाइन कर चुकी है। अब इस नई जांच प्रणाली को जोड़कर इसे और मजबूत बनाया जा रहा है।
सभी दस्तावेज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड होने से रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा और जांच प्रक्रिया भी आसान होगी।
सरकार का कहना है कि इससे भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
मोबाइल यूनिट की भी तैयारी
राज्य सरकार ने जमीन निबंधन प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए मोबाइल यूनिट की भी तैयारी की है।
इन मोबाइल यूनिट्स के जरिए लोगों को कई सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सरकार के अनुसार अधिकारियों और कर्मचारियों को नई व्यवस्था के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है ताकि प्रक्रिया को बिना किसी परेशानी के लागू किया जा सके।
क्या होती है जमीन रजिस्ट्री?
जब कोई व्यक्ति जमीन खरीदता है, तो उस जमीन की सेल डीड का सरकारी पंजीकरण कराना जरूरी होता है। इसी प्रक्रिया को रजिस्ट्री कहा जाता है।
रजिस्ट्री के दौरान खरीदार को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करना पड़ता है। इसके बाद सरकार की ओर से जमीन का स्वामित्व कानूनी रूप से खरीदार के नाम दर्ज किया जाता है।
अब तक इस प्रक्रिया में दस्तावेजों की औपचारिक जांच होती थी, लेकिन नई व्यवस्था में विस्तृत सत्यापन भी शामिल किया जा रहा है।
फर्जी जमीन सौदों पर लगेगी रोक
बिहार में कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां एक ही जमीन को कई लोगों को बेच दिया गया या फर्जी दस्तावेज बनाकर जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई।
नई व्यवस्था के बाद इस तरह की धोखाधड़ी पर काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
जांच प्रक्रिया में यदि किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो रजिस्ट्री रोकी जा सकती है और संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
आम लोगों को मिलेगी राहत
नई व्यवस्था को लेकर आम लोगों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई लोगों का कहना है कि अब जमीन खरीदने से पहले उन्हें ज्यादा सुरक्षा महसूस होगी।
विशेषकर मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि कई बार लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी जमीन खरीदने में लगा देते हैं और बाद में विवादों में फंस जाते हैं।
सरकार का बड़ा प्रशासनिक कदम
राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञ इस फैसले को बिहार सरकार का बड़ा सुधारात्मक कदम मान रहे हैं।
उनका कहना है कि यदि प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू हुई, तो जमीन खरीद-बिक्री का पूरा सिस्टम अधिक भरोसेमंद बन सकता है।
सरकार का दावा है कि सात निश्चय-3 योजना के तहत लोगों के जीवन को आसान और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है।
आने वाले समय में और बदलाव संभव
राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में जमीन रिकॉर्ड, नक्शा और निबंधन प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाएगा।
सरकार की कोशिश है कि जमीन से जुड़े मामलों में लोगों को कम से कम परेशानी हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो।
फिलहाल नई जांच प्रणाली को लेकर लोगों की नजर सरकार के अगले कदम और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर टिकी हुई है।


