बिहार में जमीन घोटालों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी: दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री की जांच अब करेगी स्पेशल सेल

पटना, 21 मई 2026। बिहार में जमीन विवाद, दाखिल-खारिज में गड़बड़ी और राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब जमीन से जुड़े विवादित मामलों, फर्जीवाड़े और रिश्वतखोरी की जांच के लिए एक विशेष सेल बनाया गया है, जो आर्थिक अपराध इकाई यानी ईओयू (EOU) के अधीन काम करेगा। सरकार का दावा है कि इस फैसले से जमीन माफिया, बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों पर प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से जुड़े मामलों में लंबे समय से अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। दाखिल-खारिज, जमाबंदी, ऑनलाइन रसीद, भूमि रजिस्ट्री और सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री में गड़बड़ी के आरोप लगातार लगते रहे हैं। कई जिलों में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन कब्जाने और गरीब लोगों की संपत्ति हड़पने के मामले भी चर्चा में रहे हैं। ऐसे मामलों को देखते हुए सरकार ने पहली बार विशेष निगरानी तंत्र तैयार किया है।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल लगातार विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि अंचल कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के लिए केवल प्रशासनिक निर्देश पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मजबूत जांच व्यवस्था भी जरूरी है। इसी सोच के तहत यह स्पेशल सेल गठित किया गया है।

सूत्रों के अनुसार यह विशेष सेल केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सीधे जांच, छापेमारी और कानूनी कार्रवाई भी कर सकेगा। इसमें डीएसपी स्तर से लेकर इंस्पेक्टर, सब इंस्पेक्टर और एएसआई स्तर तक के अधिकारियों की तैनाती की गई है। यानी जमीन से जुड़े मामलों की निगरानी अब पुलिस और आर्थिक अपराध जांच एजेंसियों की तरह की जाएगी।

सरकार का कहना है कि राज्य में कई जगहों पर जमीन माफिया और बिचौलियों का नेटवर्क सक्रिय है। ये लोग फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों की जमीन कब्जाने, सरकारी जमीन बेचने और दाखिल-खारिज प्रक्रिया में हेराफेरी करने का काम करते रहे हैं। कई मामलों में अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के आरोप भी सामने आए हैं। नई व्यवस्था के बाद ऐसे नेटवर्क पर सीधी कार्रवाई की जाएगी।

राज्य सरकार को उम्मीद है कि आर्थिक अपराध इकाई की तकनीकी क्षमता और जांच अनुभव से इस विशेष सेल को मजबूती मिलेगी। ईओयू पहले भी आर्थिक अपराध, साइबर फ्रॉड और वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की जांच करता रहा है। अब जमीन से जुड़े मामलों को भी उसी गंभीरता से लिया जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में जमीन विवाद लंबे समय से बड़ी सामाजिक और प्रशासनिक समस्या रहे हैं। कई बार एक ही जमीन पर दो-दो दाखिल-खारिज, फर्जी रसीद और गलत जमाबंदी जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे आम लोगों को वर्षों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर यह शिकायत मिलती रही है कि अंचल कार्यालयों में बिना रिश्वत के काम नहीं होता। दाखिल-खारिज और म्यूटेशन जैसे सामान्य कार्यों के लिए भी लोगों को दलालों और बिचौलियों का सहारा लेना पड़ता है। सरकार का दावा है कि नई स्पेशल सेल बनने के बाद ऐसे मामलों में तेजी से कार्रवाई होगी।

राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों की ऑनलाइन निगरानी भी बढ़ाई जाएगी। डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन रसीद और भूमि अभिलेखों की जांच के लिए तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। यदि किसी मामले में फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी पर भी कार्रवाई की जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में जमीन विवाद अक्सर बड़े सामाजिक तनाव का कारण बनते हैं। कई बार मामूली जमीन विवाद हत्या और हिंसा तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में सरकार की यह पहल कानून व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि जांच एजेंसी को पर्याप्त अधिकार और स्वतंत्रता दी जाती है तो जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार में कमी लाई जा सकती है। हालांकि यह भी जरूरी है कि कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित न रहे, बल्कि बड़े स्तर पर शामिल लोगों तक भी पहुंचे।

सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में अंचल कार्यालयों की कार्यप्रणाली को और अधिक डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा। कई जिलों में पहले से भूमि सर्वेक्षण और रिकॉर्ड अपडेट का काम चल रहा है। इसके साथ ही अब भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के खिलाफ विशेष निगरानी तंत्र भी सक्रिय रहेगा।

राज्य सरकार का दावा है कि इस फैसले से आम लोगों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। वर्षों से लंबित दाखिल-खारिज, फर्जी रजिस्ट्री और जमीन विवादों के मामलों में अब तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलते ही जांच शुरू की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

बिहार में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर लोगों में लंबे समय से असंतोष रहा है। कई बार गरीब और कमजोर वर्ग के लोग अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल विशेष सेल के गठन के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को भी स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अब दाखिल-खारिज और भूमि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में इस नई व्यवस्था का असर जमीन विवादों और भ्रष्टाचार पर कितना पड़ता है, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

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