बिहार में औद्योगिक क्रांति का नया ‘ब्लूप्रिंट’: बियाडा की नई भूमि नीति 2026 लागू, निवेशकों के लिए ‘प्लग एंड प्ले’ और ऑनलाइन आवंटन का खुला रास्ता

पटना। बिहार की औद्योगिक तस्वीर को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने और निवेश की बाधाओं को जड़ से समाप्त करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। उद्योग विभाग के अधीन बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) ने ‘बियाडा भूमि आवंटन एवं प्रबंधन नीति 2026’ को अधिसूचित करते हुए इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इस नई नीति के प्रभावी होने के साथ ही वर्ष 2022 से चली आ रही पुरानी भूमि आवंटन नीति को निरस्त कर दिया गया है। 2026 की यह नई नीति केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह बिहार को ‘निवेशकों का स्वर्ग’ बनाने का एक व्यापक रोडमैप है। इसमें न केवल पारदर्शिता पर जोर दिया गया है, बल्कि भूमि के उपयोग से लेकर उद्योगों की स्थापना तक के लिए कड़ी समय-सीमा निर्धारित की गई है, ताकि राज्य में उद्योगों का जाल बिछाया जा सके और बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन हो।

ऑनलाइन व्यवस्था और पूर्ण पारदर्शिता का दौर

​नई नीति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी आवंटन प्रक्रिया का पूर्णतः डिजिटल होना है। अब औद्योगिक भूखंडों या शेड के आवंटन के लिए किसी भी निवेशक को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन प्रणाली के माध्यम से संपन्न की जाएगी। बियाडा के पोर्टल पर रिक्त पड़े सभी भूखंडों की जानकारी सार्वजनिक कर दी गई है, जिससे कोई भी निवेशक किसी भी समय यह देख सकता है कि कहाँ कितनी भूमि उपलब्ध है।

​यह व्यवस्था बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर देगी। पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि निवेशकों को पोर्टल पर आवेदन करने के बाद एक निश्चित समय के भीतर आवंटन पत्र प्राप्त हो जाएगा। यह ‘ई-गवर्नेंस’ का वह मॉडल है जो बिहार के औद्योगिक क्षेत्रों में जवाबदेही तय करने जा रहा है।

नियोजित विकास के लिए भूमि-उपयोग का नया ढांचा

​औद्योगिक क्षेत्रों के अव्यवस्थित विस्तार को रोकने के लिए नई नीति में भूमि-उपयोग का एक वैज्ञानिक और संतुलित ढांचा (स्ट्रक्चर्ड लैंड-यूज़ फ्रेमवर्क) पेश किया गया है। इसके तहत औद्योगिक क्षेत्रों की कुल भूमि का बँटवारा इस प्रकार किया जाएगा:

  • औद्योगिक भूखंड: कुल क्षेत्रफल का 55 से 65 प्रतिशत हिस्सा केवल उद्योगों की स्थापना के लिए आरक्षित रहेगा।
  • परिवहन और सड़कें: सुगम आवागमन के लिए 15 से 25 प्रतिशत भूमि सड़कों और परिवहन सुविधाओं के लिए दी जाएगी।
  • हरियाली और खुले स्थान: पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 10 से 33 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन बेल्ट और खुले मैदानों के लिए सुरक्षित होगा।
  • उपयोगिताएं और सुविधाएं: बिजली, पानी और अन्य यूटिलिटीज के लिए 8 प्रतिशत, वाणिज्यिक सुविधाओं के लिए 5 प्रतिशत और आवासीय व सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए 3 प्रतिशत तक भूमि का प्रावधान किया गया है।

​यह ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य के औद्योगिक क्षेत्र केवल कारखानों का समूह न हों, बल्कि वे एक आधुनिक ‘इंडस्ट्रियल टाउनशिप’ के रूप में विकसित हों जहाँ पर्यावरण और मूलभूत सुविधाओं का संतुलन हो।

कुंदन कुमार का विजन: निवेशक-अनुकूल बिहार

​उद्योग विभाग के सचिव सह बियाडा के प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने नई नीति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘बियाडा भूमि आवंटन एवं प्रबंधन नीति 2026’ बिहार में उद्योगों की स्थापना की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है। उनके अनुसार, इस नीति में शामिल ऑनलाइन आवंटन, ई-नीलामी (E-Auction) और ‘प्लग एंड प्ले’ जैसी सुविधाएं निवेशकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।

​कुंदन कुमार ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक क्षेत्रों को अब उनकी आवंटन स्थिति के आधार पर ‘अनसैचुरेटेड’ (असंतृप्त), ‘नॉर्मल’ (सामान्य) और ‘सैचुरेटेड’ (संतृप्त) श्रेणियों में विभाजित किया गया है। जो भूखंड प्राइम लोकेशन पर हैं या जिनके लिए एक से अधिक आवेदन प्राप्त होंगे, उनका आवंटन ई-नीलामी या ई-बिडिंग के माध्यम से किया जाएगा। इससे न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि योग्य और सक्षम निवेशकों को प्राथमिकता मिलेगी।

वित्तीय राहत और स्टार्टअप्स को विशेष प्रोत्साहन

​नई नीति में निवेशकों के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए भी कई प्रावधान किए गए हैं। बयाना राशि (EMD) को सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए 2 प्रतिशत और मध्यम व बड़े उद्योगों के लिए 5 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। बिहार की नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में पंजीकृत स्टार्टअप्स को ईएमडी जमा करने से पूरी तरह छूट दी गई है।

​भूमि के पट्टे (Lease) की अवधि 30, 60 या 90 वर्ष तय की गई है, जिसे आगे नवीनीकृत (Renew) करने का भी प्रावधान है। भुगतान संरचना को भी निवेश की राशि के आधार पर वर्गीकृत किया गया है:

  • 50 लाख तक का निवेश: 40 प्रतिशत अग्रिम भुगतान।
  • 50 लाख से 2.5 करोड़ तक: 35 प्रतिशत अग्रिम भुगतान।
  • 2.5 करोड़ से 7.5 करोड़ तक: 30 प्रतिशत अग्रिम भुगतान।
  • 7.5 करोड़ से ऊपर के प्रोजेक्ट्स: केवल 25 प्रतिशत अग्रिम भुगतान।

​बकाया राशि का भुगतान 1.5 से 5 साल की अवधि में अधिकतम 10 किस्तों में किया जा सकेगा। इसके लिए 9 प्रतिशत का साधारण ब्याज और देरी होने पर 12 प्रतिशत का दंडात्मक ब्याज निर्धारित है।

उत्पादन की समय-सीमा और ‘सरेंडर’ तंत्र

​सरकार अब केवल जमीन आवंटित करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह जल्द से जल्द उत्पादन शुरू कराना चाहती है। नई नीति में सूक्ष्म उद्योगों के लिए 12 महीने, लघु उद्योगों के लिए 18 महीने, मध्यम उद्योगों के लिए 24 महीने और बड़े उद्योगों के लिए 30 महीने के भीतर उत्पादन शुरू करना अनिवार्य कर दिया गया है। जो इकाइयां अपनी स्वीकृत क्षमता का 50 प्रतिशत से कम उत्पादन करेंगी, उन्हें ‘नॉन-फंक्शनल’ घोषित कर दिया जाएगा और उन पर भूमि प्रीमियम का 2 प्रतिशत दंडात्मक किराया लगाया जाएगा।

​पहली बार बिहार में ‘सरेंडर एंड एग्जिट मैकेनिज्म’ (Surrender & Exit Mechanism) पेश किया गया है। यदि कोई निवेशक अपना उद्योग चलाने में असमर्थ है, तो वह व्यवस्थित तरीके से अपनी भूमि सरेंडर कर सकता है। इससे निष्क्रिय पड़ी औद्योगिक भूमि को वापस लेकर नए और सक्रिय निवेशकों को देने में तेजी आएगी।

प्लग-एंड-प्ले शेड: छोटे उद्यमियों के लिए नई ऊर्जा

​नई नीति में ‘प्लग-एंड-प्ले’ शेड (Plug-and-Play Shed) की अवधारणा पर विशेष बल दिया गया है। यह उन उद्यमियों के लिए है जो तुरंत काम शुरू करना चाहते हैं। इन शेड्स का प्रारंभिक आवंटन 5 वर्षों के लिए होगा, जिसे 15 वर्षों तक बढ़ाया जा सकेगा। आवंटन के 90 दिनों के भीतर संचालन शुरू करना अनिवार्य होगा। यह मॉडल बिहार में छोटे और मध्यम स्तर के उद्योगों (MSMEs) की रफ़्तार को कई गुना बढ़ा सकता है।

​बिहार सरकार की यह नई नीति 2026 राज्य के औद्योगिक परिदृश्य में एक नई सुबह की तरह है। 11 मई 2026 की यह अधिसूचना उन हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर लेकर आएगी जो काम की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करते हैं। कुंदन कुमार और उनकी टीम के इस विजन से अब बिहार केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं, बल्कि एक सशक्त औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार है।

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