​बिहार में औद्योगिक क्रांति की नई रफ्तार: हाजीपुर में बनेगा देश का तीसरा NIFTEM, मुजफ्फरपुर और किशनगंज में लगेंगे बड़े सीमेंट प्लांट

पटना, 16 मई 2026। बिहार को औद्योगिक और कृषि-व्यवसाय के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एनडीए सरकार ने दो बड़े ऐतिहासिक कदमों की घोषणा की है। राज्य में फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) और भारी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर नीतिगत और विधिक स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं। वैशाली जिले के हाजीपुर में देश के तीसरे राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी, उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) की स्थापना को हरी झंडी मिल गई है, जो 100 एकड़ के विशाल भूभाग पर विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही, राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) की 67वीं उच्चस्तरीय बैठक में मुजफ्फरपुर और किशनगंज जिलों में देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक घरानों— डालमिया और अंबुजा सीमेंट की बड़ी विनिर्माण इकाइयों को स्थापित करने की विधिक मंजूरी दे दी गई है। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से बिहार के कृषि क्षेत्र में मूल्यवर्धन (वैल्यू एडिशन) होगा और सीमांचल सहित पूरे सूबे के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के हजारों नए अवसर सृजित होंगे।

हाजीपुर में 100 एकड़ में बनेगा देश का तीसरा NIFTEM, किसानों और युवाओं को मिलेगा बड़ा मंच

​बिहार को फूड प्रोसेसिंग का राष्ट्रीय केंद्र बनाने के विजन को साझा करते हुए यह जानकारी दी गई कि वैशाली जिला अंतर्गत हाजीपुर प्रक्षेत्र में NIFTEM (National Institute of Food Technology Entrepreneurship and Management) की स्थापना की जाएगी। हरियाणा के कुंडली और तमिलनाडु के तंजावुर के बाद यह पूरे देश का तीसरा ऐसा प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान होगा, जो सीधे तौर पर खाद्य प्रसंस्करण, अनुसंधान और तकनीकी शिक्षा को समर्पित होगा।

संस्थान के मुख्य विधिक और व्यावहारिक आयाम:

  • क्षेत्रफल और अवस्थिति: इस अत्याधुनिक संस्थान को हाजीपुर के औद्योगिक हब में कुल 100 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा, जिसके लिए प्रशासनिक और विधिक प्रक्रियाओं को तेज कर दिया गया है।
  • उद्देश्य और कार्यक्षेत्र: यह संस्थान खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान (रिसर्च), वैश्विक स्तर की तकनीकी शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देगा। इसके माध्यम से खाद्य सुरक्षा और पैकेजिंग की नई विधाओं पर काम किया जाएगा।
  • हितधारकों को लाभ: बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है जहाँ मखाना, केला, आम, लीची और मकई का प्रचुर मात्रा में उत्पादन होता है। NIFTEM के आने से स्थानीय स्तर पर उद्यमियों को तकनीकी सहयोग मिलेगा, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने और युवाओं को खाद्य क्षेत्र में नए स्टार्टअप शुरू करने के विधिक अवसर प्राप्त होंगे।

SIPB की 67वीं बैठक में भारी उद्योगों को हरी झंडी: डालमिया और अंबुजा सीमेंट की एंट्री

​बिहार में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) सेक्टर को सुदृढ़ करने के लिए राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (SIPB) की 67वीं विधिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्य के भीतर बुनियादी ढांचे के विकास और सीमेंट उत्पादन की बढ़ती मांग को देखते हुए दो बेहद महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी दी गई।

​इसके तहत उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर और सीमांचल के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले किशनगंज जिले में डालमिया सीमेंट (Dalmia Cement) और अंबुजा सीमेंट (Ambuja Cement) की बड़ी और अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयों (ग्राइंडिंग यूनिट्स) की स्थापना को विधिक स्वीकृति दी गई है। इन दोनों बड़े ब्रांड्स के आने से बिहार बुनियादी ढांचा निर्माण सामग्री के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा और राज्य के राजस्व में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।

16 नई परियोजनाओं को स्टेज-1 क्लीयरेंस और 4 को वित्तीय मंजूरी

​औद्योगिक सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए निवेश प्रोत्साहन बोर्ड ने एकल खिड़की प्रणाली (सिंगल विंडो सिस्टम) के तहत कई अन्य लंबित प्रस्तावों का भी त्वरित निष्पादन किया है। बैठक के दौरान:

  • 16 औद्योगिक परियोजनाओं को विधिक रूप से स्टेज-1 क्लीयरेंस प्रदान किया गया, जिससे वे अपनी शुरुआती स्थापना प्रक्रिया जैसे भूमि आवंटन और पर्यावरणीय अनापत्ति की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।
  • 4 बड़ी परियोजनाओं को अंतिम विधिक समीक्षा के बाद वित्तीय मंजूरी (Financial Approval) दे दी गई है, जिसके बाद इन इकाइयों द्वारा सीधे तौर पर पूंजी निवेश और प्लांट निर्माण का कार्य धरातल पर शुरू किया जा सकेगा।

“उद्योग खुद युवाओं के द्वार आ रहे हैं” — पलायन पर लगेगा प्रभावी अंकुश

​इन ऐतिहासिक विधिक स्वीकृतियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए एनडीए सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि बिहार में अब औद्योगिक निवेश का एक नया और स्वर्णिम अध्याय शुरू हो चुका है। सरकार का संकल्प बेहद स्पष्ट है कि बिहार के मेधावी युवाओं को रोजगार और आजीविका की तलाश में अपना घर और गृह राज्य छोड़कर दूसरे प्रदेशों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर न होना पड़े।

​विशेष रूप से सीमांचल और कोसी जैसे आर्थिक और औद्योगिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में इन बड़ी इकाइयों के स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर ही कुशल और अकुशल दोनों श्रेणियों के श्रमिकों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे। सरकार ने अपने विधिक संदेश में दोहराया है कि “नए अवसर, नई रफ्तार, समृद्ध बिहार” के मूल मंत्र के साथ राज्य की कानून-व्यवस्था और सिंगल विंडो क्लीयरेंस नीति को इतना अभेद्य बना दिया गया है कि देश-विदेश के बड़े उद्योगपति अब खुद चलकर बिहार के युवाओं के द्वार तक आ रहे हैं। आने वाले महीनों में इन सभी परियोजनाओं का विधिक शिलान्यास कर निर्माण कार्य को तीव्र गति से आगे बढ़ाया जाएगा।

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