
बिहार के प्रशासनिक गलियारे में एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। राज्य के सुशासन को और अधिक धार देने और नौकरशाही की कार्यकुशलता में वृद्धि करने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने बिहार कैडर के 36 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों को अनिवार्य मध्य सेवाकालीन प्रशिक्षण (MCTP) के लिए चयनित किया है। ये सभी अधिकारी आगामी 15 जून से 10 जुलाई 2026 तक उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में प्रशिक्षण लेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के फेज-4 में शामिल होने वाले अधिकारियों की सूची में पटना, दरभंगा, नालंदा और बेगूसराय जैसे महत्वपूर्ण जिलों के जिलाधिकारी (DM) और कई महत्वपूर्ण विभागों के सचिव स्तर के अधिकारी शामिल हैं। यह प्रशिक्षण न केवल अधिकारियों के व्यक्तिगत कौशल को निखारेगा, बल्कि बिहार की आगामी विकास योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों में भी मील का पत्थर साबित होगा।
मध्य सेवाकालीन प्रशिक्षण (MCTP) का महत्व और प्रशासनिक लक्ष्य
भारतीय प्रशासनिक सेवा में मध्य सेवाकालीन प्रशिक्षण एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसे अधिकारियों की वरिष्ठता और उनके अनुभव के आधार पर विभिन्न चरणों (फेज) में विभाजित किया गया है। फेज-4 का यह प्रशिक्षण उन अधिकारियों के लिए होता है जो सेवा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव को पार कर चुके हैं और अब उन्हें नीति निर्माण और जटिल प्रशासनिक चुनौतियों को संभालने के लिए तैयार किया जाना है।
लाल बहादुर शास्त्री अकादमी में चलने वाले इस प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को आधुनिक गवर्नेंस, डेटा एनालिटिक्स, संकट प्रबंधन, और वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रशासनिक प्रणालियों से अवगत कराया जाएगा। बिहार जैसे राज्य के लिए, जहाँ विकास की गति को तेज करने और नौकरशाही को अधिक जवाबदेह बनाने की चुनौती हमेशा बनी रहती है, वहाँ इन 36 वरिष्ठ अधिकारियों का एक साथ प्रशिक्षित होना दूरगामी परिणाम देगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह प्रशिक्षण अधिकारियों के लिए अनिवार्य है और इसके लिए उन्हें अकादमी की वेबसाइट पर ऑनलाइन निबंधन (रजिस्ट्रेशन) करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
पटना से दरभंगा तक: 4 जिलों के कलेक्टर बदलेंगे अपनी कार्यशैली
इस प्रशिक्षण सूची में सबसे अधिक ध्यान खींचने वाले नाम उन चार जिलाधिकारियों के हैं, जो राज्य के महत्वपूर्ण जिलों की कमान संभाल रहे हैं। पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन एस.एम. का नाम इस सूची में प्रमुखता से शामिल है। पटना की जटिल कानून-व्यवस्था और राजधानी की विकास योजनाओं को संभालने का उनका अनुभव इस ट्रेनिंग के बाद और अधिक परिपक्व होगा। इसी प्रकार, दरभंगा के जिलाधिकारी कौशल कुमार, नालंदा के कुंदन कुमार और बेगूसराय के श्रीकांत शास्त्री भी इस एक महीने की ट्रेनिंग के लिए मसूरी रवाना होंगे।
इन जिलों के जिलाधिकारियों के एक साथ ट्रेनिंग पर जाने से प्रशासनिक स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं की चर्चा भी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि उनकी अनुपस्थिति के दौरान संबंधित प्रमंडलों के आयुक्त या अन्य वरिष्ठ अधिकारी जिलों का अतिरिक्त प्रभार संभाल सकते हैं, ताकि जनहित के कार्य प्रभावित न हों। इन अधिकारियों के वापस लौटने के बाद जिलों में नई ऊर्जा और तकनीकी नवाचार के साथ कार्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।
इन 36 आईएएस अधिकारियों की पूरी सूची और उनके विभाग
मसूरी जाने वाले अधिकारियों की लिस्ट में बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के सचिव और आयुक्त स्तर के अधिकारी शामिल हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार निम्नलिखित अधिकारी प्रशिक्षण में भाग लेंगे:
प्रमुख सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी:
- पल्का साहनी (संयुक्त सचिव, औषध विभाग, भारत सरकार)
- कुन्दन कुमार (सचिव, उद्योग विभाग, बिहार)
- अभय कुमार सिंह (सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग)
- मनीष कुमार (आयुक्त, सारण प्रमंडल, छपरा)
- अजय यादव (सचिव, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग)
- दिवेश सेहरा (सचिव, ग्रामीण कार्य विभाग)
- आशिमा जैन (अपर सदस्य, राजस्व पर्षद, पटना)
- मनोज कुमार सिंह (सचिव, ऊर्जा विभाग)
- राजीव रौशन (सचिव, उच्च शिक्षा विभाग)
- कौशल किशोर (सचिव, युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग)
- कंवल तनुज (सचिव, योजना एवं विकास विभाग)
- चंद्रशेखर सिंह (सचिव, मुख्यमंत्री सचिवालय)
जिलाधिकारी और विशेष सचिव स्तर के अधिकारी:
13. अवनीश कुमार सिंह (आयुक्त, भागलपुर प्रमंडल)
14. अनिमेष कुमार पराशर (आयुक्त, पटना प्रमंडल)
15. राज कुमार (सचिव, परिवहन विभाग)
16. हिमांशु कुमार राय (आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल)
17. आलोक रंजन घोष (निदेशक, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, भारत सरकार)
18. महेन्द्र कुमार (निदेशक, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार)
19. हिमांशु शर्मा (मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जीविका)
20. त्यागराजन एस.एम. (जिलाधिकारी, पटना)
21. शीर्षत कपिल अशोक (प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पथ विकास निगम)
22. राहुल कुमार (प्रबंध निदेशक, नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी)
23. मिथलेश मिश्र (संप्रति पदस्थापन की प्रतीक्षा में)
24. पंकज दीक्षित (निजी सचिव, कार्मिक मंत्रालय, भारत सरकार)
25. निलेश रामचंद्र देवरे (विशेष सचिव, सिविल विमानन विभाग)
26. उदयन मिश्रा (विशेष सचिव, पर्यटन विभाग)
27. कौशल कुमार (जिलाधिकारी, दरभंगा)
28. इनायत खान (प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम)
29. कुन्दन कुमार (जिलाधिकारी, नालंदा)
30. संजीव कुमार (विशेष सचिव, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग)
31. सुनील कुमार यादव (विशेष सचिव, श्रम संसाधन विभाग)
32. अरविन्द कुमार वर्मा (विशेष सचिव, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग)
33. राजेश मीणा (उप निदेशक, लाल बहादुर शास्त्री अकादमी, मसूरी)
34. अमित कुमार (आप्त सचिव, प्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार)
35. श्रीकांत शास्त्री (जिलाधिकारी, बेगूसराय)
ट्रेनिंग के दौरान बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था पर असर
जून के मध्य से जुलाई के पहले सप्ताह तक चलने वाली इस ट्रेनिंग के दौरान बिहार सचिवालय और संबंधित जिला मुख्यालयों में अधिकारियों की कमी महसूस की जा सकती है। मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव चंद्रशेखर सिंह और ऊर्जा विभाग के सचिव मनोज कुमार सिंह जैसे अधिकारियों की अनुपस्थिति में महत्वपूर्ण फाइलों के निष्पादन के लिए वैकल्पिक तंत्र को सक्रिय किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से अधिकारियों के बीच अंतर्विभागीय समन्वय (Inter-departmental Coordination) बेहतर होता है। जब विभिन्न विभागों के सचिव और अलग-अलग जिलों के जिलाधिकारी एक साथ एक महीने तक ट्रेनिंग और चर्चाओं का हिस्सा बनते हैं, तो वे एक-दूसरे की चुनौतियों और समाधानों को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। इसका सीधा लाभ बिहार की जनता को उन योजनाओं के क्रियान्वयन में मिलेगा जो कई विभागों के आपसी तालमेल पर निर्भर करती हैं।
ऑनलाइन निबंधन और विभागीय निर्देश
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे 15 जून से पहले अपनी सभी आधिकारिक जिम्मेदारियों को व्यवस्थित कर लें और प्रशिक्षण के लिए समय पर प्रस्थान सुनिश्चित करें। अधिकारियों को अकादमी की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन निबंधन करना होगा और इसकी सफलता की जानकारी विभाग को साझा करनी होगी। यह प्रशिक्षण न केवल अधिकारियों के करियर के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उनके भविष्य के प्रमोशन और वेतन वृद्धि की प्रक्रियाओं के लिए भी अनिवार्य शर्त के रूप में देखा जाता है।
मसूरी की वादियों में स्थित लाल बहादुर शास्त्री अकादमी भारत की श्रेष्ठतम प्रशासनिक प्रतिभाओं को गढ़ने के लिए जानी जाती है। फेज-4 के इस प्रशिक्षण के बाद जब ये 36 अधिकारी बिहार वापस लौटेंगे, तो उनसे अपेक्षा होगी कि वे राज्य की जटिल प्रशासनिक समस्याओं का आधुनिक और डेटा-आधारित समाधान पेश करें। बिहार सरकार इस निवेश को राज्य के प्रशासनिक ढांचे के सशक्तिकरण के रूप में देख रही है।


