खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- बड़ा फैसला: बिहार के सभी जिलों में एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस की सुविधा होगी शुरू।
- संजीवनी: दिल का दौरा और सांस की तकलीफ जैसे क्रिटिकल मरीजों के लिए ‘गोल्डन ऑवर’ में मिलेगी मदद।
- सुविधा: एम्बुलेंस के अंदर वेंटिलेटर, कार्डियक मॉनिटर और डिफिब्रिलेटर जैसे अत्याधुनिक उपकरण मौजूद।
- विस्तार: राज्य में एम्बुलेंस का कुनबा बढ़कर होगा 2065; 102 नंबर पर मिलेगी मुफ्त सेवा।
पटना: बिहार में अब आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इलाज सड़कों पर दौड़ता नजर आएगा। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बड़ी घोषणा करते हुए बताया कि राज्य के हर जिले में एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस की तैनाती की जाएगी। यह कदम उन गंभीर मरीजों के लिए ‘संजीवनी’ साबित होगा जिन्हें इलाज के लिए सुदूर ग्रामीण इलाकों से बड़े मेडिकल कॉलेजों तक ले जाना पड़ता था।
“मोबाइल आईसीयू” से लैस होगा बिहार
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, यह एम्बुलेंस किसी अस्पताल के आईसीयू (ICU) से कम नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि एमआरआई और वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं केवल बड़े शहरों के मेडिकल कॉलेजों में होती थीं, लेकिन अब यह दूरी एएलएस एम्बुलेंस पाट देगी।
एम्बुलेंस के अंदर क्या-क्या होगा?
- वेंटिलेटर: सांस लेने में तकलीफ वाले मरीजों के लिए।
- कार्डियक मॉनिटर: दिल की धड़कन और बीपी पर नजर रखने के लिए।
- डिफिब्रिलेटर: हार्ट अटैक की स्थिति में जान बचाने के लिए।
- पैरामेडिक्स: उच्च प्रशिक्षित डॉक्टर और पैरामेडिक्स की टीम हमेशा तैनात रहेगी।
आंकड़ों की जुबानी: एम्बुलेंस सेवा का बढ़ता दायरा
बिहार सरकार अपनी एम्बुलेंस फ्लीट को लगातार बढ़ा रही है ताकि किसी भी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में 102 डायल करते ही मदद पहुँच सके।
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विवरण |
संख्या / विवरण |
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वर्तमान में संचालित एम्बुलेंस |
1941 |
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नई शामिल होने वाली एम्बुलेंस |
124 |
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कुल एम्बुलेंस की संख्या (जल्द) |
2065 |
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लाभार्थी (जनवरी 2026 तक) |
15 लाख 94 हजार से अधिक |
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हेल्पलाइन नंबर |
102 (मुफ्त सेवा) |
”हमारी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी वैसी ही इमरजेंसी सेवा देना चाहती है जैसी बड़े शहरों में मिलती है। एएलएस एम्बुलेंस से हम मरीजों को सुरक्षित और स्थिर हालत में उच्चतर अस्पतालों तक पहुँचा सकेंगे।” — मंगल पांडेय, स्वास्थ्य मंत्री, बिहार
VOB का नजरिया: कागजों से निकलकर सड़कों पर दिखे असर
बिहार जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य के लिए 2065 एम्बुलेंस एक अच्छी संख्या है, लेकिन असली चुनौती इनके मेंटेनेंस और रिस्पॉन्स टाइम की है। अक्सर देखा जाता है कि टायर पंचर या तेल की कमी के कारण एम्बुलेंस समय पर नहीं पहुँचती। अगर प्रशिक्षित स्टाफ और उपकरणों की सही देखरेख हो, तो यह योजना वाकई बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की सूरत बदल सकती है।


