​मिशन मोड में स्वास्थ्य मंत्री: निशांत का लगातार दूसरे दिन ‘फुल एक्शन’, अस्पतालों की बदलेगी तस्वीर, गरीबों के लिए खुला बड़ा पिटारा

बिहार के सियासी गलियारों में नई कैबिनेट के गठन के साथ ही कामकाज की जो रफ़्तार पकड़ी है, उसने प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी है। सबसे ज्यादा चर्चा स्वास्थ्य विभाग के नए मुखिया निशांत की हो रही है, जिन्होंने कार्यभार संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके शब्दकोश में ‘अवकाश’ जैसा कोई शब्द नहीं है। शुक्रवार को पदभार ग्रहण करने के बाद शनिवार को जब आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहता है, तब निशांत सचिवालय के स्वास्थ्य विभाग में फाइलों को खंगाल रहे थे और अधिकारियों के पसीने छुड़ा रहे थे। यह लगातार दूसरा दिन था जब स्वास्थ्य मंत्री पूरी तरह से एक्शन मोड में दिखे और उन्होंने राज्य की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप पर काम शुरू कर दिया है।

​निशांत के तेवरों से यह साफ हो गया है कि वह केवल दफ्तर में बैठकर आंकड़ों की बाजीगरी देखने के लिए मंत्री नहीं बने हैं। शनिवार को हुई मैराथन बैठक में उन्होंने विभाग के आला अधिकारियों के साथ घंटों चर्चा की। इस बैठक का केंद्र बिंदु पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) के साथ-साथ राज्य के तमाम मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल रहे। मंत्री ने अधिकारियों से सीधे सवाल किए कि आखिर क्यों राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों को स्ट्रेचर के लिए इंतजार करना पड़ता है और क्यों दवाइयों की उपलब्धता को लेकर शिकायतें कम नहीं हो रही हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में निर्देश दिया कि अस्पतालों की पुरानी कार्यशैली को अब बदलना होगा और मरीजों की सेवा में किसी भी तरह की कोताही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​स्वास्थ्य मंत्री निशांत का यह ‘फुल एक्शन’ केवल कागजी निर्देशों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने विभाग के अधिकारियों से एक-एक बिंदु पर जानकारी ली। उन्होंने विशेष रूप से उन परियोजनाओं की सूची मांगी जो लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं। मंत्री का जोर इस बात पर रहा कि बिहार के हर नागरिक को, चाहे वह समाज के आखिरी पायदान पर खड़ा गरीब हो या कोई रसूखदार व्यक्ति, सबको एक समान और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिले। उन्होंने कहा कि जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति के आधार पर इलाज में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। निशांत ने अधिकारियों को यह सख्त निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले हर मरीज को दवाइयां अस्पताल परिसर के भीतर से ही मिलें और उन्हें बाहर की दुकानों पर निर्भर न रहना पड़े।

​ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं के बढ़ते अंतर को कम करना निशांत की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। बैठक के दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अक्सर देखा जाता है कि बेहतर इलाज की तलाश में ग्रामीण इलाकों के लोग पटना या अन्य बड़े शहरों की तरफ रुख करते हैं, जिससे बड़े अस्पतालों पर दबाव बढ़ जाता है। मंत्री ने निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों को इतना सक्षम बनाया जाए कि छोटी बीमारियों और प्रसव जैसी सुविधाओं के लिए लोगों को अपने गांव से दूर न जाना पड़े। उनका लक्ष्य है कि बिहार का स्वास्थ्य ढांचा इतना मजबूत हो कि वह देश के अन्य विकसित राज्यों के लिए एक उदाहरण बन सके।

​सम्राट चौधरी की सरकार में निशांत को स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी मिलना उनकी कार्यक्षमता पर भरोसे को दर्शाता है। शुक्रवार को पदभार ग्रहण करने के दौरान उन्होंने जो वादे किए थे, शनिवार की सक्रियता ने उन्हें धरातल पर उतारने की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि उन्हें “यस सर” कहने वाले अधिकारी नहीं, बल्कि काम करने वाले और परिणाम देने वाले सहयोगियों की जरूरत है। मंत्री ने खुद विभाग के विभिन्न विंग्स का निरीक्षण किया और वहां मौजूद कर्मियों से उनकी समस्याओं के बारे में पूछा। यह पहली बार देखा जा रहा है कि कोई मंत्री पद संभालते ही इस कदर सूक्ष्म स्तर पर जाकर चीजों को समझने की कोशिश कर रहा है।

​अस्पतालों को लेकर किए गए बड़े ऐलान में निशांत ने सुरक्षा और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में केवल डॉक्टर और दवा ही काफी नहीं है, बल्कि वहां का वातावरण ऐसा होना चाहिए कि मरीज को वहां पहुँचते ही राहत महसूस हो। उन्होंने पीएमसीएच सहित अन्य बड़े अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने और दलालों के तंत्र को जड़ से खत्म करने के लिए पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय बनाने का निर्देश दिया है। मंत्री ने साफ कर दिया है कि अगर किसी अस्पताल परिसर में गंदगी या अव्यवस्था पाई गई, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी वहां के अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों की होगी।

​इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार विकास और सेवा के एजेंडे पर समझौता करने के मूड में नहीं है। निशांत का लगातार दूसरे दिन बैठकों का दौर जारी रखना और छुट्टी के दिन भी काम के प्रति समर्पण यह बताता है कि आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी संकेत दिया है कि वह बहुत जल्द औचक निरीक्षण का सिलसिला शुरू करेंगे, ताकि अस्पतालों की जमीनी हकीकत को बिना किसी सूचना के देखा जा सके। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा आम है कि “काम नहीं तो खैर नहीं”। निशांत की यह सक्रियता राज्य की आम जनता के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है, जो लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का इंतजार कर रही है।

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