बिहार सरकार का बड़ा फैसला: OBC कन्या आवासीय विद्यालयों में अब शिक्षकों-कर्मियों की बेटियों को भी मिलेगा नामांकन

पटना, 25 जून 2025: बिहार सरकार के पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय लेते हुए ‘अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या आवासीय +2 उच्च विद्यालयों’ में पदस्थापित शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों की बेटियों को नामांकन की सुविधा देने का फैसला किया है। यह निर्णय न केवल कर्मचारी कल्याण को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समावेशी वातावरण को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक अहम कदम है।

इन आवासीय विद्यालयों में छात्राओं को मुफ्त शिक्षा और आवास की सुविधा दी जाती है। अब तक यहां केवल पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग की छात्राओं का ही प्रवेश होता था, लेकिन नए निर्णय के तहत अब इन विद्यालयों में कार्यरत नियमित शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों की अधिकतम दो बेटियों को डे स्कॉलर (दिवाकालीन छात्रा) के रूप में नामांकन दिया जा सकेगा।

प्रमुख प्रावधान

  • स्वैच्छिक नामांकन: बेटियों का नामांकन उसी विद्यालय में होगा जहां उनके माता-पिता पदस्थापित हैं, लेकिन यह अनिवार्य नहीं बल्कि वैकल्पिक होगा।
  • आरक्षण से छूट: कर्मचारियों की बेटियों के लिए BC-I या BC-II वर्ग की जाति की अनिवार्यता नहीं होगी।
  • अतिरिक्त सीटों पर प्रवेश: इन बेटियों का नामांकन विद्यालय की निर्धारित सीट क्षमता के बाहर किया जाएगा, जिससे सामान्य प्रवेश प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  • आवासीय व्यवस्था: बेटियां विद्यालय परिसर में अपने माता-पिता के साथ रह सकेंगी, लेकिन उनके भोजन और कपड़ों की व्यवस्था अभिभावकों को करनी होगी।
  • स्थानांतरण पर सुविधा: कर्मचारी के स्थानांतरण की स्थिति में उसकी बेटी का नामांकन नए विद्यालय में स्थानांतरित किया जा सकेगा।
  • लड़कियों के लिए ही लागू: यह व्यवस्था केवल बालिकाओं पर ही लागू होगी।

क्या बदलेगा?

इस फैसले से उन शिक्षकों और कर्मियों को राहत मिलेगी जो अब तक अपनी बेटियों को दूर के विद्यालयों में भेजने को मजबूर थे। इसके साथ ही यह एक सहायक और समावेशी शैक्षणिक माहौल की स्थापना की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

विभाग की मंशा

विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह संशोधन शिक्षकों और कर्मियों के पारिवारिक संतुलन और छात्राओं की शिक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। यह पहल सरकारी विद्यालयों में कार्यरत स्टाफ के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण को भी दर्शाती है।

यह निर्णय निश्चित रूप से बिहार सरकार के शैक्षणिक संस्थानों में एक समग्र, सहायक और संवेदनशील वातावरण बनाने के प्रयासों को मजबूती देगा।

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