बिहार सरकार का बड़ा फैसला, कर्मचारियों के सैलरी पैकेज खातों के लिए 9 प्रमुख बैंकों के साथ एमओयू एक साल के लिए फिर बढ़ाया गया

पटना। बिहार सरकार ने राज्य के लाखों नियमित और संविदा कर्मचारियों को बेहतर बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वित्त विभाग ने सरकारी कर्मियों के सैलरी पैकेज खातों से संबंधित देश के नौ प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ किए गए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का एक वर्ष के लिए नवीनीकरण कर दिया है। इस फैसले के बाद कर्मचारियों को पहले की तरह विशेष बैंकिंग सुविधाएं, बीमा सुरक्षा, रियायती ऋण और अन्य वित्तीय लाभ बिना किसी व्यवधान के मिलते रहेंगे।

वित्त विभाग के कार्यालय में मंगलवार को आयोजित एक उच्चस्तरीय कार्यक्रम में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वित्त विभाग की सचिव (व्यय) रचना पाटिल ने की। इस अवसर पर संबंधित बैंकों के महाप्रबंधक, आंचलिक प्रबंधक तथा वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सभी पक्षों ने नए कार्यकाल के लिए समझौता पत्र पर हस्ताक्षर कर अगले एक वर्ष तक इस व्यवस्था को जारी रखने पर सहमति जताई।

वित्त विभाग के अनुसार राज्य सरकार ने जुलाई 2025 में कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इन नौ बैंकों के साथ एक वर्ष का समझौता किया था। इसकी अवधि 6 जुलाई 2026 को समाप्त हो रही थी। कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं में किसी प्रकार का व्यवधान न आए, इसलिए समय रहते इसे तत्काल प्रभाव से अगले एक वर्ष के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

सरकार का मानना है कि आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था में कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने के साथ-साथ सुरक्षित और सुविधाजनक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से यह सैलरी पैकेज व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों को सामान्य बैंक खातों की तुलना में कई अतिरिक्त लाभ दिए जाते हैं।

इस विशेष सैलरी पैकेज के अंतर्गत कर्मचारियों को शून्य शेष (ज़ीरो बैलेंस) खाते की सुविधा मिलती है। इसके अलावा व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, ओवरड्राफ्ट सुविधा, आकर्षक ब्याज दरों पर ऋण, आसान बैंकिंग सेवाएं और कई अन्य विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करना और उन्हें बेहतर बैंकिंग अनुभव उपलब्ध कराना है।

वित्त विभाग ने स्पष्ट किया कि राज्य के नियमित तथा संविदा दोनों प्रकार के कर्मचारी इस व्यवस्था का लाभ लेते रहेंगे। कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार सूचीबद्ध किसी भी बैंक में अपना सैलरी पैकेज खाता संचालित कर सकते हैं। इससे कर्मचारियों को अपनी पसंद के बैंक का चयन करने की स्वतंत्रता भी मिलती है।

जिन नौ प्रमुख बैंकों के साथ समझौते का नवीनीकरण किया गया है, उनमें भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, इंडियन बैंक और यूको बैंक शामिल हैं। ये सभी बैंक राज्य के विभिन्न जिलों और प्रखंडों तक अपनी शाखाओं के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को भी आसानी से बैंकिंग सुविधाएं मिल सकें।

समझौता हस्ताक्षर कार्यक्रम के दौरान सचिव (व्यय) रचना पाटिल ने बैंक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों को सैलरी पैकेज से जुड़े सभी लाभ समय पर और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना बैंकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए और बैंक अपनी सभी शाखाओं को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करें।

उन्होंने यह भी कहा कि बैंक यह सुनिश्चित करें कि वेतन जमा होने, ऑनलाइन लेनदेन, एटीएम सेवाओं, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। यदि किसी कर्मचारी को किसी समस्या का सामना करना पड़ता है तो उसका समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।

वित्त विभाग का मानना है कि कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा मजबूत होने से उनका मनोबल भी बढ़ता है। जब कर्मचारियों को बेहतर बैंकिंग सेवाएं और अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है तो वे अपने कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। इसी कारण राज्य सरकार पिछले कई वर्षों से इस प्रकार की सैलरी पैकेज व्यवस्था को लगातार जारी रखे हुए है।

बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी सैलरी पैकेज खातों की सबसे बड़ी विशेषता यह होती है कि इनमें सामान्य खातों की तुलना में अतिरिक्त सुविधाएं मिलती हैं। इनमें दुर्घटना बीमा, ओवरड्राफ्ट, कम ब्याज दर पर ऋण, तेज बैंकिंग सेवाएं और कई मामलों में विशेष ग्राहक सहायता जैसी सुविधाएं भी शामिल होती हैं। यही कारण है कि सरकारी कर्मचारियों के बीच इस प्रकार के खाते काफी लोकप्रिय माने जाते हैं।

सरकार के इस फैसले से लाखों कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। यदि समझौते का समय पर नवीनीकरण नहीं होता तो कई बैंकिंग सुविधाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती थी। लेकिन अब कर्मचारियों को बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के पहले की तरह सभी सुविधाएं मिलती रहेंगी।

वित्त विभाग ने सभी संबंधित बैंकों से यह भी अपेक्षा की है कि वे अपने कर्मचारियों को इस समझौते की शर्तों से अवगत कराएं तथा शाखा स्तर पर किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न होने दें। साथ ही सभी बैंक यह सुनिश्चित करें कि राज्य सरकार के कर्मचारी जब भी किसी शाखा में जाएं तो उन्हें निर्धारित सैलरी पैकेज के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

कार्यक्रम में मौजूद बैंक अधिकारियों ने भी सरकार को भरोसा दिलाया कि वे समझौते की सभी शर्तों का पूरी तरह पालन करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी शाखाओं को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे ताकि कर्मचारियों को बिना किसी रुकावट के सेवाएं मिलती रहें। साथ ही डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

वित्त विभाग का यह निर्णय राज्य सरकार की कर्मचारी हितैषी नीतियों का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार लगातार ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करने का प्रयास कर रही है, जिनसे सरकारी कर्मियों को बेहतर वित्तीय सुरक्षा, आधुनिक बैंकिंग सेवाएं और सुविधाजनक लेनदेन का लाभ मिल सके।

आने वाले एक वर्ष तक यह व्यवस्था प्रभावी रहेगी और राज्य के लाखों नियमित एवं संविदा कर्मचारी पहले की तरह इन नौ प्रमुख बैंकों के माध्यम से अपने सैलरी पैकेज खातों का संचालन करते हुए विशेष बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाते रहेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि कर्मचारियों को सुरक्षित, पारदर्शी और बाधारहित बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हों, जिससे वे पूरी निष्ठा और दक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

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