बिहार सरकार के बड़े फैसले: गया-बैंकॉक सीधी उड़ान को हरी झंडी, औद्योगिक रफ्तार और खेल ढांचे के विकास के साथ सीमा सुरक्षा के लिए सृजित होगा आईजी बॉर्डर का नया पद

पटना, 20 मई 2026। बिहार सरकार के विभिन्न प्रशासनिक विभागों द्वारा राज्य के सर्वांगीण विकास, सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने, पर्यटन को वैश्विक मानचित्र पर बढ़ावा देने और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाने के उद्देश्य से कई अत्यंत महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए गए हैं। इन निर्णयों में बड़े पैमाने पर निजी पूँजी निवेश को प्रोत्साहन देने से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाई संपर्कता बढ़ाने और खेल के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए अहम प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं। सरकार के ये कदम राज्य के आर्थिक विन्यासों को नई गति देने और स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

औद्योगिक इकाइयों की स्थापना: नालंदा और कैमूर में बड़े पूँजी निवेश से सृजित होंगे रोजगार के नए अवसर

​उद्योग विभाग की ओर से राज्य में विनिर्माण और प्रसंस्करण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए दो बड़े निवेश प्रस्तावों पर विधिक मुहर लगाई गई है। नालंदा जिले के बेन अंचल के अंतर्गत अरावन में मेसर्स पटेल वेयरहाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड को 960 एमटीपीडी (MTPD) क्षमता वाली पार-बॉईल्ड राईस उत्पादन इकाई स्थापित करने की अनुमति दी गई है। इस परियोजना को बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली-2016 के नियम-7 के उप नियम (2) (iv) के तहत कुल 8818.00 लाख रुपये (अठासी करोड़ अठारह लाख रुपये) के निजी पूँजी निवेश के साथ स्वीकृति मिली है। इस इकाई के चालू होने से राज्य में न केवल निवेश का ग्राफ बढ़ेगा बल्कि कुल 185 कुशल और अकुशल कामगारों को प्रत्यक्ष नियोजन मिल सकेगा।

​दूसरी तरफ, कैमूर जिले के कुदरा में मेसर्स ई एस ई एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अनाज आधारित (ग्रेन बेस्ड) 60 केएलपीडी (KLPD) क्षमता के इथेनॉल प्लांट और 2.0 मेगावाट के को-जेनरेशन पावर प्लांट इकाई की स्थापना की जाएगी। इस परियोजना के लिए कुल 7345.00 लाख रुपये (तिहत्तर करोड़ पैतालीस लाख रुपये) के निजी पूँजी निवेश पर वित्तीय प्रोत्साहन की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस औद्योगिक इकाई के धरातल पर उतरने से क्षेत्र के समग्र विकास के साथ-साथ कुल 93 कुशल एवं अकुशल श्रमिकों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

अमृतसर कोलकाता इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर: गयाजी में 19 एमएलडी जलापूर्ति और जलाशय निर्माण का खाका

​जल संसाधन विभाग द्वारा औद्योगिक गलियारे को ध्यान में रखते हुए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। भारत सरकार द्वारा पूर्वी समर्पित फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर अमृतसर कोलकाता इण्डस्ट्रीयल कॉरिडोर (AKIC) का विकास किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य 1839 किलोमीटर की लंबाई में छह राज्यों के भीतर आर्थिक और रोजगार क्षमताओं का सटीक आकलन करना है। इसके तहत विनिर्माण, कृषि प्रसंस्करण, सेवा क्षेत्र और निर्यात-उन्मुख इकाइयों में निवेश को प्रेरित करने के साथ-साथ समग्र आर्थिक तरक्की सुनिश्चित की जानी है।

​इसी कड़ी में, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी), गयाजी के लिए नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनआईसीडीसी) द्वारा उद्योगों के प्रकार और प्रारंभिक मास्टर प्लान के आधार पर पानी की उपलब्धता का आकलन किया गया है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, यहाँ शुरुआती मांग 8.5 एमएलडी (मिलियन लेटर प्रति दिन) और अंतिम मांग 19.00 एमएलडी तय की गई है। इस अंतिम मांग को पूरा करने के लिए सालाना लगभग 8.5 एमसीएम (मिलियन घन मीटर) पानी की जरूरत होगी।

​इस मांग की पूर्ति के लिए आईएमसी डोभी (गयाजी) फेज-02 के तहत बियाडा द्वारा अधिग्रहीत की जाने वाली 1300 एकड़ भूमि में से प्लॉट संख्या 174 और 175 के पास जल संसाधन विभाग को जलाशय निर्माण हेतु जमीन दी जा रही है। क्षेत्रीय अभियंता ने 19 एमएलडी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 8.5 एमसीएम भंडारण क्षमता वाले इस जलाशय के निर्माण हेतु आवश्यक लगभग 324 एकड़ भूमि के लिए बियाडा, पटना को संसूचित कर दिया है।

​चूंकि लीलाजन नदी पूरी तरह से वर्षा पर आधारित है और इसमें केवल मॉनसून के दौरान ही जल प्रवाह होता है, इसलिए विशेष तकनीकी योजना बनाई गई है। घोड़ाघाट के पास लीलाजन नदी के बाएं हिस्से से निकलने वाली लीलाजन सिंचाई योजना के तहत मुख्य मिट्टी की नहर (अर्देन नहर) की लाइनिंग की जाएगी। लाइनिंग के माध्यम से इसके रूपांकित जलश्राव 18 क्यूमेक को आवश्यकतानुसार 2.5 क्यूमेक तक बढ़ाया जा सकता है। इसके तहत मॉनसून के दौरान नदी से 40 दिनों तक पानी लेकर 8.5 एमसीएम क्षमता वाले जलाशय में पूरे एक वर्ष के लिए पानी का संचय किया जाना तय हुआ है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 18 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और स्थानीय निकायों का वित्तीय प्रबंधन

​पंचायती राज विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़ी वित्तीय पहल की है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आलोक में ग्रामीण स्थानीय निकायों को भारत सरकार से मिलने वाली ‘Health Sector Grant’ मद की राशि जारी करने के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से कुल ₹7,47,97,64,000.00 (सात सौ सैंतालीस करोड़ संतानवे लाख चौंसठ हजार रुपये) की अग्रिम राशि की स्वीकृति दी गई है। इस कदम से ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं काफी मजबूत हो सकेंगी।

​इसी के साथ, वित्त विभाग द्वारा स्थानीय निकायों के सुचारू संचालन के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया गया है। षष्ठम राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा अवधि 31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुकी है। वर्तमान में सप्तम राज्य वित्त आयोग की नई सिफारिशें अभी तक प्राप्त नहीं हुई हैं। ऐसी परिस्थिति में वित्तीय वर्ष 2026-27 में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को अनुदान राशि का हस्तांतरण संभव नहीं हो पाता, जिससे जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावित होने की आशंका थी। जनहित को देखते हुए सरकार ने निर्णय लिया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए षष्ठम राज्य वित्त आयोग की उन अनुशंसाओं के अनुरूप ही राशि का हस्तांतरण और क्रियान्वयन जारी रखा जाएगा, जिन्हें राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-25 तक के लिए स्वीकृत किया गया था।

विज्ञान-तकनीकी विभाग का पुनर्गठन: ‘यंग प्रोफेशनल नीति-2026’ को दी गई मंजूरी

​विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे और कार्यक्षमता में बड़े बदलाव किए गए हैं। बिहार काउंसिल ऑन Science एंड टेक्नोलॉजी, पटना और उसके अधीन संचालित कार्यालयों के लिए पूर्व में स्वीकृत कुल 94 पदों में से 87 पदों को प्रत्यर्पित करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही सुचारू कामकाज के लिए पदाधिकारियों और कर्मियों के कुल 53 नए अतिरिक्त पदों के सृजन की मंजूरी दी गई है। इस पुनर्गठन से परिषद के अनुश्रवण और संचालन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा, जिसका सीधा लाभ विज्ञान में रुचि रखने वाले छात्र-छात्राओं, पर्यटकों और आम जनता को मिलेगा।

​इसके अतिरिक्त, विभाग एवं उसके अधीनस्थ संस्थानों में तकनीकी व विशेषज्ञ सेवाओं की त्वरित आपूर्ति के लिए ‘यंग प्रोफेशनल चयन नीति-2026’ को मंजूरी दी गई है। इस नई नीति के लागू होने से प्रतिभावान युवाओं की सेवाएं जल्द हासिल की जा सकेंगी, जिससे संस्थानों की कार्यक्षमता में बढ़ोतरी होगी और अनुसंधान व अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के संपादन में उनका बहुमूल्य सहयोग लिया जा सकेगा।

सीमा सुरक्षा के लिए नया आईजी पद और विशेष कार्य बल (STF) का विस्तार

​गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर दो दूरगामी फैसले लिए हैं। राज्य की अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सीमावर्ती सुरक्षा को पुख्ता करने तथा आसूचना तंत्र को आधुनिक एवं अधिक विकसित बनाने के उद्देश्य से विशेष शाखा के तहत ‘पुलिस महानिरीक्षक, बॉर्डर (IG, Border)’ के 1 नए पद के सृजन को मंजूरी दी गई है।

​इसके अलावा, वामपंथी उग्रवादियों पर प्रभावी नियंत्रण और उनके पूर्ण निरोध के लिए विशेष कार्य बल (STF) को और अधिक धारदार बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत एसटीएफ में विशिष्ट दक्षता, आसूचना संग्रहण कौशल और पूर्व अनुभव रखने वाले चिन्हित 50 दक्ष पुलिस कर्मियों को अधिकतम 15 वर्षों की लंबी अवधि तक प्रतिनियुक्ति पर रखने की स्वीकृति दी गई है। इस संबंध में आवश्यक शक्तियों का प्रत्यायोजन पुलिस महानिदेशक, बिहार, पटना को कर दिया गया है।

खेल मैदानों के लिए भूमि हस्तांतरण और गया से बैंकॉक के लिए सीधी उड़ान सेवा

​राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के युवाओं को खेल की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तीन जिलों में खेल विभाग को निःशुल्क भूमि हस्तांतरित करने के प्रस्तावों को हरी झंडी दी है:

  • ​अरवल जिले के करपी अंचल के मौजा-झिकटिया (थाना सं०-227, खाता सं०-61, खेसरा सं०-51) में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भवन के निर्माण के लिए 06.81 एकड़ गैरमजरूआ मालिक परती कदीम भूमि खेल विभाग, बिहार, पटना को अंतर-विभागीय रूप से स्थायी तौर पर निःशुल्क हस्तांतरित की गई है।
  • ​औरंगाबाद जिले के देव अंचल के विभिन्न मौजा में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, देव के निर्माण हेतु कुल 13.09 एकड़ भूमि खेल विभाग, बिहार, पटना को निःशुल्क स्थायी रूप से सौंपने की मंजूरी दी गई है।
  • ​सहरसा जिले के सलखुआ अंचल के मौजा-कबीरा (थाना सं०-255, खाता सं०-1025, खेसरा सं०-522) में मुख्यमंत्री विकास योजना के तहत आउटडोर स्टेडियम के निर्माण के लिए 06.61 एकड़ अनावाद बिहार सरकार की भूमि को खेल विभाग को स्थायी रूप से स्थानांतरित किया गया है।

​उड्डयन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिहार की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सिविल विमानन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। नए अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर सीधी हवाई सेवा शुरू करने की नीति के तहत आमंत्रित निविदा में मेसर्स इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड (इंडिगो एयरलाइंस) द्वारा गयाजी-बैंकॉक मार्ग के लिए एकल निविदा प्राप्त हुई थी। सरकार ने नामांकन के आधार पर इस निविदा का चयन करते हुए व्यवहार्यता अंतर निधि (Viability Gap Funding – VGF) के रूप में अधिकतम 12 महीनों के लिए ₹10,40,00,000/- (दस करोड़ चालीस लाख रुपये) की प्रशासनिक एवं व्यय स्वीकृति प्रदान की है।

​गया अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से बैंकॉक (थाईलैंड) के बीच सीधी उड़ान सेवा शुरू होने से विदेशी और विशेषकर बौद्ध पर्यटकों के बिहार आने की राह आसान होगी। थाईलैंड से हर साल बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु बोधगया सहित अन्य ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों के दर्शन के लिए भारत आते हैं, जिनमें बिहार के बौद्ध स्थलों का विशेष महत्व है। इस सीधी सेवा से पर्यटन गतिविधियों का विस्तार होगा और बड़े पैमाने पर होटल, परिवहन, आतिथ्य, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को आर्थिक गति मिलेगी। इससे न केवल क्षेत्रीय विकास तेज होगा बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे, जिससे बिहार को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक मजबूत पहचान मिलेगी।

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