
बिहार सरकार ने 10 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन-पेंशन का संकट टाल दिया है, लेकिन फिलहाल राशि खातों में नहीं पहुंची है। सचिवालय के लगभग 50 हजार कर्मचारियों को 6 अप्रैल और जिलों में तैनात कर्मियों को 4 अप्रैल से भुगतान शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार को 10 अप्रैल को केंद्र से मिलने वाली 8500 करोड़ रुपये की टैक्स हिस्सेदारी का इंतजार है। इसके आने तक ट्रेजरी से फंड ट्रांसफर धीमी गति से किया जाएगा, ताकि आपातकालीन खर्चों के लिए नकदी सुरक्षित रहे। केंद्रीय योजनाओं के मैचिंग ग्रांट में अब तक 3631 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
वित्त विभाग ने CFMS और HRMS सिस्टम की टेस्टिंग पूरी कर ली है। हालांकि, 3 अप्रैल को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण बैंकिंग प्रक्रिया बाधित रहेगी। सामान्यत: महीने के अंतिम कार्य दिवस पर होने वाला वेतन-पेंशन का भुगतान इस बार वित्तीय वर्ष की क्लोजिंग और भारी दबाव के कारण एक सप्ताह पीछे हो गया।
सरकार ने केवल चालू वेतन और पेंशन को प्राथमिकता दी है। बाकी भुगतान जैसे मदरसा और संस्कृत शिक्षकों का वेतन, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के बकाया फिलहाल अटके हुए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम वित्तीय प्रबंधन और कैश फ्लो नियंत्रण का हिस्सा है। मार्च महीने में आमतौर पर भुगतान में उथल-पुथल होती है, लेकिन इस बार सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। इसलिए विकास योजनाओं और ठेकेदारों के भुगतान पर रोक जारी है।
सरकार का संदेश स्पष्ट है: केवल जरूरी प्रशासनिक खर्च, वेतन और पेंशन प्राथमिकता में हैं। बाकी भुगतान तब तक रुके रहेंगे जब तक केंद्र से 8500 करोड़ रुपये का फंड नहीं आता और खजाना पूरी तरह संतुलित नहीं हो जाता।


