
पटना। बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव हुआ है। नवनियुक्त सचिव दीपक आनंद ने शुक्रवार को विभाग में औपचारिक रूप से अपना पदभार ग्रहण कर लिया। पद संभालने के तुरंत बाद उन्होंने विभागीय कार्यों की समीक्षा शुरू कर दी और विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति का विस्तृत जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को पारदर्शी, समयबद्ध और जनहित आधारित कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए।
पदभार ग्रहण करने के बाद सचिव दीपक आनंद ने सबसे पहले विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों से परिचय प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली, योजनाओं की वर्तमान स्थिति और आम लोगों तक सेवाओं की पहुंच से संबंधित जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें विभाग के विभिन्न कार्यों और चल रही योजनाओं के बारे में विस्तार से अवगत कराया।
इसके बाद विभागीय मुख्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली, राशन कार्ड प्रबंधन, खाद्यान्न वितरण, उपभोक्ता संरक्षण और डिजिटल सेवाओं समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।
सचिव दीपक आनंद ने समीक्षा के दौरान स्पष्ट कहा कि विभाग का सबसे बड़ा उद्देश्य आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सरल तरीके से पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और सभी योजनाओं का क्रियान्वयन तय समय सीमा के भीतर प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस व्यवस्था पर विशेष चर्चा हुई। सचिव ने राशन वितरण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राशन कार्डधारियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि राशन वितरण में तकनीकी निगरानी को और मजबूत किया जाए ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी या शिकायत की स्थिति में त्वरित कार्रवाई हो सके। विभागीय अधिकारियों को डिजिटल रिकॉर्ड अपडेट रखने और लाभार्थियों के डेटा की नियमित समीक्षा करने को भी कहा गया।
राशन कार्ड प्रबंधन को लेकर भी सचिव ने कई अहम निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नए राशन कार्ड आवेदन, सुधार और अपडेट की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाया जाए। आम लोगों को बार-बार कार्यालयों का चक्कर न लगाना पड़े, इसके लिए ऑनलाइन और डिजिटल सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े मामलों की समीक्षा के दौरान दीपक आनंद ने कहा कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता में शामिल है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपभोक्ता शिकायतों के समाधान में तेजी लाई जाए और शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत किया जाए।
सचिव ने यह भी कहा कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार से विभागीय कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी। उन्होंने तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य में विभागीय सेवाओं को अधिक से अधिक ऑनलाइन और पेपरलेस बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
बैठक में मौजूद अधिकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने टीम भावना और बेहतर समन्वय के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े विभागों में जवाबदेही और संवेदनशीलता बेहद जरूरी होती है। यदि विभागीय अधिकारी समर्पण और पारदर्शिता के साथ काम करेंगे तो योजनाओं का लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचेगा।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग बिहार सरकार का एक महत्वपूर्ण विभाग माना जाता है क्योंकि यह सीधे तौर पर करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। राज्य में बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिए सरकारी राशन योजनाओं का लाभ उठाते हैं। ऐसे में विभाग की कार्यक्षमता और पारदर्शिता का असर सीधे आम जनता पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्यान्न वितरण प्रणाली में तकनीकी सुधार और डिजिटल निगरानी से कई स्तरों पर पारदर्शिता बढ़ी है, लेकिन अभी भी कई जिलों में शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में नए सचिव के सामने विभागीय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
राज्य सरकार भी हाल के वर्षों में विभागीय सेवाओं को डिजिटल बनाने पर जोर दे रही है। राशन कार्ड सत्यापन, ई-पीओएस मशीन, ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल डेटा प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। माना जा रहा है कि नए सचिव के नेतृत्व में इन योजनाओं को और गति मिल सकती है।
बैठक में बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों ने भी खाद्यान्न भंडारण, परिवहन और वितरण व्यवस्था से जुड़ी जानकारियां साझा कीं। सचिव ने खाद्यान्न आपूर्ति श्रृंखला को और बेहतर बनाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।
सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में विभाग विभिन्न योजनाओं की जिला स्तर पर भी समीक्षा कर सकता है। साथ ही शिकायत निवारण व्यवस्था और डिजिटल सेवाओं को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।
फिलहाल विभागीय अधिकारियों के बीच नए सचिव की कार्यशैली को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। अधिकारियों का मानना है कि दीपक आनंद ने पदभार संभालते ही जिस तरह योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की है, उससे साफ संकेत मिल रहा है कि विभागीय कार्यों की निगरानी और जवाबदेही को लेकर अब सख्ती बढ़ सकती है।
राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता सेवाओं से जुड़ी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के लोगों तक पहुंचे। ऐसे में नए सचिव के सामने विभागीय सुधारों को तेज गति देने और जनहित से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने की बड़ी चुनौती रहेगी।


