
पटना। बिहार की आर्थिक बुनियाद को और अधिक सुदृढ़ करने तथा विकास की गति को तेज करने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को राज्य के वित्तीय ढांचे की गहन समीक्षा की। मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित ‘संवाद’ कक्ष में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में वित्त विभाग तथा आंतरिक संसाधनों से जुड़े तमाम प्रमुख विभागों के कामकाज का लेखा-जोखा लिया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में राज्य की वित्तीय स्थिति संतोषजनक है, लेकिन इसे और बेहतर बनाने के लिए विभागों को पुराने ढर्रे से हटकर ‘नवाचार’ (Innovation) अपनाना होगा। उन्होंने अधिकारियों को वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और संसाधनों के सदुपयोग का कड़ा निर्देश दिया, ताकि बजट का लाभ सीधे आम जनता तक पहुँच सके।
विभागों का रिपोर्ट कार्ड: राजस्व संग्रहण और उपलब्धियों पर मंथन
समीक्षा बैठक के दौरान राज्य के राजस्व से जुड़े प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण (Presentation) के माध्यम से अपने-अपने लक्ष्यों और अब तक की उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा दिया।
इन विभागों की हुई गहन समीक्षा:
- वित्त एवं वाणिज्य कर विभाग: कर संग्रह की वर्तमान स्थिति और नई संभावनाओं पर चर्चा।
- खान एवं भूतत्व विभाग: खनन क्षेत्र से प्राप्त होने वाले राजस्व और निगरानी तंत्र की समीक्षा।
- नगर विकास एवं आवास विभाग: नगरीय संसाधनों और स्थानीय निकायों के कर प्रबंधन पर जोर।
- राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग: भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण और राजस्व आय पर चर्चा।
- परिवहन एवं पंचायती राज विभाग: परिवहन कर और ग्रामीण संसाधनों के वित्तीय सशक्तीकरण पर मंथन।
- मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग: निबंधन शुल्क और प्रवर्तन कार्यों की प्रगति की जानकारी।
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक विभाग के राजस्व संग्रहण के लक्ष्य और उसके अनुपात में हुए वास्तविक संग्रहण की तुलनात्मक समीक्षा की और जहाँ सुधार की आवश्यकता है, वहां आवश्यक निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री के निर्देश: ‘वित्तीय अनुशासन’ और ‘नवाचार’ है अनिवार्य
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को भविष्य का रोडमैप देते हुए तीन मुख्य बिंदुओं पर विशेष बल दिया:
- नवाचार और नई संभावनाएँ: मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय राजस्व संग्रहण और संवर्द्धन के लिए नए और आधुनिक तरीकों की तलाश की जाए। उन्होंने अधिकारियों को ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचने और नई संभावनाओं को तलाशने को कहा।
- वित्तीय अनुशासन: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सभी विभागों में कड़ा वित्तीय अनुशासन अनिवार्य है। संसाधनों का सदुपयोग सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने अपेक्षित विभागीय कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए।
- समयबद्ध लक्ष्य: सरकार द्वारा विभिन्न विभागों के लिए जो भी वार्षिक लक्ष्य निर्धारित किए जाते हैं, उन्हें समय सीमा के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य है।
बढ़ा बजट और विकास की चुनौतियाँ
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का बजट आकार काफी बढ़ा है, जो राज्य की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों का परिचायक है। उन्होंने रेखांकित किया कि राज्य में विकास के काफी काम किए जा रहे हैं और लोगों के हित में सरकार सभी जरूरी कदम उठा रही है। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि संसाधनों का सही प्रबंधन ही राज्य के विकास को गति दे सकता है।
बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेतृत्व और प्रशासनिक अधिकारी
इस उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के शीर्ष राजनैतिक और प्रशासनिक नेतृत्व की मौजूदगी रही:
- राजनैतिक नेतृत्व: उप मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री श्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव।
- प्रशासनिक नेतृत्व: मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, विकास आयुक्त श्री मिहिर कुमार सिंह, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आनंद किशोर, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव श्री सी०के० अनिल।
- विभागीय सचिव एवं निदेशक: नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव श्री विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अनुपम कुमार, श्री कुमार रवि, डॉ० चन्द्रशेखर सिंह, परिवहन सचिव श्री राजकुमार, वाणिज्य कर आयुक्त श्री संजय कुमार सिंह, भू-अभिलेख निदेशक श्री सुहर्ष भगत और खान एवं भूतत्व निदेशक श्री मनेश कुमार मीणा सहित अन्य वरीय अधिकारी।
सुशासन के साथ समृद्ध बिहार का संकल्प
मुख्यमंत्री सचिवालय में हुई इस समीक्षा बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार अब ‘वित्तीय सुशासन’ की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही है। राज्य की अच्छी वित्तीय स्थिति को “और बेहतर” बनाने का लक्ष्य यह संकेत देता है कि आने वाले समय में कर प्रबंधन और सरकारी खर्चों में अधिक पारदर्शिता और सख्ती देखने को मिलेगी। मुख्यमंत्री का यह निर्देश कि “सुनियोजित ढंग से काम करें”, अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि बिहार के विकास के लिए संसाधनों का कुशल उपयोग ही सर्वोच्च प्राथमिकता है।


