बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, हाईवे से शहरों तक बनेंगे आधुनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन

बिहार में इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए राज्य सरकार अब बड़े स्तर पर ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में जुट गई है। सरकार का लक्ष्य केवल इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि पूरे राज्य में ऐसा नेटवर्क तैयार करना है जिससे आम लोगों को निर्बाध और सुरक्षित चार्जिंग सुविधा मिल सके। इसी दिशा में शुक्रवार को परिवहन विभाग की ओर से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मोटर वाहन कंपनियों, पेट्रोलियम कंपनियों और विभिन्न ओईएम यानी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

बैठक की अध्यक्षता परिवहन सचिव राज कुमार ने की। इस दौरान राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्यीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों के किनारे ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना पर जोर दिया गया।

सरकार की योजना के अनुसार ढाबों, होटलों, मोटलों, पेट्रोल पंपों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर आधुनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे ताकि लंबी दूरी की यात्रा करने वाले ईवी चालकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। अधिकारियों का मानना है कि जब तक मजबूत चार्जिंग नेटवर्क नहीं बनेगा, तब तक इलेक्ट्रिक वाहनों का व्यापक उपयोग संभव नहीं होगा।

परिवहन सचिव राज कुमार ने कहा कि राज्य सरकार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भविष्य की जरूरत मानकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करने, ईंधन पर निर्भरता घटाने और आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि बिहार में ईवी उपयोग करने वाले लोगों को चार्जिंग के लिए परेशान न होना पड़े। इसके लिए राज्यभर में चरणबद्ध तरीके से चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे।

बैठक में विभिन्न कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों से चार्जिंग स्टेशन की स्थापना, तकनीकी मानकों, बिजली आपूर्ति, सुरक्षा व्यवस्था और संचालन मॉडल को लेकर सुझाव मांगे गए। अधिकारियों ने कहा कि चार्जिंग स्टेशन केवल संख्या में ज्यादा नहीं होने चाहिए, बल्कि तकनीकी रूप से भरोसेमंद और उपयोग में आसान भी होने चाहिए।

इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू राज्य में आने वाली इलेक्ट्रिक बसों को लेकर भी रहा। परिवहन सचिव ने बताया कि केंद्र सरकार जल्द ही बिहार को लगभग 400 इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध कराने जा रही है। इन बसों के संचालन से पहले पूरे राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना सरकार की प्राथमिकता होगी।

सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनेगी। इससे डीजल आधारित बसों पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार बिहार जैसे बड़े राज्य में इलेक्ट्रिक बसों का सफल संचालन तभी संभव है जब पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन और बैकअप बिजली व्यवस्था मौजूद हो। इसी वजह से सरकार पहले से तैयारी में जुट गई है।

बैठक में डिजिटल तकनीक और स्मार्ट मॉनिटरिंग पर भी विशेष जोर दिया गया। वाहन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने बताया कि फिलहाल अलग-अलग कंपनियां अपने उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग मोबाइल एप संचालित करती हैं, जिनके जरिए लोग चार्जिंग स्टेशन की जानकारी प्राप्त करते हैं।

इस पर परिवहन विभाग ने एक बड़ा फैसला लेने का संकेत दिया। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करेगी, जहां सभी कंपनियों के ईवी चार्जिंग स्टेशनों की जानकारी एक ही जगह उपलब्ध होगी।

इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चार्जिंग स्टेशन की लोकेशन, उपलब्धता, चार्जिंग स्लॉट और अन्य जरूरी जानकारियां दी जाएंगी। साथ ही इन स्टेशनों को गूगल मैप्स से भी जोड़ा जाएगा ताकि लोग आसानी से अपने नजदीकी चार्जिंग स्टेशन तक पहुंच सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईवी उपयोगकर्ताओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। क्योंकि फिलहाल अलग-अलग ऐप और अधूरी जानकारी के कारण लोगों को चार्जिंग स्टेशन खोजने में दिक्कत होती है।

परिवहन विभाग ने सभी कंपनियों को निर्देश दिया कि वे राज्य में पहले से स्थापित और भविष्य में लगाए जाने वाले चार्जिंग स्टेशनों की विस्तृत सूची विभाग को उपलब्ध कराएं। इस सूची में गूगल लोकेशन और तकनीकी जानकारी भी शामिल होगी ताकि राज्य स्तर पर चार्जिंग नेटवर्क का सही आकलन किया जा सके।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि चार्जिंग स्टेशन केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहने चाहिए। सरकार की कोशिश है कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों तक भी ईवी चार्जिंग सुविधा पहुंचाई जाए ताकि आने वाले समय में राज्यभर में इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले वर्षों में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ने वाली है। ऐसे में जो राज्य अभी से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेंगे, उन्हें भविष्य में आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों स्तर पर लाभ मिलेगा।

बिहार सरकार की यह पहल निवेश और रोजगार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईवी चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से निजी कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ सकता है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। खासकर बड़े शहरों में डीजल और पेट्रोल वाहनों से निकलने वाला धुआं गंभीर समस्या बनता जा रहा है। ऐसे में ईवी आधारित परिवहन व्यवस्था भविष्य के लिए बेहतर विकल्प मानी जा रही है।

राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी इस योजना को बिहार के परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। सरकार अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि आधुनिक और तकनीक आधारित परिवहन व्यवस्था विकसित करने पर भी फोकस कर रही है।

फिलहाल परिवहन विभाग राज्यभर में संभावित स्थानों की पहचान और कंपनियों के साथ समन्वय की प्रक्रिया को तेज कर रहा है। आने वाले महीनों में बिहार के हाईवे, शहरों और प्रमुख मार्गों पर बड़े पैमाने पर ईवी चार्जिंग स्टेशन दिखाई दे सकते हैं।

अगर यह योजना तय समय पर पूरी होती है तो बिहार इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में शामिल हो सकता है। साथ ही आम लोगों को भी आधुनिक, सस्ती और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

  • ये भी पढ़े..

    20 साल बाद खाली हुआ 10 सर्कुलर रोड: राबड़ी देवी ने छोड़ा सरकारी बंगला, अब कौटिल्य नगर स्थित निजी आवास में रहेंगी

    Share Add as a preferred…

    अश्लील वीडियो कांड में बड़ा अपडेट: पुलिस दबिश के बाद रेहान खलीफा ने पटना में किया सरेंडर, स्पीडी ट्रायल की तैयारी

    Share Add as a preferred…