बिहार: ठेकेदार रिशु श्री पर ED का बड़ा एक्शन, 5 राज्यों में 9 ठिकानों पर छापेमारी; 33 लाख कैश, डिजिटल सबूत और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद
पटना। बिहार में भ्रष्टाचार और अवैध कमाई के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तेज हो गई है। इसी कड़ी में बुधवार को ईडी ने बिहार के बड़े ठेकेदार रिशु श्री के खिलाफ एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया।
एजेंसी ने पटना, अहमदाबाद, सूरत, गुरुग्राम और नई दिल्ली में कुल 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान ईडी को भारी मात्रा में दस्तावेज, डिजिटल सबूत और 33 लाख रुपये नकद मिले हैं, जिनसे एक बड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश होने की संभावना है।
SVU की FIR पर शुरू हुई ED की जांच, PMLA के तहत कार्रवाई
यह कार्रवाई स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU), बिहार द्वारा दर्ज एक एफआईआर के आधार पर हुई।
FIR के मुताबिक—
- रिशु श्री और उनकी कई कंपनियों ने
- जल संसाधन, स्वास्थ्य, भवन निर्माण, ग्रामीण कार्य, PHED, शहरी विकास, BUIDCO और शिक्षा विभाग
से जुड़े ठेकों में करोड़ों की हेराफेरी की।
ED का आरोप है कि रिशु श्री ने इन विभागों के कई अधिकारियों के साथ सांठगांठ कर बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की और घूसखोरी के जरिए सब-कांट्रैक्ट हासिल किए।
छापेमारी में क्या मिला? 33 लाख कैश और कई चौंकाने वाले दस्तावेज
ईडी के अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी में—
- ₹33 लाख नकद
- मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव जैसी डिजिटल सामग्री
- डायरी और दर्जनों महत्वपूर्ण दस्तावेज
बरामद किए गए हैं।
डायरी में कथित तौर पर—
- अधिकारियों को दी गई कमीशन राशि,
- फर्जी बिल
- और संदिग्ध भुगतान
का पूरा ब्योरा मिला है।
एजेंसी का कहना है कि दस्तावेजों की जांच के बाद कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
पहले भी हो चुकी है करोड़ों की बरामदगी
यह पहली बार नहीं है जब रिशु श्री ईडी के रडार पर आए हैं।
इससे पहले भी—
- पटना स्थित ट्रैवल एजेंटों और सरकारी अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी में 11.64 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए थे।
- 1 अगस्त 2025 को ईडी ने रिशु श्री, उनके परिजनों और फर्मों की ₹68.09 करोड़ की संपत्ति अटैच कर दी थी।
यह बिहार में किसी भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जाती है।
IAS संजीव हंस से जुड़े मामलों में आया रिशु श्री का नाम
रिशु श्री पहली बार सुर्खियों में तब आए जब ईडी ने IAS संजीव हंस के खिलाफ जांच शुरू की।
आरोप था कि संजीव हंस ने ठेकेदारों से करोड़ों रुपये की अवैध कमाई कराई और इसके बदले में उन्हें सरकारी ठेके दिलवाए।
इसी दौरान रिशु श्री की फर्मों के कई बड़े वित्तीय लेन-देन सामने आए थे—
- भारी कैश डिपॉजिट
- संदिग्ध ऑनलाइन ट्रांजेक्शन
- शेल कंपनियों के जरिए मनी रोटेशन
- करोड़ों की बेनामी संपत्ति
इसके बाद ईडी ने रिशु श्री और उनकी कंपनियों की जांच तेज कर दी।
कैसे चलता था घोटाला? फर्जी बिल, ओवर-बिलिंग और किकबैक का जाल
ED के अनुसार रिशु श्री का नेटवर्क बिहार के कई सरकारी विभागों में फैला था।
जांच में सामने आए आरोप—
- फर्जी कंपनियों के जरिए ठेकों की राशि निकालना
- ओवर-बिलिंग और फर्जी इनवॉइस बनाना
- अधूरा काम दिखाकर पूरा भुगतान लेना
- अधिकारियों को बड़े पैमाने पर किकबैक देना
- कैश को अलग-अलग खातों में घुमा-फिरा कर मनी लॉन्ड्रिंग करना
एजेंसी ने बताया कि बरामद दस्तावेजों में कई ऐसे लेन-देन का ज़िक्र है जो सतही तौर पर वैध दिखते हैं, लेकिन असल में भ्रष्टाचार से जुड़ी रकम हैं।
ईडी का बयान: “बड़ा नेटवर्क मिला, आगे कई खुलासे होंगे”
ईडी की ओर से जारी बयान में कहा गया—
“प्राप्त डिजिटल डेटा और दस्तावेज भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। सभी वित्तीय लेन-देन और संपत्ति विवरणों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच अभी जारी है।”
एजेंसी डिजिटल डिवाइस की फॉरेंसिक जांच करा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में—
- कई सरकारी अधिकारी
- व्यवसायी
- और संबंधित फर्में
जांच के दायरे में आएंगी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि—
- इसमें कई सरकारी विभागों का नाम शामिल है
- बड़ी रकम की हेराफेरी की गई
- कई IAS और अफसरों की भूमिका पर सवाल
- और भ्रष्टाचार का नेटवर्क बिहार से बाहर अन्य राज्यों तक फैला हुआ है
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।


