​बिहार के जलाशयों के पास पीपीपी मॉडल पर विकसित होगा इको टूरिज्म: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिए आकर्षक पर्यटन पैकेज तैयार करने के निर्देश

पटना, 17 मई 2026। बिहार में प्राकृतिक संपदा और जल निकायों को पर्यटन के नए विन्यास के रूप में स्थापित करने की प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को लोक सेवक आवास, 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ सभागार में राज्य के भीतर इको टूरिज्म (पारिस्थितिकी पर्यटन) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का मुख्य ध्येय राज्य के विभिन्न जिलों में फैले प्राकृतिक और कृत्रिम जलाशयों को वैश्विक पर्यटन मानकों के अनुरूप ढालना है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक सरकारी प्रणालियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश को आकर्षित करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल को मुख्य आधार बनाया जाए। इस व्यापक रणनीतिक बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा जल संसाधन विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने अपनी-अपनी दीर्घकालिक कार्य योजनाओं और तकनीकी प्रस्तावों को साझा किया, जिन पर मुख्यमंत्री ने कई विधिक और व्यावहारिक निर्देश जारी किए हैं।

पीपीपी मॉडल से सुदृढ़ होगा बुनियादी ढांचा, स्थानीय स्तर पर सृजित होंगे रोजगार

​पीपीपी मॉडल के तहत जलाशयों के विकास की रूपरेखा तय करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार के नियंत्रण वाले जो भी बड़े जलाशय और जल संचयन क्षेत्र हैं, उनके आसपास के लैंडस्केप को इस तरह विकसित किया जाए जहां पर्यटकों को विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। निजी निवेशकों को इस क्षेत्र में आमंत्रित करने से न केवल उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे का निर्माण होगा, बल्कि उनका व्यावसायिक प्रबंधन भी अधिक उत्तरदायी बनेगा। मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए कि इन पर्यटन स्थलों के विकास की प्रक्रिया पूरी तरह से लोकतांत्रिक होनी चाहिए, जिसके लिए स्थानीय नागरिकों, पर्यावरणविदों और पर्यटन क्षेत्र के हितधारकों से व्यापक विमर्श किया जाए और उनके व्यावहारिक सुझावों को मुख्य कार्य योजना में शामिल किया जाए।

​पर्यटकों को इन प्राकृतिक स्थलों की ओर आकर्षित करने और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए पर्यटन विभाग को जल्द से जल्द आकर्षक और सुलभ ‘पर्यटन पैकेज’ (टूरिज्म पैकेजेस) तैयार करने का हुक्म दिया गया है। इन पैकेजों के माध्यम से देश-विदेश के सैलानी सुगमता से बिहार के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद उठा सकेंगे। इस पूरी कमान का एक मुख्य आयाम स्थानीय आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ा है। जब इन जलाशयों के पास पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, तो वहां स्थानीय स्तर पर गाइड, हस्तशिल्प बाजार, होमस्टे, खान-पान के आउटलेट्स और नौकायन जैसी विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियां पनपेंगी, जिससे सीधे तौर पर हजारों ग्रामीण युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक मजबूत संबल प्रदान करना है।

तालाबों और वेटलैंड्स के चारों तरफ होगा सघन पौधारोपण, जल संरक्षण विधा को मिलेगा बल

​इस उच्चस्तरीय विमर्श के दौरान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर और जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चंद्रशेखर सिंह ने अपने-अपने विभागों की विस्तृत डिजिटल प्रस्तुति और भविष्य की रणनीतियों का ब्योरा मुख्यमंत्री के समक्ष रखा। जल संसाधन विभाग के पास मौजूद बड़े बांधों, नहरों के मुहानों और जलाशयों के विशाल भूखंडों को पर्यटन विंग के साथ संयुक्त रूप से प्रबंधित करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को एक विशिष्ट और व्यापक विधिक जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा कि राज्य के जितने भी तालाब, पोखर और बड़े जलाशय हैं, उनके चारों तरफ सघन और वैज्ञानिक प्रणालियों के तहत पौधारोपण (प्लांटेशन ड्राइव) कराया जाए।

​इस हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) के निर्माण से न केवल जलाशयों की मिट्टी का कटाव रुकेगा, बल्कि वहां का स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र भी मजबूत होगा। इसके साथ ही, राज्य के सभी चिन्हित आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्षेत्रों को व्यवस्थित और सिस्टमैटिक करने का कड़ा निर्देश जारी किया गया है। वेटलैंड्स के आसपास बड़े पैमाने पर छायादार और फलदार वृक्षों का रोपण करने से राज्य का कुल हरित आवरण (ग्रीन कवर) क्षेत्र विधिक रूप से काफी बढ़ जाएगा। यह पहल दोहरे लाभ वाली साबित होगी; एक तरफ जहां पर्यावरण का संतुलन सुधरेगा और जैव विविधता की रक्षा होगी, वहीं दूसरी तरफ भूजल स्तर को रीचार्ज करने और दीर्घकालिक जल संरक्षण (वाटर कंजर्वेशन) की प्रणालियों को भी धरातल पर एक मजबूत संबल प्राप्त होगा।

आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और इको टूरिज्म को एकीकृत कर बनेगा नया सर्किट

​राज्य के समग्र विकास में पर्यटन की भूमिका को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का अंतिम उद्देश्य बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक अग्रणी और अनिवार्य गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए पर्यटन के विकास की अन्य सभी संभावित कड़ियों और अनुच्छेदों पर समानांतर रूप से और तीव्र गति से काम करने की आवश्यकता है। बिहार की भौगोलिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि ऐसी है कि यहाँ आध्यात्मिक (स्पिरिचुअल), सांस्कृतिक (कल्चरल) और इको टूरिज्म (पारिस्थितिकी पर्यटन) की अपार और अछूती संभावनाएं विद्यमान हैं।

​बोधगया, राजगीर, वैशाली, भागलपुर और वाल्मीकि नगर जैसे ऐतिहासिक प्रक्षेत्रों को जब इन प्राकृतिक जलाशयों और वेटलैंड सफारी से जोड़ा जाएगा, तो एक संपूर्ण और एकीकृत टूरिज्म सर्किट का निर्माण होगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इन तीनों विधाओं को आपस में जोड़ते हुए एक समन्वित नीति तैयार करें ताकि बिहार आने वाले पर्यटकों को विविधतापूर्ण अनुभव मिल सके और वे राज्य में अधिक समय व्यतीत कर सकें।

समीक्षा बैठक में कई विभागों के वरिष्ठ नीति-नियंताओं की रही विधिक उपस्थिति

​’संकल्प’ सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक समीक्षा बैठक में सरकार के कई शीर्ष नीति-नियंता और योजनाकार विधिक रूप से उपस्थित रहे। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार ने योजनाओं के प्रशासनिक समन्वय, अंतर्विभागीय बाधाओं को दूर करने और समयबद्ध निष्पादन के संदर्भ में महत्वपूर्ण तकनीकी इनपुट्स साझा किए। वहीं, पर्यटन विभाग के सचिव सह मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने पर्यटन पैकेजों की रूपरेखा, मार्केटिंग रणनीतियों और निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तैयार किए जाने वाले विलेखों की प्रगति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

​इसके साथ ही, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) गोपाल सिंह सहित जल संसाधन विभाग और वन विभाग के कई अन्य वरीय तकनीकी अधिकारी और मुख्य अभियंता भी इस विमर्श का हिस्सा बने। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को एक साझा टाइमलाइन निर्धारित करते हुए निर्देश दिया कि इन सभी प्रस्तावों को कागजी फाइलों से निकालकर धरातल पर क्रियान्वित करने की विधा तुरंत शुरू की जाए, जिसकी प्रगति की वे स्वयं निरंतर समीक्षा करेंगे।

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