
पटना। बिहार के लाखों परिवारों को जून महीने की शुरुआत में महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि होने के बाद आम उपभोक्ताओं की रसोई का खर्च बढ़ गया है। नई दरों के अनुसार 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही राजधानी पटना समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में अब उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर के लिए पहले से अधिक राशि चुकानी होगी।
बढ़ती महंगाई, खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों और घरेलू खर्चों के बीच एलपीजी सिलेंडर की कीमत में हुई वृद्धि ने मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों की चिंता और बढ़ा दी है। घरेलू बजट पहले से ही दबाव में है और अब रसोई गैस महंगी होने से मासिक खर्च में अतिरिक्त बोझ जुड़ गया है।
7 जून से लागू हुई नई कीमतें
तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) द्वारा जारी नई दरों के अनुसार घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में संशोधन किया गया है। नई कीमतें 7 जून 2026 से प्रभावी हो चुकी हैं और उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दरों पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।
इस बदलाव के बाद अब घरेलू गैस उपभोक्ताओं को प्रत्येक सिलेंडर पर 29 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। हालांकि यह वृद्धि देखने में मामूली लग सकती है, लेकिन सालभर के हिसाब से यह घरेलू बजट पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
पटना में 1,040 रुपये पहुंची सिलेंडर की कीमत
राजधानी पटना में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की नई कीमत 1,040 रुपये निर्धारित की गई है। इससे पहले उपभोक्ताओं को यही सिलेंडर 1,011 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा था। नई दर लागू होने के बाद अब हर सिलेंडर पर 29 रुपये अधिक भुगतान करना होगा।
ज्योति कलश इंडेन वितरक क्षेत्र सहित विभिन्न गैस एजेंसियों पर नई कीमतें लागू कर दी गई हैं। रविवार सुबह से ही उपभोक्ताओं को संशोधित दरों के अनुसार सिलेंडर की आपूर्ति की जा रही है।
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि उन्हें नई दरों की सूचना मिल चुकी है और सभी बुकिंग अब नई कीमतों के आधार पर पूरी की जा रही हैं।
छोटे सिलेंडर के उपभोक्ताओं पर भी असर
केवल बड़े घरेलू सिलेंडर ही नहीं बल्कि छोटे सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को भी नई दरों का असर झेलना पड़ेगा। पांच किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 386 रुपये निर्धारित की गई है।
हालांकि छोटे सिलेंडर का उपयोग अपेक्षाकृत कम होता है, लेकिन किराए के मकानों में रहने वाले लोग, छात्र, छोटे परिवार और सीमित गैस खपत वाले उपभोक्ता इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उनके मासिक खर्च में भी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
रसोई का मासिक बजट होगा प्रभावित
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी का सीधा असर परिवारों के मासिक बजट पर पड़ता है। जिन परिवारों में हर महीने एक या उससे अधिक सिलेंडर की खपत होती है, उन्हें अब सालाना सैकड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू गैस की कीमतों में लगातार होने वाली वृद्धि का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं रहता। इससे परिवारों की बचत, अन्य घरेलू खर्चों और मासिक वित्तीय योजना पर भी प्रभाव पड़ता है।
महंगाई के दौर में जब पहले से ही सब्जियों, खाद्य तेल, दूध, दाल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हुई हैं, तब गैस सिलेंडर महंगा होना आम लोगों के लिए एक अतिरिक्त चुनौती बनकर सामने आया है।
मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की बढ़ी चिंता
सबसे अधिक प्रभाव उन परिवारों पर पड़ता है जिनकी आय सीमित है। मध्यम वर्गीय परिवार पहले से ही शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, परिवहन और अन्य आवश्यक खर्चों का दबाव झेल रहे हैं। ऐसे में एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने से घरेलू बजट का संतुलन बिगड़ सकता है।
कई उपभोक्ताओं का कहना है कि हर कुछ महीनों में रसोई गैस की कीमतों में बदलाव होने से घरेलू खर्च का अनुमान लगाना कठिन हो जाता है। विशेष रूप से वे परिवार जो सीमित आय पर निर्भर हैं, उन्हें अतिरिक्त खर्च की व्यवस्था करना मुश्किल पड़ता है।
गैस सब्सिडी को लेकर भी उठ रहे सवाल
एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने के बाद एक बार फिर सब्सिडी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कई उपभोक्ताओं का मानना है कि यदि सब्सिडी की राशि बढ़ाई जाए तो आम लोगों को राहत मिल सकती है।
हालांकि वर्तमान में विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं को अलग-अलग मानकों के अनुसार लाभ मिलता है। लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों के बीच लोगों की अपेक्षा है कि सरकार और तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कुछ कदम उठाएं।
बढ़ती महंगाई के बीच नई चुनौती
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ता है। रसोई गैस हर घर की बुनियादी जरूरत है और इसकी कीमत बढ़ने पर लोगों को सीधे महंगाई का एहसास होता है।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एलपीजी अब दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी पहलों के बाद गैस कनेक्शन का दायरा बढ़ा है, इसलिए कीमतों में बदलाव का असर बड़ी आबादी पर दिखाई देता है।
आगे भी कीमतों पर रहेगी नजर
तेल कंपनियों द्वारा समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की कीमतों, परिवहन लागत और अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखते हुए दरों की समीक्षा की जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं की नजर अब आने वाले महीनों में गैस कीमतों की दिशा पर बनी रहेगी।
फिलहाल 7 जून 2026 से लागू नई दरों के बाद बिहार के उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी। बढ़ती महंगाई के बीच यह फैसला लाखों परिवारों के मासिक बजट पर असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में आम लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद यही रहेगी कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता आए और घरेलू खर्च पर बढ़ते दबाव को कुछ राहत मिल सके।


