
राज्य में डेयरी, मत्स्य और पशुपालन क्षेत्र को नई रफ्तार देने के लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं। शनिवार को पटना स्थित 1 अणे मार्ग में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में दूध और मछली उत्पादन को तेजी से बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर काम किया जाए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कॉम्फेड के माध्यम से पशुपालकों को उन्नत नस्ल की गाय, भैंस और बकरी उपलब्ध कराने, महिला पशुपालकों को प्राथमिकता देने और बिहार की मछलियों को नेपाल समेत सीमावर्ती राज्यों के बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में ठोस कार्रवाई करने को कहा।
सरकार ने डेयरी क्षेत्र में बड़ा लक्ष्य तय करते हुए सुधा के माध्यम से राज्य में दूध उत्पादन को मौजूदा 40 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 1 करोड़ 25 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा है। वहीं मत्स्य उत्पादन को 9 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 25 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। माना जा रहा है कि इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से बिहार के लाखों किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों की आमदनी में बड़ा बदलाव आ सकता है।
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पशुपालन और मत्स्य पालन ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि इन क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो गांवों में आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिल सकती है।
बैठक में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और भविष्य की कार्य योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि राज्य में दूध उत्पादन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनाओं पर काम चल रहा है। आधुनिक तकनीक, बेहतर नस्ल, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कॉम्फेड के माध्यम से पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु उपलब्ध कराए जाएं ताकि दूध उत्पादन में वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि गांवों में कई ऐसे पशुपालक हैं जो संसाधनों की कमी के कारण अच्छी नस्ल के पशु नहीं खरीद पाते। सरकार यदि उन्हें सहायता उपलब्ध कराएगी तो उनकी आय में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना में महिला पशुपालकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में डेयरी सेक्टर में बड़ी संभावनाएं हैं। राज्य के कई जिलों में बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक रूप से पशुपालन से जुड़े हुए हैं। यदि उन्हें आधुनिक तकनीक, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर बाजार उपलब्ध हो जाएं तो उत्पादन में तेजी से वृद्धि हो सकती है। सुधा पहले से ही बिहार में डेयरी नेटवर्क का बड़ा माध्यम है और सरकार अब इसके जरिए उत्पादन क्षमता को कई गुना बढ़ाने की तैयारी में है।
बैठक के दौरान मत्स्य क्षेत्र पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिहार के मत्स्य पालकों को बड़े बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने खास तौर पर नेपाल और सीमावर्ती राज्यों का जिक्र करते हुए कहा कि वहां बिहार की मछलियों की अच्छी मांग है और इसका लाभ स्थानीय मत्स्य पालकों को मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों को अपनाने की जरूरत है। तालाबों का बेहतर उपयोग, वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन और मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण देने पर जोर दिया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ बाजार व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है ताकि मत्स्य पालकों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
बिहार में पिछले कुछ वर्षों में मत्स्य पालन के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है। कई जिलों में किसान खेती के साथ-साथ मछली पालन को भी अतिरिक्त आय के स्रोत के रूप में अपना रहे हैं। सरकार अब इसे बड़े स्तर पर रोजगार और आर्थिक विकास के मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।
मुख्यमंत्री ने समीक्षा बैठक में यह भी कहा कि सरकार किसानों और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है। डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में निवेश बढ़ने से गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इससे पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह समेत डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और सहकारिता विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति और आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।
राज्य सरकार की इन नई योजनाओं को बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में बड़े उत्पादन लक्ष्य तय कर सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों को आर्थिक विकास के प्रमुख माध्यम के रूप में विकसित किया जाएगा। यदि योजनाएं प्रभावी तरीके से लागू होती हैं तो इससे लाखों किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में कृषि के साथ-साथ पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। राज्य की बड़ी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और आज भी लाखों परिवार कृषि आधारित आय पर निर्भर हैं। ऐसे में डेयरी और मत्स्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है।


