मुजफ्फरपुर में PK का सरकार पर हमला: ‘पेट्रोल बचाओ’ अभियान को बताया दिखावा, बांकीपुर उपचुनाव में मजबूती से उतरने का दावा

जन सुराज अभियान के सूत्रधार ने मुजफ्फरपुर में बिहार सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बिना किसी मंत्री का नाम लिए राज्य सरकार के ‘पेट्रोल बचाओ’ अभियान पर सवाल उठाए और इसे महज दिखावा करार दिया। साथ ही बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर भी बड़ा बयान देते हुए कहा कि जन सुराज पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगा और उम्मीदवार के नाम को लेकर पार्टी के भीतर गंभीर चर्चा जारी है। इसके अलावा उन्होंने ‘काक्रोच जनता पार्टी’ यानी CJP को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि किसी संगठन से कितने लोग जुड़े हैं, यह सबसे महत्वपूर्ण बात नहीं है, बल्कि समाज में बढ़ती गरीबी और बदहाली कहीं अधिक चिंता का विषय है।

मुजफ्फरपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार सरकार के हालिया अभियानों और प्रशासनिक दावों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार जनता को संदेश देने के लिए कई अभियान चलाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उन अभियानों का असर दिखाई नहीं देता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक मंत्री ट्रेन से यात्रा कर गए, लेकिन उन्हें रिसीव करने के लिए दस से ज्यादा गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया। ऐसे में यह समझना मुश्किल नहीं है कि वास्तव में पेट्रोल बचाने की कोशिश हो रही है या सिर्फ प्रचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार सचमुच ईंधन बचाने को लेकर गंभीर होती तो प्रशासनिक स्तर पर भी सादगी दिखाई देती। जनता अब केवल नारों और विज्ञापनों से प्रभावित नहीं होने वाली है। लोग यह देख रहे हैं कि नेता और अधिकारी खुद कितनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब एक तरफ आम लोगों को पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है, तब दूसरी तरफ सरकारी कार्यक्रमों में संसाधनों की खुलेआम बर्बादी हो रही है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार में जनता अब राजनीतिक संदेशों और वास्तविक काम के बीच फर्क समझने लगी है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में कई सरकारी योजनाएं और अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि सफाई अभियान की तरह ‘पेट्रोल बचाओ’ अभियान भी अगर सिर्फ फोटो और प्रचार तक सीमित रहेगा तो उसका कोई वास्तविक लाभ समाज को नहीं मिलेगा।

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि जन सुराज इस चुनाव को पूरी गंभीरता से लड़ने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी लगातार जमीनी स्तर पर लोगों से संवाद कर रही है और उम्मीदवार चयन को लेकर भी कई दौर की बातचीत चल रही है। जल्द ही उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जन सुराज किसी भी चुनाव को सिर्फ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखता, बल्कि यह जनता के मुद्दों को सामने लाने का माध्यम भी है। पार्टी ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारना चाहती है जो स्थानीय समस्याओं को समझता हो और जनता के बीच सक्रिय रहा हो। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति अब बदलाव के दौर में है और लोग पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प तलाश रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन का मंच बन सकता है। ऐसे में जन सुराज की सक्रियता को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशांत किशोर लगातार विभिन्न जिलों में जाकर जनता से संवाद कर रहे हैं और खुद को पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग बताने की कोशिश कर रहे हैं।

‘काक्रोच जनता पार्टी’ यानी CJP को लेकर पूछे गए सवाल पर भी प्रशांत किशोर ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी संगठन से कितने लोग जुड़े हैं या कौन किस मंच पर खड़ा है, यह राजनीति का सबसे अहम मुद्दा नहीं होना चाहिए। असली चिंता यह है कि समाज में लगातार गरीबी, बेरोजगारी और बदहाली बढ़ रही है। अगर सत्ता में बैठे लोग इन समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेंगे तो आने वाले समय में यह बड़ा सामाजिक संकट बन सकता है।

उन्होंने कहा कि बिहार के गांवों और कस्बों में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दे अब भी जस के तस बने हुए हैं। राजनीतिक दलों को इन मुद्दों पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से अधिकतर बहसें केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाती हैं।

प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति में जनता अब जवाब मांग रही है। लोग यह जानना चाहते हैं कि वर्षों से सत्ता में रहने वाले दलों ने राज्य को क्या दिया। उन्होंने दावा किया कि जन सुराज का उद्देश्य सिर्फ चुनाव जीतना नहीं बल्कि राजनीति की कार्यशैली को बदलना है। इसके लिए गांव स्तर तक संगठन को मजबूत किया जा रहा है और आम लोगों को राजनीतिक प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने युवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार का सबसे बड़ा संकट रोजगार का है। लाखों युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरी के लिए दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर हैं। अगर सरकारें समय रहते इस पर ध्यान नहीं देंगी तो सामाजिक असंतोष और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य की राजनीति को अब जातीय समीकरणों से आगे बढ़कर विकास और रोजगार जैसे मुद्दों पर केंद्रित होना होगा।

मुजफ्फरपुर में दिए गए प्रशांत किशोर के इन बयानों को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है। एक तरफ उन्होंने सरकार के अभियानों की कार्यशैली पर सवाल उठाए, वहीं दूसरी तरफ उपचुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक तैयारी का संकेत भी दिया। इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को केंद्र में रखकर यह संदेश देने की कोशिश की कि आने वाले समय में जन सुराज जनता के बुनियादी मुद्दों को लेकर राजनीतिक लड़ाई को और तेज करेगा।

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