बिहार में 3 सीओ सस्पेंड, सरकार सख्त

पटना: बिहार में प्रशासनिक सख्ती का एक और बड़ा उदाहरण सामने आया है, जहां राज्य सरकार ने लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में तीन अंचल अधिकारियों (सीओ) को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से की गई है और इसे सरकार के सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है।

निलंबित अधिकारियों में बक्सर सदर के अंचल अधिकारी राहुल कुमार, भागलपुर जिले के शाहकुंड अंचल की सीओ हर्षा कोमल और सीतामढ़ी जिले के डुमरा अंचल की सीओ डौली कुमारी शामिल हैं। विभाग ने शनिवार को इन सभी के खिलाफ आधिकारिक आदेश जारी कर दिया, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों पर सबसे गंभीर आरोप मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान कार्यों में बाधा उत्पन्न करने का है। बताया जा रहा है कि इन अधिकारियों की गैरमौजूदगी और लापरवाही के कारण कई जगहों पर कार्यक्रमों के संचालन में परेशानी हुई। इसे न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना माना गया, बल्कि इसे जनहित से जुड़े कार्यों में बाधा डालने के रूप में भी देखा गया।

इसके अलावा, डिप्टी सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘भूमि सुधार जन कल्याण संवाद’ कार्यक्रम से भी इन अधिकारियों की अनुपस्थिति को गंभीरता से लिया गया। यह कार्यक्रम राज्य में भूमि सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की गैरहाजिरी को विभाग ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना रवैया माना है।

जांच में यह भी सामने आया कि इन अधिकारियों का कार्य रिकॉर्ड संतोषजनक नहीं था। मार्च 2026 के दौरान महालेखाकार को उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) समय पर उपलब्ध नहीं कराया गया, जो वित्तीय अनुशासन के लिहाज से एक गंभीर चूक मानी जाती है। साथ ही, राजस्व संग्रहण के तय लक्ष्यों को पूरा करने में भी ये अधिकारी विफल रहे।

इतना ही नहीं, हाईकोर्ट द्वारा अतिक्रमण हटाने के दिए गए निर्देशों की अनदेखी भी इन अधिकारियों पर भारी पड़ी। विभाग का मानना है कि न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करना प्रशासनिक जिम्मेदारी से सीधे तौर पर जुड़ा मामला है और इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बिहार में इन दिनों अंचल और राजस्व अधिकारियों की हड़ताल भी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। पिछले करीब एक महीने से कई अधिकारी अपनी मांगों को लेकर काम से दूर हैं। सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि हड़ताल के बावजूद आवश्यक सेवाओं को बाधित नहीं होने दिया जाएगा।

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हड़ताली अधिकारियों को काम पर लौटने के लिए अंतिम समयसीमा दी थी, लेकिन इसके बावजूद कई अधिकारी अपने रुख पर कायम रहे। इसके बाद सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए पहले भी कुछ अधिकारियों को निलंबित किया था और अब यह कार्रवाई उसी क्रम का हिस्सा मानी जा रही है।

सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि यदि अधिकारी जल्द काम पर नहीं लौटते हैं, तो उनके खिलाफ और कठोर कदम उठाए जाएंगे। ‘सर्विस ब्रेक’ जैसी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है, जिससे उनके भविष्य के प्रमोशन और सेवा लाभ प्रभावित हो सकते हैं।

इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि राज्य सरकार अब प्रशासनिक ढिलाई और अनुशासनहीनता को बिल्कुल बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। खासकर उन मामलों में जहां सीधे तौर पर जनहित के कार्य प्रभावित हो रहे हैं, सरकार का रुख और भी सख्त नजर आ रहा है।

दूसरी ओर, कुछ अधिकारी कार्रवाई के डर से काम पर लौटने लगे हैं, जबकि हड़ताली संघ अभी भी अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और अधिकारियों के बीच यह टकराव किस दिशा में जाता है।

फिलहाल, तीन अंचल अधिकारियों के निलंबन ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को एक स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जिम्मेदारियों में लापरवाही और आदेशों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है।

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