
देवघर/दुमका/पटना। बिहार की सत्ता की कमान संभालने के बाद प्रशासनिक कार्यों की व्यस्तता और राजनैतिक गहमागहमी के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी रविवार, 19 अप्रैल 2026 को एक अलग ही आध्यात्मिक रंग में नजर आए। लोक कल्याण और प्रदेश की उन्नति का संकल्प लेकर वे पड़ोसी राज्य झारखंड स्थित करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) और बाबा बासुकीनाथ धाम (दुमका) पहुँचे। सादगी और अटूट श्रद्धा के साथ मुख्यमंत्री ने दोनों ज्योतिर्लिंगों के समक्ष माथा टेका और विधिवत पूजा-अर्चना की। यह दौरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं था, बल्कि इसे बिहार के सांस्कृतिक गौरव और ‘अध्यात्म से सुशासन’ के समन्वय के रूप में देखा जा रहा है। सम्राट चौधरी ने महादेव के चरणों में पुष्प अर्पित करते हुए बिहार राज्य की सुख, शांति और समृद्धि की मंगल कामना की। इस दौरान देवघर एयरपोर्ट से लेकर मंदिर परिसरों तक उनके स्वागत में उमड़ा जनसैलाब और कार्यकर्ताओं का उत्साह यह बताने के लिए काफी था कि सम्राट चौधरी की यह तीर्थयात्रा जनता के मन में कितनी गहरी पैठ रखती है।
देवघर एयरपोर्ट पर शाही स्वागत: रक्षक और सेवक का अभिनंदन
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का रविवार दोपहर जब देवघर एयरपोर्ट पर आगमन हुआ, तो वहां का नजारा किसी बड़े उत्सव जैसा था। विमान से उतरते ही झारखंड प्रशासन की ओर से उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ (Guard of Honor) दिया गया, जो उनके पद की गरिमा और राजनैतिक कद का सम्मान था। एयरपोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में बिहार और झारखंड के जनप्रतिनिधि, गणमान्य व्यक्ति और पार्टी कार्यकर्ता पहले से ही पलक-पावड़े बिछाए खड़े थे। जैसे ही सम्राट चौधरी बाहर निकले, पूरा परिसर नारों से गूँज उठा।
जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूलों के सुंदर गुच्छे और पारंपरिक अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। सम्राट चौधरी ने भी अपनी सहज कार्यशैली का परिचय देते हुए सुरक्षा घेरे के बावजूद कार्यकर्ताओं के पास जाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। उनके साथ मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार और गृह विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। एयरपोर्ट पर हुई इस संक्षिप्त लेकिन ऊर्जावान मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री का काफिला सीधे ‘कामना लिंग’ बाबा बैद्यनाथ की नगरी की ओर रवाना हुआ।
बैद्यनाथ धाम में ‘महादेव’ की शरण: बिहार की खुशहाली का संकल्प
देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुँचने पर तीर्थ पुरोहितों और मंदिर समिति के सदस्यों ने सम्राट चौधरी का भव्य स्वागत किया। मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करने से पहले मुख्यमंत्री ने पूरी धार्मिक पवित्रता के साथ संकल्प लिया। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ के दरबार में उन्होंने ‘षोडशोपचार’ विधि से पूजा-अर्चना की। दूध, जल, चंदन और बेलपत्र अर्पित करते समय उनके चेहरे पर एक गंभीर और अटूट श्रद्धा के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे।
पूजा के पश्चात मुख्यमंत्री ने बिहार की साढ़े तेरह करोड़ जनता के कल्याण की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि बाबा की कृपा से बिहार विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करे और प्रदेश में सर्वत्र शांति और सद्भाव का वातावरण बना रहे। मंदिर समिति की ओर से मुख्यमंत्री को विशेष स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र प्रदान कर उनका अभिनंदन किया गया। सम्राट चौधरी ने मंदिर की ऐतिहासिकता और वहां की व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि बिहार के सुल्तानगंज से जल लेकर लाखों शिवभक्त जिस कठिन कांवड़ यात्रा को पूरा कर देवघर पहुँचते हैं, उस रास्ते और परंपरा से सम्राट चौधरी का पुराना लगाव रहा है, जो आज उनकी पूजा में साफ झलका।
बासुकीनाथ धाम की यात्रा: ‘फौजदार’ बाबा के दरबार में हाजिरी
देवघर में पूजा संपन्न करने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला दुमका जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल बाबा बासुकीनाथ धाम पहुँचा। हिंदू धर्मग्रंथों और परंपराओं के अनुसार, देवघर की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक कि बासुकीनाथ में ‘फौजदार’ बाबा के दर्शन न किए जाएं। सम्राट चौधरी ने इस परंपरा का पूरी निष्ठा से पालन किया। बासुकीनाथ मंदिर में भी उन्होंने विधिवत अर्चन-वंदन किया।
बासुकीनाथ धाम में मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच भी काफी उत्साह पैदा किया। मुख्यमंत्री ने वहां के स्थानीय पंडों और पुजारियों से बातचीत की और मंदिर परिसर की स्वच्छता और सुरक्षा के प्रति संतोष व्यक्त किया। बासुकीनाथ में पूजा के दौरान उन्होंने बिहार के किसानों, युवाओं और महिलाओं की उन्नति के लिए विशेष प्रार्थना की। सम्राट चौधरी का मानना है कि ईश्वरीय आशीर्वाद और मानवीय पुरुषार्थ के संगम से ही बिहार ‘विकसित प्रदेश’ की श्रेणी में अग्रणी भूमिका निभाएगा। दुमका प्रशासन और मंदिर प्रशासन ने भी मुख्यमंत्री के स्वागत में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।
अध्यात्म और सुशासन: सम्राट चौधरी का विजन
19 अप्रैल 2026 की यह आध्यात्मिक यात्रा सम्राट चौधरी के उस विजन को दर्शाती है जहाँ वे आधुनिक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक जड़ों को भी सींचना चाहते हैं। बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में चल रही सरकार अक्सर ‘न्याय के साथ विकास’ की बात करती है, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने आचरण से यह भी सिद्ध किया है कि संस्कारों और धर्म के प्रति आस्था एक कुशल प्रशासक के लिए शक्ति का स्रोत होती है।
इस यात्रा के दौरान उनके साथ मौजूद प्रधान सचिव दीपक कुमार और ओएसडी संजय कुमार सिंह की उपस्थिति यह संकेत देती है कि यह दौरा भले ही निजी और आध्यात्मिक था, लेकिन इसके प्रशासनिक निहितार्थ भी बड़े हैं। बिहार और झारखंड के बीच रोटी-बेटी और धर्म का जो अटूट संबंध है, सम्राट चौधरी की इस यात्रा ने उस रिश्ते को और अधिक मजबूती प्रदान की है। कार्यकर्ताओं के लिए भी यह एक बड़ा संदेश था कि सत्ता के शीर्ष पर बैठकर भी उनका नेता अपनी जड़ों और ईश्वर के प्रति उतना ही समर्पित है जितना एक आम नागरिक होता है।
सांस्कृतिक संबंधों की नई डोर: बिहार-झारखंड समन्वय
देवघर और दुमका की यह धरती भौगोलिक रूप से झारखंड में जरूर है, लेकिन इसका हृदय बिहार के साथ धड़कता है। सम्राट चौधरी का यहाँ आगमन एक तरह से ‘सांस्कृतिक कूटनीति’ का भी हिस्सा है। देवघर एयरपोर्ट पर जनप्रतिनिधियों द्वारा किया गया स्वागत और मंदिर समिति द्वारा किया गया अभिनंदन यह साबित करता है कि सम्राट चौधरी की स्वीकार्यता सीमाओं के पार भी उतनी ही मजबूत है।
मुख्यमंत्री ने देवघर एयरपोर्ट और मंदिर के आसपास की व्यवस्थाओं को देखकर बिहार में भी धार्मिक पर्यटन (Religious Tourism) को और अधिक बढ़ावा देने के संकेत दिए हैं। जिस तरह से बापू टावर, बिहार संग्रहालय और अब बाबा धाम की यह यात्रा एक क्रम में जुड़ी है, वह सम्राट चौधरी के ‘विरासत भी, विकास भी’ के मंत्र को चरितार्थ करती है। बिहार से आए कई श्रद्धालुओं ने अपने मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर गर्व महसूस किया और कई लोगों ने उनके साथ सेल्फी लेने की भी कोशिश की, जिसे मुख्यमंत्री ने बड़ी सादगी से स्वीकार किया।
निष्कर्ष: महादेव के आशीर्वाद से ‘विकसित बिहार’ का लक्ष्य
सम्राट चौधरी की बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ धाम की यह यात्रा 19 अप्रैल 2026 के पन्नों में एक पावन अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। मुख्यमंत्री के लिए यह दिन आत्मिक शांति और राज्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का था। ‘गार्ड ऑफ ऑर्नर’ से शुरू हुई यह यात्रा महादेव के चरणों में पुष्प अर्पित करने और बिहार की समृद्धि की कामना के साथ संपन्न हुई।
पटना वापसी के समय मुख्यमंत्री के चेहरे पर एक अलग ही तेज और संतोष देखा गया। उन्होंने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महादेव की शक्ति ही उन्हें बिहार की सेवा करने की ऊर्जा प्रदान करती है। आने वाले समय में बिहार की राजनीति और प्रशासन में इस आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रभाव निश्चित रूप से सकारात्मक रूप में देखने को मिलेगा। सम्राट चौधरी की यह पूजा-अर्चना केवल एक व्यक्तिगत आस्था नहीं, बल्कि बिहार के स्वर्णिम भविष्य के लिए की गई एक सामूहिक प्रार्थना है, जिसका फल प्रदेश के करोड़ों लोगों के जीवन में खुशहाली के रूप में आएगा।


