बिहार के सांस्कृतिक साधकों को मिला सरकार का बड़ा सहारा: मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना में 153 नए नाम शामिल, अब 411 कलाकारों को मिलेगी मासिक मदद

पटना। बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को अपने गीतों, वाद्ययंत्रों और अभिनय से जीवंत रखने वाले कलाकारों के लिए राजधानी से एक सुखद और राहत भरी खबर सामने आई है। कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा संचालित ‘मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना’ का दायरा बढ़ाते हुए इसमें 153 नए कलाकारों को शामिल करने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। गुरुवार, 14 मई 2026 को आयोजित एक विभागीय समीक्षा के दौरान मंत्री प्रमोद कुमार ने इन नए नामों के प्रस्ताव पर अपनी अंतिम मुहर लगा दी। इस महत्वपूर्ण निर्णय के साथ ही अब प्रदेश में इस योजना से लाभान्वित होने वाले कुल कलाकारों की संख्या बढ़कर 411 हो गई है, जो पहले केवल 258 तक सीमित थी। सरकार का यह कदम उन लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दूतों के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति माना जा रहा है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन बिहार की कला परंपरा को सहेजने में खपा दिया है। नए स्वीकृत कलाकारों के बैंक खातों में इसी मई माह से पेंशन की निर्धारित राशि हस्तांतरित होना शुरू हो जाएगी।

आर्थिक संबल की दिशा में बड़ा कदम: 3 हजार की सम्मान राशि

​मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना का मुख्य उद्देश्य उन कलाकारों को एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जो वृद्धावस्था या आर्थिक अभाव के कारण अपनी कला साधना को जारी रखने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक चयनित और पात्र कलाकार को प्रतिमाह 3,000 रुपये की पेंशन राशि प्रदान की जाती है। यह राशि सीधे तौर पर कलाकारों के बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से भेजी जाती है, जिससे बिचौलियों की गुंजाइश खत्म हो जाती है और पारदर्शिता बनी रहती है।

​मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया कि विभाग की प्राथमिकता उन कलाकारों को तलाश कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है, जो सुदूर ग्रामीण अंचलों में रहकर भी बिहार की माटी की खुशबू को पूरी दुनिया में फैला रहे हैं। गुरुवार को जिन 153 नए आवेदनों को स्वीकृति दी गई है, उनमें राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रविष्टियों का गहन परीक्षण किया गया था। इन कलाकारों ने अपनी कला विधा—चाहे वह लोक गायन हो, पारंपरिक वादन हो या रंगमंच—में कम से कम 20 वर्षों का सक्रिय योगदान दिया है। सरकार का मानना है कि 3 हजार रुपये की यह मासिक राशि वृद्ध कलाकारों के लिए दवा, भोजन और अन्य बुनियादी जरूरतों में एक बड़ा सहारा साबित होगी।

विविध कला विधाओं का समावेश: लोक गायकों से लेकर रंगकर्मियों तक को लाभ

​बिहार की कला केवल एक रूप में नहीं सिमटी है, बल्कि यहाँ लोक गीतों की मिठास से लेकर नाटकों के सामाजिक सरोकार तक की एक लंबी परंपरा रही है। मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना के अंतर्गत केवल नामचीन कलाकारों को ही नहीं, बल्कि उन ‘अनसंग हीरोज’ (अनाम नायकों) को भी जगह दी गई है जो गांव के मेलों, चौपालों और स्थानीय उत्सवों में अपनी कला का प्रदर्शन करते आए हैं। इस योजना के लाभार्थियों में निम्नलिखित विधाओं के कलाकार प्रमुखता से शामिल हैं:

  • लोक कलाकार: चैता, बिरहा, सोहर और कजरी जैसे पारंपरिक लोक गीतों के गायक।
  • रंगकर्मी: वे कलाकार जिन्होंने नुक्कड़ नाटकों और ग्रामीण थिएटर के माध्यम से समाज को जागरूक करने का कार्य किया है।
  • वादन विशेषज्ञ: ढोलक, सारंगी, हारमोनियम और बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों को बजाने वाले पुराने उस्ताद।
  • पारंपरिक चित्रकार और शिल्पकार: वे कलाकार जो मधुबनी पेंटिंग या पत्थर शिल्प जैसी विधाओं को जीवित रखे हुए हैं।

​मंत्री प्रमोद कुमार ने स्पष्ट किया कि कला किसी जाति या धर्म की मोहताज नहीं होती, बल्कि यह एक साधना है। विभाग का लक्ष्य उन सभी साधकों का सम्मान करना है जिन्होंने बिहार के सांस्कृतिक गौरव को अक्षुण्ण रखा है।

पारदर्शिता और सुगमता पर जोर: दूर-दराज के कलाकारों तक पहुँचने का लक्ष्य

​अक्सर सरकारी योजनाओं की प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि ग्रामीण क्षेत्रों के कलाकार आवेदन करने से कतराते हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए मंत्री प्रमोद कुमार ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि कोई भी पात्र कलाकार केवल जानकारी के अभाव में इस योजना से वंचित न रहे।

​अब विभाग जिला स्तर पर कैंप लगाने और स्थानीय कला केंद्रों के माध्यम से कलाकारों का डेटाबेस तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। इससे उन वृद्ध कलाकारों को खोजने में मदद मिलेगी जो तकनीक या आवागमन की दिक्कतों के कारण पटना नहीं पहुँच पाते। प्रमोद कुमार के अनुसार, बिहार की लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने में इन कलाकारों ने जो त्याग किया है, उसकी तुलना किसी भी धनराशि से नहीं की जा सकती, लेकिन यह पेंशन उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक छोटा सा प्रयास है।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और सरकार की प्रतिबद्धता

​2026 के इस दौर में जहाँ आधुनिक मनोरंजन के साधनों ने पारंपरिक कलाओं को पीछे धकेल दिया है, वहाँ ऐसी योजनाएं सांस्कृतिक संजीवनी का कार्य करती हैं। विभाग की समीक्षा बैठक में यह बात भी उभरकर सामने आई कि मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना केवल आर्थिक मदद नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी के लिए एक संदेश भी है कि राज्य सरकार कला की कद्र करना जानती है।

​मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि राज्य सरकार कलाकारों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। पेंशन के अतिरिक्त, विभाग विभिन्न महोत्सवों और आयोजनों में स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने की नीति पर भी काम कर रहा है। नए 153 कलाकारों के जुड़ने से अब यह योजना एक बड़े सामाजिक सुरक्षा जाल के रूप में उभरकर सामने आई है। आने वाले महीनों में कुछ और कलाकारों के आवेदनों की जांच की जाएगी, जिससे लाभार्थियों का आंकड़ा और भी ऊपर जा सकता है।

कलाकारों के लिए ‘मई’ लेकर आई खुशियों की सौगात

​पेंशन के लिए स्वीकृत हुए 153 नए कलाकारों के लिए मई 2026 का यह महीना किसी उत्सव से कम नहीं है। विभाग ने तकनीकी सेल को आदेश दिया है कि इन सभी नए कलाकारों के डेटा को तत्काल प्रभाव से पोर्टल पर अपडेट किया जाए ताकि इसी महीने की पेंशन राशि उनके खातों में पहुँच सके। विभाग के इस निर्णय से उन कलाकारों के परिवारों में खुशी की लहर है जो पिछले काफी समय से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

​मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना के माध्यम से बिहार सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकास की परिभाषा केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी मिट्टी की पहचान और उसे सहेजने वाले हाथों का सम्मान करना भी सुशासन का एक अनिवार्य हिस्सा है। मंत्री प्रमोद कुमार ने अंत में दोहराया कि जब तक बिहार का आखिरी पात्र कलाकार इस योजना की छत्रछाया में नहीं आ जाता, तब तक विभाग का यह अभियान जारी रहेगा। यह पहल निश्चित रूप से राज्य के कला जगत में एक नई ऊर्जा का संचार करेगी और लुप्त हो रही कलाओं के संरक्षण में सहायक सिद्ध होगी।

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