बिहार में ‘जनगणना-2027’ का डिजिटल शंखनाद: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया शुभारंभ, स्व-गणना से तय होगी भविष्य की विकास रूपरेखा

पटना। देश और दुनिया के सबसे विशाल प्रशासनिक और सांख्यिकीय महाअभियान—’भारत की जनगणना 2027′ की गूँज अब बिहार के गलियारों में सुनाई देने लगी है। राजधानी पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय से शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक डिजिटल माउस क्लिक के साथ इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का आधिकारिक शुभारंभ किया। यह केवल एक सांख्यिकीय अभ्यास नहीं है, बल्कि आगामी दशकों में बिहार और भारत के सुशासन, नीति-निर्माण और सामाजिक-आर्थिक कायाकल्प की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा दस्तावेज बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राज्यवासियों से अपील की कि वे इस डिजिटल यज्ञ में अपनी पूरी भागीदारी सुनिश्चित करें, क्योंकि हर एक नागरिक की सटीक जानकारी ही सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रमों की सफलता की कुंजी बनेगी। जनगणना-2027 इस मायने में भी क्रांतिकारी है कि यह पूरी तरह से तकनीक पर आधारित है, जहाँ ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) के माध्यम से आम आदमी को अपने परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करने की शक्ति दी गई है।

सुशासन की आधारशिला: डेटा से बनेगा विकसित बिहार

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए जनगणना के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जनगणना सुशासन की वह अनिवार्य आधारशिला है, जिसके बिना किसी भी प्रभावी नीति का निर्माण संभव नहीं है। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब तक सरकार के पास अपनी जनसंख्या की वास्तविक स्थिति, उनके निवास की प्रकृति और उपलब्ध संसाधनों का सटीक डेटा नहीं होगा, तब तक कल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँचाना एक चुनौती बना रहेगा।

​आगामी वर्षों में बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का जो भी विस्तार होगा, वह इसी ‘जनगणना-2027’ के आंकड़ों पर आधारित होगा। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह अभियान आने वाले समय में प्रदेश की विकास योजनाओं और नीतियों को एक वैज्ञानिक और व्यवहारिक दिशा प्रदान करेगा। यह डेटा यह भी तय करेगा कि किन क्षेत्रों में नए स्कूलों की आवश्यकता है और कहाँ स्वास्थ्य केंद्रों का जाल बिछाने की जरूरत है।

डिजिटल क्रांति: 17 अप्रैल से 01 मई तक ‘स्व-गणना’ का अवसर

​जनगणना-2027 अपनी तकनीकी नवीनता के लिए इतिहास में दर्ज होने जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह पहली बार है जब भारत की जनगणना पूर्णतः डिजिटल डेटा संग्रहण पद्धति पर आधारित होगी। इससे डेटा संकलन में लगने वाला समय कम होगा और पारदर्शिता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ‘स्व-गणना’ की सुविधा है।

17 अप्रैल 2026 से 01 मई 2026 के बीच राज्य के नागरिक स्वयं ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने परिवार और मकान से संबंधित जानकारी दर्ज कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने इस सुविधा का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्व-गणना से न केवल प्रगणकों का बोझ कम होगा, बल्कि नागरिक भी अपनी जानकारी की सटीकता के प्रति निश्चिंत रह पाएंगे। पोर्टल को इस तरह डिजाइन किया गया है कि एक आम स्मार्टफोन उपयोगकर्ता भी सरलता से अपनी प्रविष्टि दर्ज कर सके। यह डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में बिहार का एक बड़ा कदम है।

मकान सूचीकरण (HLO): 02 मई से शुरू होगा जमीनी अभियान

​जनगणना के पहले चरण के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 02 मई 2026 से 31 मई 2026 तक राज्य भर में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing Operations – HLO) का कार्य किया जाएगा। यह चरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दौरान राज्य के हर घर और रिहायशी ढाँचे की पहचान की जाएगी। जो नागरिक 1 मई तक ‘स्व-गणना’ पूरी नहीं कर पाएंगे, उनके घर 2 मई से प्रगणक (Enumerators) स्वयं पहुँचेंगे।

​प्रगणकों के पास टैबलेट या स्मार्टफोन होंगे, जिनमें डिजिटल फॉर्म भरे जाएंगे। मुख्यमंत्री ने अपील की है कि जब प्रगणक आपके घर आएं, तो उन्हें सही और विस्तृत जानकारी दें। एचएलओ चरण के दौरान ही यह तय हो जाता है कि राज्य में कितने परिवार निवास कर रहे हैं और उनके पास जीवन निर्वाह के क्या-क्या साधन उपलब्ध हैं। यह चरण जनगणना की पूरी इमारत के लिए नींव का काम करता है।

नागरिकों से अपील: समावेशी और विश्वसनीय जनगणना में दें सहयोग

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के सभी नागरिकों से इस राष्ट्रीय महत्व के अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि एक सटीक, समावेशी और विश्वसनीय जनगणना तभी संपन्न हो सकती है जब जनता और प्रशासन के बीच पूर्ण समन्वय हो। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान दी जाने वाली हर जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय और विकास उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

​उन्होंने कहा कि ‘जनगणना-2027’ बिहार और पूरे देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी। मुख्यमंत्री की यह अपील केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने ग्रामीण अंचलों के लोगों से भी आग्रह किया है कि वे प्रगणकों को सहयोग दें और किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाहों पर ध्यान न दें। समाज के हर वर्ग—चाहे वह गरीब हो, वंचित हो या अल्पसंख्यक—सबका समावेश इस जनगणना की प्राथमिकता है।

सचिवालय में उच्चस्तरीय उपस्थिति और प्रशासनिक मुस्तैदी

​जनगणना-2027 के इस भव्य शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री सचिवालय में राज्य की शीर्ष नौकरशाही मौजूद थी। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी०के० अनिल, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, सचिव कुमार रवि और गृह विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह की उपस्थिति यह दर्शाती है कि शासन इस अभियान को लेकर कितना गंभीर है।

​अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जनगणना की पूरी तकनीकी प्रक्रिया और जिला स्तर पर की गई तैयारियों के बारे में ब्रीफ किया। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण नोडल एजेंसी की भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि राज्य के दूरदराज के इलाकों में भी इंटरनेट कनेक्टिविटी और प्रगणकों की उपलब्धता बनी रहे ताकि कोई भी घर छूटने न पाए।

भविष्य की योजनाओं का ब्लूप्रिंट: क्यों अहम है जनगणना?

​सांख्यिकीय दृष्टि से देखें तो जनगणना किसी भी राष्ट्र के लिए एक ‘एक्स-रे’ की तरह होती है जो समाज के भीतर के छिपे हुए सच को सामने लाती है। बिहार जैसे विशाल और विविधतापूर्ण राज्य के लिए इसके मायने और भी बढ़ जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में बिहार में जनसंख्या घनत्व, प्रवास और रोजगार की प्रवृत्तियों में जो बदलाव आए हैं, उन्हें समझने का यह सबसे बड़ा अवसर है।

​जनगणना-2027 से प्राप्त आंकड़े यह तय करेंगे कि वित्त आयोग के माध्यम से बिहार को कितनी केंद्रीय सहायता मिलेगी। इसके अलावा, निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और आरक्षण नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन भी इन्हीं आंकड़ों पर टिका होता है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का विजन है कि डिजिटल जनगणना के माध्यम से बिहार ‘रियल-टाइम डेटा’ के युग में प्रवेश करे, जिससे आपदा प्रबंधन और तत्काल राहत कार्यों में भी मदद मिल सके।

जनभागीदारी से ही सफल होगा यह ‘महायज्ञ’

​17 अप्रैल की इस शुरुआत के साथ ही बिहार के लाखों सरकारी कर्मचारी और अधिकारी अब जनगणना के इस महायज्ञ में समर्पित हो जाएंगे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जिस सादगी और स्पष्टता के साथ इस अभियान का महत्व जनता के सामने रखा है, उससे यह उम्मीद की जा रही है कि बिहार इस बार जनगणना के कार्य में पूरे देश में अग्रणी रहेगा। ‘स्व-गणना’ की 15 दिनों की अवधि नागरिकों के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाने का एक स्वर्णिम अवसर है।

​अंत में, मुख्यमंत्री ने पुनः विश्वास व्यक्त किया कि बिहार की जनता अपनी परंपरा और जागरूक नागरिकता का परिचय देते हुए इस अभियान को सफल बनाएगी। सचिवालय से हुआ यह ‘माउस क्लिक’ बिहार के करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला साबित होगा। जनगणना-2027 अब केवल एक सरकारी रिकॉर्ड नहीं, बल्कि एक विकसित और समृद्ध बिहार की पहचान बनने की राह पर अग्रसर है।

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