बिहार कैबिनेट की बैठक में विकास का रोडमैप तैयार: बिजली सब्सिडी, 208 नए कॉलेज और गंगा पथ परियोजनाओं को हरी झंडी; बिहार में अब डिजिटल गवर्नेंस और स्मार्ट क्लास का दौर

पटना। बिहार की प्रगति की रफ्तार को नई दिशा देने के लिए राज्य मंत्रिपरिषद ने बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को आयोजित बैठक में विकास की एक बड़ी रूपरेखा तैयार की है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े 64 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तय किए गए इन फैसलों का सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और आम आदमी के जीवन स्तर पर पड़ेगा। सरकार ने एक तरफ जहाँ भारी-भरकम बिजली सब्सिडी के जरिए उपभोक्ताओं को राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ ‘सात निश्चय-3’ के तहत शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए खजाना खोल दिया है। राज्य में अब न केवल सड़कों और पुलों का जाल बिछेगा, बल्कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक आधुनिक सुरक्षा तंत्र भी खड़ा किया जाएगा।

ऊर्जा और बुनियादी ढांचा: कनेक्टिविटी की नई परिभाषा

​परिवहन व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए कैबिनेट ने गंगा पथ की तीन बड़ी परियोजनाओं को पीपीपी (DBFOT Toll) मॉडल पर चलाने की स्वीकृति दी है। इसमें बिदुपुर से दिघवारा (56 किमी), सारण के दरिहारा से गोपालगंज के डुमरिया घाट (73.51 किमी) और बक्सर-आरा-मनेर (90 किमी) का खंड शामिल है। ये परियोजनाएं उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच व्यापारिक सुगमता को बढ़ाएंगी। वहीं, गया जिले में इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के पास कोठवारा बाजार में फल्गु नदी पर 113.84 करोड़ रुपये की लागत से एक उच्च स्तरीय आरसीसी पुल का निर्माण होगा, जो एनएच-99 से सीधा संपर्क प्रदान करेगा।

​ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार ने “मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना” के तहत 23,165 करोड़ रुपये की विशाल अनुदान राशि मंजूर की है। यह राशि सुनिश्चित करेगी कि उपभोक्ताओं को बढ़ती लागत के बावजूद किफायती दरों पर बिजली मिलती रहे। भागलपुर के पीरपैंती में प्रस्तावित थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 1,020.60 एकड़ जमीन के लीज दस्तावेजों पर लगने वाले स्टाम्प ड्यूटी और निबंधन शुल्क में शत-प्रतिशत छूट दी गई है, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना को गति मिलेगी।

जल प्रबंधन और तकनीकी निगरानी

​ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार अब तकनीक का सहारा ले रही है। राज्य की 29,933 ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं की निगरानी और रख-रखाव के लिए ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ (IoT) आधारित प्रणाली लागू की जाएगी। इसके लिए आगामी पांच वर्षों हेतु 3,601.56 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। कृषि क्षेत्र के लिए जहानाबाद, नालंदा और पटना जिलों में 3,759 हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने हेतु मंडई वीयर प्रणाली और उसकी नहरों के निर्माण के लिए 424.20 करोड़ रुपये दिए गए हैं। लक्ष्य रखा गया है कि मई 2026 तक यह प्रणाली पूरी तरह कार्य करने लगे।

शिक्षा और स्वास्थ्य: भविष्य की नींव

​शिक्षा के क्षेत्र में ‘सात निश्चय-3’ के अंतर्गत सरकार हर प्रखंड और जिला मुख्यालयों में ‘मॉडल स्कूल’ विकसित करने जा रही है। 800 करोड़ रुपये के निवेश से इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, आईसीटी लैब और हाई-स्पीड इंटरनेट जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके अतिरिक्त, उन 208 प्रखंडों में डिग्री कॉलेजों की स्थापना की जाएगी जहाँ फिलहाल उच्च शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है। इसके लिए 104 करोड़ रुपये के शुरुआती बजट के साथ कुल 9,152 नए पदों (शिक्षक और कर्मचारी) के सृजन को भी मंजूरी मिली है।

​स्वास्थ्य सेवाओं में विशिष्टता लाने के लिए पटना के गर्दनीबाग में ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाया जाएगा। यह केंद्र स्क्रीनिंग, थेरेपी और रिसर्च का हब होगा। साथ ही, कैंसर के मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए ‘बिहार कैंसर केयर एंड रिसर्च सोसाइटी’ का गठन किया गया है, जो राज्यभर में कैंसर उपचार के नेटवर्क का प्रबंधन करेगी।

सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार

​साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए पटना के मैंगल्स रोड पर 51.19 करोड़ रुपये की लागत से साइबर अपराध इकाई और विशेष शाखा के लिए एक भव्य भवन का निर्माण होगा। इसके साथ ही, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बिहारशरीफ और गया जैसे शहरों में यातायात व्यवस्था को संभालने के लिए ट्रैफिक पुलिस के 485 नए पदों का सृजन किया गया है। एक बड़ा फैसला पुलिस पदोन्नति को लेकर भी लिया गया है, जिसके तहत अवर निरीक्षक के 20,937 पदों में से 50 प्रतिशत पद अब पदोन्नति के जरिए भरे जाएंगे।

​कानून-व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए ‘बिहार सार्वजनिक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन नियमावली, 2026’ को मंजूरी दी गई है। इसके तहत अब व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों, बैंकों और धार्मिक स्थलों पर अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे। वित्तीय सुधारों की कड़ी में ‘साइबर ट्रेजरी’ की स्थापना की जा रही है, जो केंद्रीय स्तर पर एसएनए-स्पर्श (SNA-SPARSH) बिलों के लेखांकन का प्रबंधन करेगी।

प्रमुख नीतिगत बदलाव और विनियमन

​कैबिनेट ने कई ऐसी नीतियों को मंजूरी दी है जो आम नागरिकों के काम को आसान बनाएंगी:

नीति / नियमावली

मुख्य उद्देश्य

ट्रैफिक चालान सेटलमेंट 2026

90 दिनों से अधिक लंबित चालानों का वर्चुअल कोर्ट के जरिए निपटारा।

पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2026

ई-स्टाम्प कोड के माध्यम से जमीन की रजिस्ट्री को पूरी तरह डिजिटल बनाना।

खनिज संशोधन नियमावली 2026

पत्थर खनन की नीलामी में पारदर्शिता लाना और अवैध परिवहन पर रोक।

बिहार क्रय वरीयता नीति 2024

सरकारी खरीद में स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स को विशेष प्राथमिकता देना।

समाज कल्याण और पर्यावरण संरक्षण

​अनुसूचित जाति एवं जनजाति के छात्र-छात्राओं के लिए संचालित छात्रावासों की अनुदान राशि को 1,000 रुपये से बढ़ाकर सीधे 2,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मोक्षधाम और कब्रिस्तानों के रख-रखाव के लिए 69.79 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। एक ऐतिहासिक कदम के रूप में, बेतिया राज की विशाल संपत्तियों को अब ‘कोर्ट ऑफ वार्ड्स’ से हटाकर सीधे राज्य सरकार के नियंत्रण में लाने के लिए नई नियमावली बनाई गई है।

​पर्यावरण के क्षेत्र में, पटना स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर ‘पटना जू’ कर दिया गया है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने और पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए ‘बिहार हरित जलवायु कोष (BGCF)’ का गठन किया गया है। मुंगेर में स्थित बिहार वानिकी महाविद्यालय एवं शोध संस्थान के सुचारू संचालन के लिए 250 नए पदों के सृजन को भी मंजूरी मिली है।

क्षेत्रीय विकास के अन्य महत्वपूर्ण फैसले

  • मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी: परियोजनाओं के क्रियान्वयन हेतु 93.75 करोड़ रुपये का प्रावधान।
  • अंग प्रक्षेत्र: भागलपुर के पीरपैंती में थर्मल पावर के लिए सरकारी भूमि का ऊर्जा विभाग को निःशुल्क हस्तांतरण।
  • बांका: सिपाही प्रशिक्षण विद्यालय (CTS) के स्थायी अधिष्ठापन के लिए कटोरिया में 49 एकड़ भूमि गृह विभाग को आवंटित।
  • नवादा और भोजपुर: नए केंद्रीय विद्यालय निर्माण हेतु भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति।
  • विश्राम गृह: सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में मरीजों के परिजनों के ठहरने के लिए विश्राम गृहों का निर्माण।

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