बिहार कैबिनेट के 25 बड़े फैसले: किसानों, पेंशनधारियों, निवेशकों और शहरों को मिली बड़ी सौगात, विकास योजनाओं को मिली नई रफ्तार

पटना। बिहार सरकार ने राज्य के विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सोमवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में 25 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में कृषि, रोजगार, शहरी विकास, औद्योगिक निवेश, सड़क निर्माण, जल संसाधन, सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

कैबिनेट बैठक में सबसे चर्चित निर्णय गोपालगंज स्थित सासामूसा चीनी मिल के पुनः संचालन से जुड़ा रहा। लंबे समय से बकाया भुगतान की समस्या से जूझ रहे गन्ना किसानों को राहत देते हुए सरकार ने 42 करोड़ 99 लाख रुपये से अधिक की राशि के भुगतान को मंजूरी दी है। यह राशि किसानों के बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान के लिए उपयोग की जाएगी। माना जा रहा है कि इस निर्णय से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि क्षेत्र में चीनी उद्योग को भी नई ऊर्जा मिलेगी। वर्षों से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे किसानों के लिए यह फैसला राहत भरा साबित होगा और मिल के पुनः संचालन का रास्ता भी आसान बनेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार ने विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) योजना को मंजूरी दी है। यह योजना 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं, महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, कौशल विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

जल संसाधन विभाग से जुड़ी परियोजनाओं को भी बड़ी मंजूरी मिली है। डकरानाला पंप नहर योजना के शेष कार्यों को पूरा करने के लिए 251 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र विकास कार्यक्रमों के लिए भी बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। बिहार हर वर्ष बाढ़ की चुनौती का सामना करता है, ऐसे में इन योजनाओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करना और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्यों के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये की राशि के उपयोग को मंजूरी मिलने से आने वाले समय में प्रभावित जिलों को राहत मिलने की उम्मीद है।

शहरी विकास के क्षेत्र में भी कई बड़े फैसले लिए गए। अमृत 2.0 मिशन के तहत बिहारशरीफ, हाजीपुर, बेगूसराय और सहरसा में जलापूर्ति एवं सीवरेज परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बिहारशरीफ में सीवरेज और एसटीपी निर्माण, हाजीपुर में जलापूर्ति योजना, बेगूसराय में आधुनिक सीवरेज नेटवर्क और सहरसा में पेयजल परियोजना के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं के पूरा होने से लाखों लोगों को स्वच्छ पेयजल, बेहतर सीवरेज व्यवस्था और आधुनिक शहरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।

परिवहन विभाग से जुड़े फैसलों में पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग नीति में संशोधन को मंजूरी दी गई। सरकार का मानना है कि इससे सड़क सुरक्षा में सुधार होगा और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। नए नियमों के लागू होने से पुराने और अनुपयोगी वाहनों को व्यवस्थित तरीके से हटाने का रास्ता साफ होगा। इससे राज्य में आधुनिक और सुरक्षित वाहनों के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अंतर्गत प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई। समस्तीपुर के एक पूर्व जिला अवर निबंधक के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही ई-स्टाम्प व्यवस्था से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया गया है ताकि सेवाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। सरकार का उद्देश्य राजस्व प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने जल जीवन मिशन 2.0 के कार्यान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इसके तहत केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की मंजूरी दी गई है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक होगी। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार आएगा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी होगी।

वाणिज्य कर विभाग ने अपनी भर्ती और प्रोन्नति व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए नई नियमावली को स्वीकृति दी है। इससे विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है। वहीं वित्त विभाग ने बिहार एसएनए-स्पर्श सॉफ्टवेयर के विकास और रखरखाव के लिए 5 करोड़ 75 लाख रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है। यह सॉफ्टवेयर सरकारी योजनाओं के वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद करेगा।

सहकारिता क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। बिस्कोमान को नेशनल को-ऑपरेटिव एक्सपोर्ट लिमिटेड के लिए राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाया गया है। इससे बिहार के कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को रबी मौसम 2026-27 से पुनः लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान की स्थिति में सुरक्षा मिलेगी। यह निर्णय लाखों किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सरकार ने आईआईटी पटना से जुड़े दो बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। आईआईटी पटना रिसर्च पार्क और फेज-2 हॉस्टल निर्माण परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इन परियोजनाओं से राज्य में तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बिहार को तकनीकी और स्टार्टअप हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला पेंशनधारियों के लिए राहत लेकर आया है। वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग और मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन सहित विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 3662 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इससे लाखों लाभार्थियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उनकी निर्भरता कम होगी। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि किसी भी लाभार्थी को पेंशन भुगतान में देरी का सामना न करना पड़े।

स्वास्थ्य विभाग ने नैदानिक संस्थानों के पंजीकरण और विनियमन से संबंधित नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। नए प्रावधानों के माध्यम से निजी और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

उद्योग क्षेत्र में सरकार ने निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए राज्य निवेश प्रोत्साहन पर्षद (SIPB) सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी का दर्जा दिया है। अब उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशकों को विभिन्न विभागों की मंजूरियों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह व्यवस्था उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल, तेज और पारदर्शी बनाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से राज्य में निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

कुल मिलाकर बिहार कैबिनेट के ये 25 फैसले राज्य के विकास एजेंडे को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं। कृषि, रोजगार, शहरी विकास, सामाजिक सुरक्षा, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में लिए गए निर्णय आने वाले समय में बिहार की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरकार का दावा है कि इन फैसलों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में विकास परियोजनाओं को रफ्तार मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

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