बिहार में सफर हुआ महंगा: सरकारी बसों का किराया 15% तक बढ़ा, निजी बस और ऑटो किराए में भी बढ़ोतरी की तैयारी

पटना। बिहार में सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले लाखों यात्रियों के लिए जून महीने की शुरुआत महंगी होने जा रही है। राज्य सरकार ने सरकारी बसों के किराए में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि करने का फैसला लिया है। नई दरें 1 जून से लागू हो गई हैं। इसके साथ ही निजी बस संचालकों और ऑटो संगठनों ने भी किराया बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार के यात्रियों को बस और ऑटो दोनों के लिए पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ सकता है।

परिवहन विभाग के इस फैसले का असर प्रतिदिन यात्रा करने वाले छात्रों, कर्मचारियों, व्यापारियों और आम यात्रियों पर सीधे तौर पर पड़ेगा। राज्य के विभिन्न जिलों के बीच चलने वाली सरकारी बसों के किराए में वृद्धि के बाद लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त राशि चुकानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक परिवहन किराए में यह बदलाव आम लोगों के मासिक बजट को प्रभावित कर सकता है।

जानकारी के अनुसार बिहार राज्य पथ परिवहन निगम और अन्य सरकारी परिवहन सेवाओं के अंतर्गत संचालित लगभग 1500 बसों के किराए में संशोधन किया गया है। नई दरों के तहत साधारण बसों का किराया 1.50 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 1.71 रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया गया है। यह वृद्धि देखने में भले ही मामूली लगे, लेकिन लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों के लिए इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

उदाहरण के तौर पर यदि कोई यात्री 100 किलोमीटर की यात्रा करता है तो पहले उसे 150 रुपये किराया देना पड़ता था, जबकि नई दर लागू होने के बाद वही यात्रा लगभग 171 रुपये में होगी। इसी प्रकार 200 से 300 किलोमीटर तक की यात्रा करने वाले यात्रियों को पहले की तुलना में काफी अधिक भुगतान करना पड़ेगा।

सिर्फ साधारण बसें ही नहीं, बल्कि वातानुकूलित और प्रीमियम श्रेणी की बसों के किराए में भी बदलाव किया गया है। नई दरों के अनुसार एसी डीलक्स बसों का किराया 2 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 2.30 रुपये प्रति किलोमीटर कर दिया गया है। इसके अलावा सामान्य एसी बसों के लिए भी 2.30 रुपये प्रति किलोमीटर की दर निर्धारित की गई है।

वहीं लग्जरी और प्रीमियम श्रेणी की बसों में सफर करने वाले यात्रियों को और अधिक खर्च करना होगा। वॉल्वो और मर्सिडीज जैसी उच्च श्रेणी की बसों का किराया 2.88 रुपये प्रति किलोमीटर निर्धारित किया गया है। इससे पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, पूर्णिया और अन्य प्रमुख शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

सरकारी बस किराए में वृद्धि के बाद निजी बस संचालकों ने भी अपने किराए की समीक्षा शुरू कर दी है। बिहार मोटर ट्रांसपोर्ट फेडरेशन ने संकेत दिया है कि राज्य की लगभग 40 हजार निजी बसों का किराया भी बढ़ाया जाएगा। फेडरेशन से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि संचालन लागत में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसके कारण किराए में संशोधन आवश्यक हो गया है।

बस संचालकों का तर्क है कि डीजल की कीमत, वाहन रखरखाव, बीमा, कर्मचारियों का वेतन और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में पुराने किराए पर संचालन करना आर्थिक रूप से कठिन होता जा रहा है। इसी वजह से निजी बस ऑपरेटर भी सरकारी बसों के समान या उसके आसपास किराया तय करने पर विचार कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार निजी बस संचालकों की बैठक में इस बात पर चर्चा की जा रही है कि नया किराया सरकारी बसों से कम रखा जाए, बराबर रखा जाए या उससे अधिक निर्धारित किया जाए। अंतिम निर्णय के बाद नई दरों की घोषणा की जाएगी।

बसों के बाद अब ऑटो रिक्शा किराए में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। ऑटो संगठनों ने भी किराया संशोधन की मांग उठाई है। ऑटो चालकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और ईंधन की लागत ने उनके लिए मौजूदा किराए पर संचालन करना कठिन बना दिया है।

पटना सहित राज्य के कई जिलों में ऑटो संगठनों ने किराया बढ़ाने को लेकर सहमति जताई है। बताया जा रहा है कि लगभग 25 प्रतिशत तक किराया बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो शहरों के भीतर छोटी दूरी की यात्रा भी महंगी हो जाएगी।

पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर और अन्य प्रमुख शहरों में लाखों लोग प्रतिदिन ऑटो सेवा का उपयोग करते हैं। ऐसे में ऑटो किराए में संभावित वृद्धि का असर बड़ी संख्या में यात्रियों पर पड़ेगा। विशेष रूप से छात्र, नौकरीपेशा लोग और छोटे व्यवसायी इससे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि किराया वृद्धि के पीछे कई आर्थिक कारण हैं। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के संचालन में लगातार लागत बढ़ रही है। वाहनों के रखरखाव, ईंधन, तकनीकी उन्नयन और कर्मचारियों से जुड़े खर्चों में वृद्धि के कारण परिवहन संस्थाओं को समय-समय पर किराए में बदलाव करना पड़ता है।

हालांकि यात्रियों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच किराया वृद्धि से आम लोगों की आर्थिक चुनौतियां और बढ़ेंगी। पहले से ही खाद्य पदार्थों, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं पर खर्च बढ़ रहा है। ऐसे में परिवहन लागत बढ़ने से मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

बिहार सरकार का कहना है कि परिवहन व्यवस्था को बेहतर और अधिक टिकाऊ बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों के अनुसार राजस्व बढ़ने से बस सेवाओं के संचालन, रखरखाव और विस्तार में मदद मिलेगी। इससे यात्रियों को भविष्य में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

कुल मिलाकर बिहार में बस और ऑटो किराए में होने वाली बढ़ोतरी का असर राज्य के लाखों यात्रियों पर पड़ने वाला है। सरकारी बसों में नई दरें लागू हो चुकी हैं, जबकि निजी बस और ऑटो किराए को लेकर भी जल्द फैसला होने की संभावना है। ऐसे में आने वाले दिनों में बिहार में यात्रा करना पहले की तुलना में अधिक महंगा साबित हो सकता है और आम लोगों को अपने परिवहन बजट में बदलाव करना पड़ सकता है।

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