
पटना। बिहार के प्रशासनिक गलियारों से सोमवार को एक बड़ी खबर निकलकर सामने आई, जिसने राज्य की पुलिस बहाली प्रक्रिया में निरंतरता और अनुभव को प्राथमिकता देने के सरकार के इरादे को स्पष्ट कर दिया है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) के अध्यक्ष केएस द्विवेदी को राज्य सरकार ने सेवा विस्तार देने का निर्णय लिया है। गृह विभाग के आरक्षी शाखा द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अब वे 68 वर्ष की आयु पूरी होने तक या अगले आदेश तक अपने पद पर बने रहेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बिहार पुलिस में बड़े पैमाने पर रिक्तियों को भरने और बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की चुनौती प्रशासन के सामने है। केएस द्विवेदी का कार्यकाल विस्तार केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे का परिचायक है जो सरकार ने उनकी कार्यशैली और अनुशासन पर दिखाया है। 1984 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी और बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) रह चुके केएस द्विवेदी की छवि एक कड़क और ईमानदार अफसर की रही है, और यही कारण है कि भर्ती जैसे संवेदनशील विभाग की जिम्मेदारी एक बार फिर उन्हें सौंपी गई है।
अधिसूचना की बारीकियां और कार्यकाल की शर्तें
बिहार सरकार के गृह विभाग ने सोमवार को जो पत्र जारी किया है, वह स्पष्ट करता है कि केएस द्विवेदी की सेवाओं की आवश्यकता अभी आयोग को है। अधिसूचना के मुताबिक, उनकी नियुक्ति की शर्तों में बदलाव करते हुए उन्हें 68 वर्ष की आयु सीमा तक कार्य करने की अनुमति दी गई है। ज्ञात हो कि केएस द्विवेदी को पहली बार 10 अप्रैल 2023 को बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। तब से लेकर अब तक उन्होंने आयोग के कामकाज में कई सुधार किए हैं।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि भर्ती आयोगों में नेतृत्व की निरंतरता बहुत जरूरी होती है। अगर बीच में नेतृत्व बदलता है, तो चल रही परीक्षाओं और चयन की प्रक्रियाओं में देरी होने की संभावना बनी रहती है। केएस द्विवेदी को मिला यह विस्तार इस बात की गारंटी है कि बिहार में दारोगा और सार्जेंट जैसे महत्वपूर्ण पदों के लिए जो बहाली प्रक्रियाएं वर्तमान में पाइपलाइन में हैं, वे बिना किसी अवरोध के अपने मुकाम तक पहुँचेंगी। सरकार ने उनके अनुभव को एक ‘एसेट’ के रूप में देखा है, विशेषकर तब जब पुलिस विभाग में तकनीकी और रणनीतिक बदलाव किए जा रहे हैं।
खाकी के सफर से भर्ती की मेज तक: एक नजर अतीत पर
केएस द्विवेदी का नाम बिहार पुलिस के इतिहास में उन अधिकारियों में गिना जाता है जिन्होंने कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर कभी समझौता नहीं किया। 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में उन्होंने बिहार के विभिन्न जिलों में अपनी सेवाएं दीं। जब वे राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) बने, तो उस समय पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाने और अपराध पर नियंत्रण पाने की दोहरी चुनौती थी। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पुलिसिया कार्यसंस्कृति में अनुशासन का जो पाठ पढ़ाया, उसकी गूँज आज भी मुख्यालय के गलियारों में सुनाई देती है।
सेवानिवृत्ति के बाद, जब उन्हें अप्रैल 2023 में बीपीएसएससी का अध्यक्ष बनाया गया, तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी भर्ती परीक्षाओं की साख को बचाना। बिहार में अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन केएस द्विवेदी के नेतृत्व में आयोग ने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने परीक्षा केंद्रों के चयन से लेकर प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और डिजिटल मूल्यांकन तक, हर स्तर पर कड़ाई बरती। यही कारण है कि आज जब पुलिस अवर सेवा आयोग की किसी परीक्षा का परिणाम आता है, तो उसमें विवाद की गुंजाइश कम और मेधा की पहचान ज्यादा होती है।
आयोग की चुनौतियां और द्विवेदी का ‘विजन’
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग का मुख्य कार्य राज्य में सब-इंस्पेक्टर और सार्जेंट जैसे पदों के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन करना है। यह पद पुलिस बल की रीढ़ माने जाते हैं क्योंकि ये सीधे तौर पर जनता और कानून के बीच की पहली कड़ी होते हैं। केएस द्विवेदी के सामने वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती बिहार पुलिस में हजारों की संख्या में खाली पड़े पदों को पारदर्शी तरीके से भरना है। सरकार ने पुलिस बल की संख्या बढ़ाने का जो लक्ष्य रखा है, उसे पूरा करने का दारोमदार सीधे तौर पर इसी आयोग पर है।
सेवा विस्तार मिलने के बाद अब केएस द्विवेदी उन लंबी अवधि की योजनाओं को भी धरातल पर उतार पाएंगे जिन्हें उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में शुरू किया था। इसमें मुख्य रूप से शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) में सेंसर आधारित तकनीक का अधिक उपयोग, उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल स्कैनिंग और उम्मीदवारों के बायोमेट्रिक मिलान की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाना शामिल है। द्विवेदी का मानना है कि पुलिस सेवा में केवल वही युवा आने चाहिए जो शारीरिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी देश की सेवा के लिए पूरी तरह समर्पित हों। उनके कार्यकाल में भर्ती के मानकों में जो कड़ाई देखी गई है, वह भविष्य के सशक्त बिहार पुलिस की नींव रख रही है।
प्रशासनिक स्थिरता और नियुक्तियों की रफ्तार
बिहार में हाल के वर्षों में नियुक्तियों को लेकर एक नई ऊर्जा देखी जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में पुलिस-पब्लिक अनुपात को राष्ट्रीय मानक के करीब लाया जाए। इसके लिए हर साल नियमित अंतराल पर परीक्षाओं का आयोजन अनिवार्य है। केएस द्विवेदी को सेवा विस्तार देने के पीछे का एक बड़ा कारण यह भी है कि वे वर्तमान में चल रहे विज्ञापन और परीक्षा चक्र को भलीभांति समझते हैं। किसी नए व्यक्ति के आने पर प्रक्रिया को समझने और सामंजस्य बिठाने में जो समय लगता है, सरकार उस समय को बचाना चाहती थी।
गृह विभाग की इस अधिसूचना के बाद अब आयोग में लंबित कई फाइलों पर काम तेज होने की उम्मीद है। दारोगा भर्ती के नए विज्ञापनों और पिछली परीक्षाओं के अंतिम परिणाम जारी करने की दिशा में अब तेजी आएगी। केएस द्विवेदी की कार्यप्रणाली ऐसी है कि वे फाइलों को लटकाने के बजाय उनके त्वरित निष्पादन पर जोर देते हैं। सेवा विस्तार के इस निर्णय से उन हजारों अभ्यर्थियों को भी राहत मिली है जो परीक्षा कैलेंडर के पालन को लेकर संशय में थे। अब यह तय है कि द्विवेदी के नेतृत्व में आयोग अपने निर्धारित समयबद्ध तरीके से काम करता रहेगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश
केएस द्विवेदी को पद पर बनाए रखने का एक प्रतीकात्मक संदेश यह भी है कि सरकार भर्ती में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या पैरवी को बर्दाश्त नहीं करेगी। द्विवेदी की छवि एक ऐसे अधिकारी की रही है जो किसी भी राजनैतिक या बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकते। भर्ती आयोग के अध्यक्ष के रूप में उनकी मौजूदगी ही भू-माफियाओं और सॉल्वर गैंग के लिए एक बड़ी चेतावनी है। पिछले कुछ वर्षों में आयोग ने कई ऐसे गिरोहों का भंडाफोड़ किया है जो फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने का झांसा देते थे।
विस्तार मिलने के बाद अब द्विवेदी की टीम और भी आक्रामक तरीके से मुन्नाभाइयों और फर्जीवाड़े के खिलाफ काम करेगी। उन्होंने पहले भी स्पष्ट किया है कि आयोग की परीक्षा में केवल वही पास होगा जिसमें दम होगा। उनकी इस नीति ने बिहार के गरीब और मेधावी छात्रों के मन में एक नया विश्वास जगाया है। अब दूर-दराज के गाँवों में बैठकर तैयारी करने वाले छात्रों को यह भरोसा है कि यदि वे मेहनत करेंगे, तो बिना किसी पैरवी के वे भी दारोगा बन सकते हैं। केएस द्विवेदी का अगला कार्यकाल इसी भरोसे को और अधिक मजबूत करने की दिशा में केंद्रित रहेगा।
अनुभव की नई पारी
20 अप्रैल 2026 को जारी यह अधिसूचना बिहार पुलिस के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केएस द्विवेदी जैसे अनुभवी अधिकारी का 68 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहना बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग को वह स्थिरता प्रदान करेगा जिसकी उसे सबसे अधिक आवश्यकता है। सरकार ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि योग्यता और अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता। 1984 बैच का वह आईपीएस अधिकारी जिसने कभी बिहार की सड़कों पर कानून का राज स्थापित किया था, अब बिहार की सुरक्षा के लिए ‘ईमानदार कंधों’ को चुनने का कार्य जारी रखेगा। आने वाले दिनों में बीपीएसएससी द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाएं और उनके परिणाम केएस द्विवेदी के इस विस्तारित कार्यकाल की सफलता की कहानी खुद बयां करेंगे। फिलहाल, यह खबर बिहार के उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक आश्वासन है कि उनकी मेहनत का मूल्यांकन एक अनुभवी और न्यायप्रिय नेतृत्व के तहत होता रहेगा।


