
पटना: बिहार ने बच्चों की सेहत की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों के हेल्थ आईडी कार्ड बनाने में बिहार देश का दूसरा सबसे सफल राज्य बन गया है। अब तक 26.15% बच्चों के हेल्थ कार्ड बन चुके हैं, जो इस पहल को लेकर राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस सूची में महाराष्ट्र पहले स्थान पर है, जहां 30.63% बच्चों के हेल्थ कार्ड बनाए जा चुके हैं।
कुछ ही महीनों में आया बड़ा बदलाव
दिसंबर 2024 तक राज्य के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों में एक भी हेल्थ कार्ड नहीं बना था और पूरे बिहार में सिर्फ 1,435 कार्ड ही तैयार हुए थे।
इसके बाद समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) निदेशालय ने एक विशेष अभियान शुरू किया, जिसके तहत दिसंबर से अप्रैल के बीच महज 5 महीनों में 29,08,420 बच्चों के हेल्थ कार्ड बना दिए गए।
95 लाख बच्चों का है लक्ष्य
बिहार के आंगनबाड़ी केंद्रों में करीब 95 लाख बच्चे पंजीकृत हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इन सभी बच्चों को जल्द से जल्द हेल्थ कार्ड से जोड़ा जाए ताकि उनकी सेहत का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सके और आवश्यकतानुसार उन्हें समय पर इलाज मिल सके।
हेल्थ कार्ड से होंगे ये बड़े फायदे:
- बच्चों की स्वास्थ्य से जुड़ी सारी जानकारी डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित रहेगी
- बीमार होने पर डॉक्टर पुराने रिकॉर्ड देखकर बेहतर इलाज कर पाएंगे
- देशभर के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज और मुफ्त दवा मिलेगी
- डॉक्टर की पर्ची की जरूरत खत्म, डिजिटल कार्ड से इलाज संभव
- संपूर्ण स्वास्थ्य सेवा आसान और पारदर्शी होगी
एक तकनीकी क्रांति की शुरुआत
इस पहल को बच्चों की स्वास्थ्य देखभाल में एक बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है। जहां एक ओर बच्चों के इलाज में पारदर्शिता और तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का डिजिटलाइजेशन भी मजबूत होगा।
सरकार का कहना है कि अगले कुछ महीनों में हेल्थ कार्ड बनाने की रफ्तार और तेज होगी, ताकि कोई भी बच्चा इस सुविधा से वंचित न रह जाए।


