
गोपालगंज, बिहार | 2 जून 2025 — बिहार में सुशासन की सरकार और उसकी पुलिस एक बार फिर सवालों के घेरे में है। गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाना क्षेत्र से पुलिस की ऐसी लापरवाही सामने आई है जिसे जानकर आप चौंक जाएंगे। वारंट किसी और के नाम था, लेकिन पुलिस ने गांव के एक निर्दोष वृद्ध को गिरफ्तार कर 18 घंटे तक हाजत में बंद रखा और फिर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
वारंटी सुरेंद्र यादव पिता घरभरन यादव, लेकिन गिरफ्तार हुआ सुरेंद्र यादव पिता इंद्रासन यादव
घटना सिधवलिया थाना के हसनपुर गांव की है। यहां पुलिस कोर्ट के गैर-जमानती वारंट (NBW) पर सुरेंद्र यादव पिता घरभरन यादव को गिरफ्तार करने गई थी। लेकिन बिना नाम-पिता का मिलान किए, पुलिस ने गांव के ही एक अन्य 66 वर्षीय सुरेंद्र यादव पिता इंद्रासन यादव को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार व्यक्ति ने बार-बार खुद को निर्दोष बताया, लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी।
18 घंटे तक हाजत में, फिर भेजा गया जेल
गिरफ्तारी के बाद सुरेंद्र यादव को थाने में 18 घंटे तक हाजत में रखा गया, हथकड़ी लगाई गई और डर व धमकी से चुप करा दिया गया। इतना ही नहीं, चौकीदार भी उन्हें पहचानने में नाकाम रहा, जबकि गांव के लोगों ने भी उन्हें निर्दोष बताया।
अदालत के हस्तक्षेप के बाद मिली राहत
जब सुरेंद्र यादव को न्यायालय में पेश किया गया, तब अदालत ने दस्तावेजों की जांच की और आरोपी के नाम व पिता के नाम का मिलान कराया। आधार कार्ड से पहचान की पुष्टि होने के बाद अदालत ने सुरेंद्र यादव को रिहा करने का आदेश दिया और पुलिस को फटकार लगाई।
पुलिस की जिम्मेदारी पर सवाल
इस मामले ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर फिर से गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में एक ही नाम के दो लोग हों, तो निर्दोष किसी भी वक्त शिकार बन सकता है। पुलिस की इस गैर-जिम्मेदारी से मानवाधिकार हनन का मामला भी बनता है।
अब क्या होगी कार्रवाई?
अब देखना यह है कि गोपालगंज पुलिस अधीक्षक इस गंभीर लापरवाही पर क्या कदम उठाते हैं। क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी या इसे महज ‘छोटी भूल’ कहकर दबा दिया जाएगा?


