
आरा/पटना: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए चर्चित भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मृतक भरत भूषण तिवारी के माता-पिता को बिना किसी देरी के अंतरिम मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह राहत मानवीय आधार पर दी जा रही है और इसका पुलिस कार्रवाई की वैधता या चल रही जांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
आयोग ने कहा- जांच जारी रहेगी, लेकिन परिवार को तुरंत मिले राहत
मानवाधिकार आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि अंतरिम मुआवजा देने का अर्थ यह नहीं है कि किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी की जिम्मेदारी तय हो गई है। दोष तय करने का अधिकार जांच एजेंसियों और सक्षम न्यायालय के पास रहेगा।
आयोग के अनुसार, पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है।
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने बताया अहम फैसला
पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनीष कुमार ने आयोग के फैसले को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे भविष्य में ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को समय पर राहत मिल सकेगी।
उन्होंने कहा—
“मुआवजा देने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी तय हो गई है। यह केवल मानवीय आधार पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का कदम है।”
न्याय में देरी से नाराज परिवार, आंदोलन होगा तेज
घटना के 20 दिन से अधिक बीत जाने के बावजूद परिवार का आरोप है कि दोषियों के खिलाफ अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है।
परिजनों का कहना है कि कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के हस्तक्षेप के बावजूद न्याय की प्रक्रिया बेहद धीमी है।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि मामले से जुड़े एक अधिकारी को पहले निलंबित किया गया, लेकिन बाद में दूसरे विभाग में पदस्थापित कर दिया गया, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
17 जुलाई को जंतर-मंतर पर होगा बड़ा प्रदर्शन
भरत तिवारी की मौत के एक महीने पूरे होने पर 17 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया गया है।
परिजनों ने देशभर के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से इस प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है।
मां ने प्रधानमंत्री से लगाई गुहार
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने भावुक अपील करते हुए कहा—
“17 जुलाई को सभी लोग दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचें। मेरे बेटे की हत्या में जो भी शामिल है, उसे फांसी की सजा मिलनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले में हस्तक्षेप करें और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें।”
क्या है पूरा मामला?
17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर किया था। गंभीर रूप से घायल भरत तिवारी की बाद में पटना में इलाज के दौरान मौत हो गई।
परिजनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। मामले के बाद शाहपुर थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और न्यायिक जांच भी शुरू हो चुकी है।
अब मानवाधिकार आयोग के निर्देश और 17 जुलाई के प्रस्तावित प्रदर्शन के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गया है।


