
आरा/भोजपुर: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस बीच मामले में निलंबित किए गए तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकर का बयान सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है।
निलंबित थानाध्यक्ष का बयान बना चर्चा का विषय
मीडिया से बातचीत में निलंबित थानाध्यक्ष राजेश मालाकर ने कहा कि भरत तिवारी की मौत उसकी किस्मत में लिखी थी और उसे बचाने की कोशिश की गई, लेकिन वह बच नहीं पाया।
उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। आलोचकों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले इस तरह की टिप्पणी गैर-जिम्मेदाराना है।
पुलिस का दावा क्या है?
पुलिस का कहना है कि भरत भूषण तिवारी को पकड़ने गई टीम पर उसने फायरिंग की थी। पुलिस के अनुसार, जवाबी कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई और इसी दौरान उसे गोली लगी।
पुलिस का दावा है कि पूरी कार्रवाई कानून के दायरे में हुई थी और पुलिसकर्मियों ने अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाया।
विवाद की वजह क्या है?
मामले में विवाद तब बढ़ गया जब घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो को लेकर विभिन्न पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं।
परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि भरत तिवारी ने हथियार छोड़ दिया था और उसके बाद गोली चलाई गई। वहीं पुलिस का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
17 जून को हुई थी घटना
17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच मुठभेड़ हुई थी। पुलिस के अनुसार भरत स्थानीय मुद्दों को लेकर मुखर रहता था और कार्रवाई के दौरान उसने पुलिस टीम पर हथियार तान दिया था।
घटना में घायल होने के बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उसकी मौत हो गई।
न्यायिक जांच के आदेश
लगातार उठ रहे सवालों और वायरल वीडियो के बाद बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने घोषणा की है कि मामले की जांच एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश द्वारा कराई जाएगी ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच हो सके।
कई पुलिसकर्मी निलंबित
मामले में प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए कई पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।
- तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकर निलंबित
- एक एएसआई पर कार्रवाई
- कई पुलिसकर्मियों को हटाया गया
यह कार्रवाई शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी की अनुशंसा पर की गई।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
वर्तमान में पुलिस के दावों, परिजनों के आरोपों और वायरल वीडियो के बीच कई सवाल बने हुए हैं। न्यायिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मुठभेड़ के दौरान क्या हुआ था और क्या पुलिस ने निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया था।
फिलहाल पूरे मामले पर बिहार की राजनीति, प्रशासन और आम जनता की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।


