खबर के मुख्य बिंदु (Highlights):
- दहशत: सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी पर बमबारी, बंकरों में छिपे बिहार के सैकड़ों लोग।
- इंतजार: सहरसा के इंजीनियर की होली की छुट्टियां रद्द, दोहा में परिवार संग फंसे।
- खौफ: अबुधाबी में रिहायशी इलाकों के ऊपर से गुजरीं मिसाइलें, सायरन की आवाज से रात भर जगे लोग।
- संकट: अररिया के नवादा-कोलगामा के 100 से अधिक लोग खाड़ी देशों में फंसे
भागलपुर/सहरसा/अररिया | 03 मार्च, 2026
खाड़ी देश (मिडिल ईस्ट): ईरान और इजराइल के बीच भड़की जंग की आग अब खाड़ी देशों में काम कर रहे बिहार के हजारों प्रवासी कामगारों के घरों तक पहुँच गई है। सऊदी अरब से लेकर अबुधाबी और कतर तक, बिहार के ‘लाल’ मौत के साये में जीने को मजबूर हैं। कहीं रिफाइनरियों पर बमबारी हो रही है, तो कहीं आसमान से गुजरती मिसाइलें और सायरन की गूँज लोगों की नींद उड़ा रही है।
सऊदी अरब: बंकर में ‘इफ्तार’ और ‘नमाज’
सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी में काम करने वाले सैकड़ों बिहारी कर्मचारी फिलहाल बंकरों में पनाह लिए हुए हैं। सोमवार को रिफाइनरी पर हुई बमबारी के बाद सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है।
- भागलपुर का हाल: हबीबपुर निवासी मो. रेयाजउद्दीन ने बंकर से बताया कि उनके साथ भागलपुर के ताजउद्दीन और शमशेर आलम भी सुरक्षित हैं।
- बंकर की जिंदगी: बंकरों में दरभंगा, गया, पटना और सीवान के भी कई लोग हैं। रिफाइनरी प्रबंधन ने रसद और पानी का इंतजाम किया है।
- रमजान: संकट की इस घड़ी में भी आस्था कम नहीं हुई है। बंकर के अंदर ही नमाज अदा की जा रही है और वहीं सामूहिक इफ्तार हो रहा है।
अबुधाबी: “सिर के ऊपर से निकलीं मिसाइलें”
अररिया के मिर्जाभाग निवासी अब्दुर रहमान अपने बेटे, भाई और भतीजों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं। उनके परिजन अबुधाबी में कार्यरत हैं।
”बच्चों ने फोन पर बताया कि आसमान में मिसाइलें गुजरने की आवाजें आती हैं। सायरन इस कदर बजते हैं कि रात भर नींद नहीं आती। एक रात तो ऐसी थी कि मिसाइलें बिल्कुल घर के ऊपर से गुजरीं, पूरा परिवार सहम गया।” — अब्दुर रहमान, अररिया
सहरसा के इंजीनियर: ‘होली’ का टिकट रह गया धरा का धरा
सहरसा के अमित कुमार चौहान, जो कतर के दोहा में इंजीनियर हैं, इस बार होली अपने परिवार के साथ बिहार में मनाने वाले थे।
- रद्द हुई छुट्टियां: अमित की पत्नी प्रियंका और उनके दो छोटे बच्चे भी साथ हैं। उन्होंने घर वापसी के टिकट तक बुक करा लिए थे, लेकिन अचानक छिड़ी जंग ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सुरक्षा कारणों और उड़ानों की अनिश्चितता के चलते उनका आना टल गया है।
अररिया: 100 से ज्यादा परिवारों की सांसें अटकीं
अररिया जिले के नवादा और कोलगामा जैसे क्षेत्रों के लगभग 100 लोग वर्तमान में युद्ध प्रभावित खाड़ी क्षेत्रों में फंसे हुए हैं। परिवारों का कहना है कि वे हर पल व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं। कई परिवार भारत वापसी की तैयारी में हैं, लेकिन रमजान के कारण वीजा एक्सटेंशन और यात्रा प्रतिबंधों की वजह से फिलहाल फंसे हुए हैं।
VOB का नजरिया: वतन वापसी की पुकार
खाड़ी देशों में छिड़ा यह महायुद्ध केवल मिसाइलों की लड़ाई नहीं है, बल्कि उन हजारों परिवारों की रोजी-रोटी और जान पर बन आई आफत है, जो बिहार से हजारों मील दूर पसीना बहाते हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ केंद्र और राज्य सरकार से अपील करता है कि खाड़ी देशों में फंसे बिहारवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी सुरक्षित वतन वापसी के लिए विशेष ‘रेस्क्यू’ पहल की जाए।


