भागलपुर के लाल किशन कुमार का भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में चयन, गांव से निकल रचा इतिहास!

भागलपुर, 5 अगस्त 2025: जब सपनों को हौसला मिल जाए तो गांव की गलियों से निकलकर लड़का टीम इंडिया की जर्सी तक पहुंच जाता है — भागलपुर के किशन कुमार ने यही कर दिखाया है। कहलगांव प्रखंड के नंदलालपुर पंचायत के छोटे से गांव जगन्नाथपुर से निकला यह तेजतर्रार बाएं हाथ का गेंदबाज अब ऑस्ट्रेलिया की सरज़मीं पर टीम इंडिया की नीली जर्सी में कहर ढाएगा।

किशन कुमार का चयन भारतीय अंडर-19 टीम में बतौर तेज गेंदबाज हुआ है और वह बिहार से टीम इंडिया अंडर-19 में शामिल होने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक बन गए हैं। उनके साथ समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी भी भारतीय टीम का हिस्सा हैं।


बचपन में नहीं था मैदान, फिर भी बनाया मैदान में नाम

गांव में न खेल का मैदान था, न कोई कोच। गली-कूचों और खेत-खलिहानों में क्रिकेट खेलते किशन के सपनों की उड़ान को संसाधनों की बेड़ियां नहीं रोक सकीं। जब गांव में सीमाएं लगीं, तो इलाहाबाद बुआ के घर भेजा गया, जहां आशीष नेहरा क्रिकेट अकादमी में किशन ने अपने सपनों को निखारना शुरू किया।

आज वे सिर्फ गांव ही नहीं, पूरे बिहार के लिए गर्व का नाम बन गए हैं।


गांव में खुशी का माहौल, मिठाइयों की बारिश, आंखों में गर्व

गांव के हर चौक-चौराहे पर अब सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा है — किशन कुमार। उनके पिता सुशील सिंह उर्फ मुन्ना सिंह, जो खुद एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी थे, भावुक होकर बोले —
“जो सपना मैंने देखा था, वो बेटा पूरा कर रहा है।”

मां रीना सिंह की आंखों में आंसू थे लेकिन चेहरे पर मुस्कान। उन्होंने कहा,
“बचपन से ही उसे खेल में गहरी रुचि थी। संसाधन नहीं थे, लेकिन हौसला बहुत बड़ा था। आज वही हौसला टीम इंडिया तक पहुंचा है।”


खेलो इंडिया योजना ने बदली किस्मत

किशन के पिता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेलो इंडिया जैसी योजनाओं का आभार जताते हुए कहा,
“पहले सिर्फ सिफारिश वाले बच्चे टीम इंडिया में जाते थे, अब टैलेंट देखकर मौके मिलते हैं। हमारे बेटे को भी उसी ईमानदार सिस्टम ने प्लेटफॉर्म दिया है।”


गांव के दोस्तों की जुबानी — ‘जब बैटिंग करता था, किसी और की बारी ही नहीं आती थी!’

गांव के साथी अभिषेक चौबे और रौनक सिंह ने बताया कि किशन बचपन से ही बैट और बॉल दोनों में माहिर था।
“जब बैटिंग करता तो अकेले ही मैच खत्म कर देता। बाकी टीम वालों की बारी तक नहीं आती थी। छक्के इतने लंबे मारता था कि कई बार गेंद पड़ोसियों के घर में चली जाती थी और खिड़कियों के शीशे टूट जाते थे।”


अब ऑस्ट्रेलिया में बजाएगा डंका!

21 सितंबर से 7 अक्टूबर तक चलने वाले अंडर-19 भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज में सभी की निगाहें किशन पर टिकी हैं। वह नोएडा में चल रहे हाई परफॉर्मेंस कैंप में शामिल हैं और पहले गुजरात टाइटंस के लिए नेट गेंदबाज भी रह चुके हैं।

उनके कोच नागेंद्र नेगी और अकादमी की प्रशिक्षक स्वाति सिंह ने किशन को अनुशासित, मेहनती और बेहद केंद्रित खिलाड़ी बताया है।


“मैं देश के लिए खेलूंगा… यही सपना था” — किशन कुमार

फोन पर बातचीत में किशन ने कहा,
“मैं हमेशा से देश के लिए क्रिकेट खेलना चाहता था। गांव में सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। आज जो भी हूं, मां-पापा की वजह से हूं और अब मैं भारत के लिए अपना 100% दूंगा।”

उन्होंने अपने रोल मॉडल बेन स्टोक्स और मेंटर आशीष नेहरा का भी जिक्र किया।


भागलपुर का यह लाल अब देश के लिए गेंदबाजी करेगा। और अगर आपने उसका नाम अब तक नहीं सुना था, तो अगली बार जब किशन कुमार किसी कंगारू को बोल्ड करे, तो याद रखिएगा — वो भागलपुर की मिट्टी से निकला हुआ हीरा है।


 

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