भागलपुर की मेधा का ‘ग्रैंड कमबैक’; 2 साल बाद खत्म हुआ टॉपरों का सूखा, खेत और खलिहानों से निकले बिहार के ‘रत्न’

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  • बड़ी उपलब्धि: भागलपुर के दो छात्रों, अंशु प्रिया और अंकुश कुमार ने बिहार मैट्रिक परीक्षा 2026 में राज्य स्तर पर संयुक्त रूप से 7वीं रैंक हासिल की है।
  • ग्रामीण प्रतिभा का उदय: जिले के दोनों स्टेट टॉपर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से हैं, जो शिक्षा व्यवस्था के विकेंद्रीकरण की गवाही दे रहे हैं।
  • बेटियों की बादशाहत: जिला टॉप-10 की सूची में शामिल 25 परीक्षार्थियों में 15 छात्राएं हैं, जबकि छात्रों की संख्या 10 है।
  • सूखा खत्म: 2024 और 2025 की ‘शून्य’ उपलब्धि के बाद भागलपुर ने फिर से टॉपर्स की फैक्ट्री के रूप में वापसी की है।
  • VOB इनसाइट: भागलपुर का यह परिणाम एक सामाजिक बदलाव की ओर इशारा करता है। जहाँ पहले सफलता केवल शहर के बड़े कोचिंग सेंटरों और निजी स्कूलों तक सिमटी थी, वहीं अब शाहकुंड और घोघा जैसे प्रखंडों के सरकारी और उत्क्रमित विद्यालयों ने बाजी मारी है। यह जीत केवल छात्रों की नहीं, बल्कि उन ‘ग्रामीण गुरुओं’ की भी है जिन्होंने संसाधनों के अभाव में भी मेधा को तराशा है। हालांकि, पास प्रतिशत में 1.55% की गिरावट एक ‘अलार्म’ भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

भागलपुर | 30 मार्च, 2026

​बिहार की सिल्क सिटी भागलपुर के लिए रविवार का दिन किसी उत्सव से कम नहीं रहा। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा घोषित मैट्रिक के नतीजों ने जिले के उस मलाल को धो दिया, जो पिछले दो सालों से कचोट रहा था। 2024 और 2025 में भागलपुर का कोई भी छात्र बिहार की टॉप-10 सूची में जगह नहीं बना सका था, लेकिन 2026 के परिणामों ने इस सूखे को पूरी तरह खत्म कर दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 25 होनहारों ने टॉप-10 की जिला सूची में जगह बनाई है, जिनमें से दो ने राज्य स्तर पर अपनी धमक दिखाई है।

घोघा और शाहकुंड के लाल ने बढ़ाया मान: राज्य की सातवीं रैंक पर कब्जा

​भागलपुर के गौरव का मुख्य आधार अंशु प्रिया और अंकुश कुमार बने हैं। अंशु प्रिया ने श्री संत हाई स्कूल घोघा से और अंकुश कुमार ने उत्क्रमित माध्यमिक स्कूल पचरुखिया शाहकुंड से पढ़ाई कर पूरे प्रदेश में संयुक्त रूप से सातवां स्थान प्राप्त किया है। दोनों ने 484 अंक (96.8%) हासिल किए हैं। यह सफलता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले 2021 में जिले के 5, 2022 में 3 और 2023 में केवल 1 छात्र ही राज्य के टॉप-10 में आ सका था। अंशु और अंकुश की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि भागलपुर की मेधा फिर से अपने पुराने फॉर्म में लौट आई है।

मजदूर के बेटे और सब्जी विक्रेता की बेटी: जब संघर्ष बना ‘सीढ़ी’

​इस बार के परिणाम ‘अभावों के प्रभाव’ की कहानी बयां कर रहे हैं। सफलता की इस चमक में उन परिवारों की मेहनत भी शामिल है जो रोजमर्रा की रोटी के लिए जद्दोजहद करते हैं।

  • शिवानी कुमारी (मजदूर की बेटी, जिला रैंक 2): सबौर प्रखंड के सरधो उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय की शिवानी ने 480 अंक (96%) लाकर जिले में दूसरा स्थान पाया है। उनके पिता लुडेश्वर मंडल एक मजदूर हैं। शिवानी अब भविष्य में इंजीनियर बनकर अपने पिता के पसीने की कीमत चुकाना चाहती हैं।
  • पीयूष कुमार (सब्जी विक्रेता का पुत्र, जिला रैंक 3): सबौर के बड़ी हाट निवासी पीयूष ने 479 अंक पाकर जिले में तीसरा स्थान हासिल किया। उनके पिता बबलू शाह सब्जी बेचते हैं। पीयूष का लक्ष्य अब IAS बनकर देश की सेवा करना है।
  • प्रिया कुमारी (मजदूर की बेटी, जिला रैंक 6): बिहपुर के औलियाबाद की प्रिया ने 476 अंक हासिल किए। पिता मजदूरी करते हैं, लेकिन प्रिया की नजर अब प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) की कुर्सी पर है।
  • अंकित कुमार (मजदूर का पुत्र, जिला रैंक 10): पीरपैंती के ओलापुर का अंकित, जिसके पिता बासुकी महतो मजदूरी करते हैं, उसने 471 अंक पाकर इंजीनियर बनने का सपना संजोया है।

बेटियों का दबदबा: 25 टॉपर्स में 15 छात्राओं ने मारी बाजी

​भागलपुर जिले की टॉप-10 की सूची में छात्राओं ने छात्रों को काफी पीछे छोड़ दिया है। 25 टॉपर्स में 15 लड़कियों का होना यह दर्शाता है कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा धरातल पर उतर रहा है। राजकीय गर्ल्स हाई स्कूल की नुसरत जहां और मोनालिशा ने 471 अंक पाकर जिले में 10वां स्थान पाया है। नुसरत डॉक्टर बनना चाहती हैं, तो मोनालिशा की इच्छा रेलवे में करियर बनाने की है।

​इसी स्कूल की नुसरत जहां ने अपनी सफलता पर कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता, केवल कड़ी मेहनत ही एकमात्र रास्ता है। वहीं, झुनझुनवाला आदर्श गर्ल्स हाई स्कूल की रिया कुमारी ने स्व-अध्ययन के दम पर 8-9 घंटे पढ़ाई कर इंजीनियर बनने का लक्ष्य रखा है।

भागलपुर जिला: टॉप-10 मेधा सूची (विस्तृत विवरण)

जिला रैंक

छात्र का नाम

विद्यालय

अंक

लक्ष्य

1 (बिहार-7)

अंशु प्रिया

श्री संत हाई स्कूल घोघा

484

स्टेट टॉपर

1 (बिहार-7)

अंकुश कुमार

उत्क्रमित मा. स्कूल पचरुखिया

484

स्टेट टॉपर

2

शिवानी कुमारी

उत्क्रमित मा. विद्यालय सरधो

480

इंजीनियर

3

पीयूष कुमार

सबौर

479

आईएएस (IAS)

4

सत्यजीत कुमार

गोराडीह (चौमुख)

478

आईआईटी इंजीनियर

6

शयन कुमार रमन

रामसुंदर उच्च विद्यालय रामपुर

476

यूपीएससी (UPSC)

6

प्रिया कुमारी

उत्क्रमित मा. विद्यालय औलियाबाद

476

बीडीओ (BDO)

7

नेहा भारती

नवगछिया (मकंदपुर)

475.2 (95.8%)

जिला गौरव

7

राजीव कुमार

झंडापुर (बिहपुर)

474

इंजीनियर

8

आदित्य राज

डीपीएम हाई स्कूल सुल्तानगंज

473

आईएएस (IAS)

8

नीतू कुमारी

जगदीशपुर (अंगारी)

473

इंजीनियर

9

मुकेश कुमार

उत्क्रमित उच्च विद्यालय किसनदासपुर

472

बीपीएससी (BPSC)

10

नुसरत जहां

राजकीय गर्ल्स हाई स्कूल

471

डॉक्टर

10

अंकित कुमार

पीरपैंती (ओलापुर)

471

इंजीनियर

10

मौसम कुमारी

नारायणपुर (पहाड़पुर)

471

डॉक्टर

10

साक्षी कुमारी

शाहकुंड

471

आईएएस (IAS)

10

मोनालिशा

राजकीय गर्ल्स हाई स्कूल

471

रेलवे

डेटा एनालिसिस: पास प्रतिशत में गिरावट एक चिंता का विषय

​जहाँ टॉपर्स ने जिले का नाम रोशन किया है, वहीं समग्र परिणाम के आंकड़े थोड़े चिंताजनक हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) के विश्लेषण के अनुसार:

  • वर्तमान पास प्रतिशत (2026): 79.75%
  • पिछला पास प्रतिशत (2025): 81.30%
  • गिरावट: 1.55%

​इसका मतलब है कि पिछले साल की तुलना में इस बार ज्यादा छात्र फेल हुए हैं। यह गिरावट उन औसत छात्रों की स्थिति की ओर इशारा करती है जिन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षण की अधिक आवश्यकता है।

VOB का नजरिया: ग्रामीण मेधा को पंख देने की जरूरत

​भागलपुर के ये परिणाम एक स्पष्ट संदेश दे रहे हैं—मेधा अब केवल पटना या भागलपुर शहर के ‘एलीट’ स्कूलों की जागीर नहीं है। शाहकुंड के पचरुखिया और गोराडीह के चौमुख गांव से टॉपर्स का निकलना यह साबित करता है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और छात्रों की जुगलबंदी रंग ला रही है।

  1. सरकारी स्कूलों का कायाकल्प: 25 में से अधिकांश टॉपर सरकारी और उत्क्रमित विद्यालयों से हैं। यह सुशासन के उस मॉडल की जीत है जहाँ शिक्षकों की उपस्थिति और पाठ्यक्रम की समयबद्धता पर जोर दिया गया है।
  2. डिजिटल क्रांति: सुल्तानगंज के आदित्य राज जैसे छात्रों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों का श्रेय दिया है, जो यह बताता है कि ग्रामीण बिहार अब डिजिटल दुनिया से जुड़ चुका है।
  3. पारिवारिक प्रेरणा: किसान, मजदूर और सब्जी विक्रेताओं के बच्चों का सफल होना समाज के आर्थिक पिरामिड के नीचे से ऊपर की ओर बढ़ने की प्रक्रिया को दर्शाता है।

निष्कर्ष: सुशासन और मेधा का संगम

​भागलपुर ने 2026 के मैट्रिक नतीजों में अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पा ली है। अंशु, अंकुश, शिवानी और पीयूष जैसे छात्र न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे सूबे के लिए रोल मॉडल हैं। यह जीत यह भी सुनिश्चित करती है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा और बेहतर माहौल मिले, तो बिहार की मेधा दुनिया को रास्ता दिखा सकती है।

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