भागलपुर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (बीसीई) इस वक्त पूरी तरह बाढ़ की चपेट में है। गंगा के उफान और बारिश के पानी ने कॉलेज परिसर में ऐसी दस्तक दी कि प्रशासनिक भवन से लेकर प्राचार्य कक्ष, लैब और कक्षाएं—सब पानी में डूब गए हैं। निचले तल के हर कमरे में पानी भर चुका है, जिससे सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं।
हॉस्टल पर ताला, छात्र बाढ़ से बचने बाहर निकले
हालात इतने गंभीर हैं कि हॉस्टलों में भी पानी घुस आया है। कॉलेज प्रशासन ने तुरंत सभी हॉस्टल बंद करने का आदेश दिया। शुक्रवार को भारी संख्या में छात्र अपना सामान समेटकर बाहर निजी कमरों या रिश्तेदारों के घर शिफ्ट होते दिखे।
करीब एक हजार छात्रों वाले इस कॉलेज में अचानक हुए विस्थापन से अफरा-तफरी का माहौल है।
ऑनलाइन क्लास ही अब सहारा
वरिष्ठ शिक्षक डॉ. शशांक शेखर ने बताया, “परिसर में पानी उतरने में समय लगेगा। ऐसे में पढ़ाई का नुकसान रोकने के लिए तत्काल ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दी गई हैं।” हालांकि, जिन छात्रों के घर भी बाढ़ प्रभावित हैं, उनके लिए ऑनलाइन कक्षाएं अटेंड करना भी चुनौती बन गया है।
लाखों की लैब मशीनरी पानी में, नुकसान का अंदेशा
कॉलेज की अत्याधुनिक लैबों में लगी महंगी मशीनें, कंप्यूटर और फर्नीचर पानी में डूबने से भारी नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, प्रशासन ने अभी आधिकारिक तौर पर नुकसान का आंकलन शुरू नहीं किया है।
छात्र बोले— पढ़ाई से ज्यादा अब सिर पर छत की चिंता
बाढ़ के पानी से जूझते छात्रों का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी चिंता फिलहाल सुरक्षित ठिकाना ढूंढना है। एक छात्र ने कहा, “पढ़ाई तो ऑनलाइन हो जाएगी, लेकिन रहने का क्या? हॉस्टल बंद है, बाहर किराये पर कमरे भी महंगे हो गए हैं।”


