
भागलपुर: नाथनगर क्षेत्र के रामचंद्रपुर नवटोलिया दोगच्छी में आयोजित नौ दिवसीय श्री श्री 108 विष्णु महायज्ञ इन दिनों श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बना हुआ है। 23 अप्रैल से शुरू हुआ यह महायज्ञ 1 मई तक चलेगा, जिसमें हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना और यज्ञ में भाग ले रहे हैं। महायज्ञ के तीसरे दिन तो श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
सुबह से ही यज्ञ स्थल पर लोगों का आना-जाना शुरू हो गया था। आसपास के दर्जनों गांवों से श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं और यज्ञ में आहुति देकर अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। यज्ञ के दौरान उठता हवन कुंड का धुआं और वैदिक मंत्रोच्चारण पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रहा है। श्रद्धालु इसे “धुवां लगाना” कहते हैं, जिसे शुभ और पुण्यदायी माना जाता है।
मेला समिति के अध्यक्ष सुबोध मंडल ने बताया कि इस महायज्ञ का आयोजन क्षेत्र में शांति, सुख-समृद्धि और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर साल इस तरह के धार्मिक आयोजन से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और लोग एकजुट होकर धार्मिक गतिविधियों में भाग लेते हैं।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस बार महायज्ञ में उत्तर प्रदेश से प्रसिद्ध प्रवचनकर्ता रंजना और प्रीति को आमंत्रित किया गया है। दोनों प्रवचनकर्ता प्रतिदिन शाम सात बजे से अपने प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धार्मिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों के बारे में जागरूक कर रही हैं। उनके प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग यज्ञ स्थल पर जुटते हैं और देर रात तक कार्यक्रम चलता रहता है।
प्रवचन के दौरान धर्म, कर्म, भक्ति और जीवन के आदर्शों पर विस्तार से चर्चा की जाती है, जिससे लोगों को जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा मिलती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसे प्रवचन न केवल धार्मिक ज्ञान बढ़ाते हैं, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं।
महायज्ञ स्थल पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ मेले का भी आयोजन किया गया है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। खासकर बच्चों के लिए यहां मिकी झूला, जैम्पिंग और अन्य मनोरंजन के साधन उपलब्ध हैं, जिससे बच्चों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। वहीं बड़ों के लिए तारामची, मौत का कुआं और कई अन्य झूले लगाए गए हैं, जो मेले की रौनक को बढ़ा रहे हैं।
मेले में स्थानीय दुकानदारों ने भी अपने-अपने स्टॉल लगाए हैं, जहां खाने-पीने की चीजें, खिलौने और अन्य घरेलू सामान उपलब्ध हैं। इससे स्थानीय व्यापारियों को भी अच्छा फायदा हो रहा है और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि इस तरह के धार्मिक आयोजनों से न केवल आस्था मजबूत होती है, बल्कि सामाजिक समरसता भी बढ़ती है। लोग अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर यहां आते हैं और कुछ समय के लिए आध्यात्मिक वातावरण में खुद को जोड़ते हैं। इससे मानसिक शांति और सुकून का अनुभव होता है।
महायज्ञ के आयोजन में स्थानीय ग्रामीणों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने तन-मन-धन से इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया है। आयोजन स्थल की साफ-सफाई, श्रद्धालुओं की सुविधा और अन्य व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। भीड़ को देखते हुए स्थानीय पुलिस की तैनाती की गई है, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। साथ ही, आयोजन समिति के स्वयंसेवक भी लगातार लोगों की सहायता कर रहे हैं।
आयोजन के अंतिम दिनों में और भी अधिक भीड़ होने की संभावना जताई जा रही है, खासकर पूर्णाहुति के दिन श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हो सकती है। ऐसे में समिति द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
कुल मिलाकर, नाथनगर में आयोजित यह नौ दिवसीय विष्णु महायज्ञ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक सहयोग का भी शानदार उदाहरण बनकर सामने आया है। आने वाले दिनों में यह आयोजन और भी भव्य रूप लेगा और श्रद्धालुओं के लिए यादगार अनुभव साबित होगा।


