
भागलपुर। रेशम नगरी भागलपुर के शांत कहे जाने वाले इलाकों में अब आस्था के केंद्र भी सुरक्षित नहीं रहे। ताजा मामला बाईपास थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बैजानी गांव का है, जहां सोमवार और मंगलवार की दरम्यानी रात अज्ञात चोरों ने गांव के दो प्रमुख मंदिरों को अपना निशाना बनाया। चोरों ने न केवल मंदिरों की संपत्ति पर हाथ साफ किया, बल्कि गांव की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी चोट पहुंचाई है। हनुमान मंदिर और मां काली मंदिर में हुई इस वारदात ने स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ते नशाखोरी के जाल पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह किसी पेशेवर अपराधी गिरोह का काम नहीं, बल्कि नशे की लत को पूरा करने के लिए छटपटा रहे उन युवाओं की करतूत है जो कुछ रुपयों के लिए भगवान के घर में भी सेंध लगाने से नहीं हिचकिचाते।
इस चोरी की घटना के बाद बैजानी गांव के लोगों में जितना दुख है, उससे कहीं अधिक गुस्सा व्याप्त है। सुबह जब पूजा की थाली लेकर श्रद्धालु मंदिर की सीढ़ियां चढ़े, तो वहां का मंजर देखकर उनकी आंखें फटी रह गई। बिखरा हुआ सामान, टूटी हुई दानपेटी और गायब पीतल के बर्तन इस बात की गवाही दे रहे थे कि रात के अंधेरे में यहां ‘अधर्म’ का खेल खेला गया है।
आधी रात का तांडव: हनुमान मंदिर और मां काली मंदिर में सेंधमारी
बैजानी गांव के हनुमान मंदिर और मां काली मंदिर ग्रामीणों की आस्था के मुख्य स्तंभ हैं। सोमवार की रात जब गांव के लोग चैन की नींद सो रहे थे, तब अपराधियों ने बड़ी चालाकी से इन दोनों मंदिरों की घेराबंदी की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चोरों ने सबसे पहले हनुमान मंदिर को निशाना बनाया। वहां मंदिर के भीतर रखे पूजा-पाठ के कीमती बर्तन, जिनमें कांसा और पीतल की थालियां, लोटा और अन्य सामग्रियां शामिल थीं, उन्हें बटोर लिया। इसके बाद चोरों ने मंदिर की दानपेटी (हुंडी) को निशाना बनाया। मजबूत ताले को किसी भारी औजार से तोड़कर पेटी के भीतर जमा भक्तों की चढ़ावे की राशि निकाल ली गई।
इतना ही नहीं, अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने पास ही स्थित मां काली मंदिर के भंडार कक्ष के दरवाजे को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। भंडार कक्ष का गेट तोड़कर चोरों ने वहां रखी वस्तुओं को खंगाला। इस दौरान वहां लगी मोटर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया, जिससे मंदिर की जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। चोरों ने भंडार गृह में रखे अन्य छोटे-मोटे सामानों को भी नहीं छोड़ा। सुबह जब ग्रामीणों ने मंदिर के कपाट खुले और सामानों को गायब पाया, तो यह खबर आग की तरह पूरे गांव में फैल गई।
ग्रामीणों का शक: ‘ब्राउन शुगर’ के सौदागरों और नशेड़ियों पर उंगली
बैजानी गांव के निवासियों ने इस चोरी के पीछे एक बहुत ही गंभीर और चिंताजनक पहलू की ओर इशारा किया है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि जिस तरह से पीतल के बर्तन और दानपेटी के छोटे-मोटे कैश को निशाना बनाया गया है, वह किसी शातिर अंतर्राज्यीय गिरोह का काम नहीं लगता। स्थानीय लोगों की मानें तो इलाके में ‘ब्राउन शुगर’ और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि नशे की लत को पूरा करने के लिए पैसे जुटाने के इरादे से इन नशेड़ियों ने मंदिरों को आसान निशाना बनाया है। भागलपुर के विभिन्न इलाकों में पिछले कुछ समय से ‘ब्राउन शुगर’ की तस्करी और सेवन के मामले सामने आए हैं। नशे के आदी ये लोग अक्सर छोटी-मोटी चोरियों के जरिए अपने डेली डोज का इंतजाम करते हैं। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि रात के समय सुनसान जगहों और मंदिरों के आसपास कुछ संदिग्ध युवकों का जमावड़ा देखा जाता रहा है, जिन पर नशा करने का संदेह है। यह घटना उसी सामाजिक बुराई का एक कड़वा परिणाम है।
पुलिसिया कार्रवाई: सीसीटीवी फुटेज और गश्ती का भरोसा
घटना की जानकारी मिलते ही बाईपास थाना अध्यक्ष सुमन कुमार राय और एएसआई उमेश शुक्ला पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों मंदिरों का बारीकी से निरीक्षण किया और टूटे हुए तालों व क्षतिग्रस्त मोटर की स्थिति का मुआयना किया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालना शुरू कर दिया है।
थाना अध्यक्ष सुमन कुमार राय ने ग्रामीणों के साथ बैठक की और उन्हें आश्वासन दिया कि अपराधियों को बहुत जल्द कानून के शिकंजे में लाया जाएगा। पुलिस उन संदिग्धों की सूची बना रही है जो पूर्व में नशाखोरी या छोटी-मोटी चोरियों में संलिप्त रहे हैं। एएसआई उमेश शुक्ला ने बताया कि तकनीकी अनुसंधान के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वारदात के समय मंदिर के आसपास किन मोबाइल नंबरों की सक्रियता थी। पुलिस ने ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील की है ताकि पहचान सुनिश्चित की जा सके।
सुरक्षा पर सवाल: क्या केवल पुलिस के भरोसे बचे हैं हमारे मंदिर?
बैजानी की इस घटना ने एक बार फिर मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर मंदिर रात के समय लावारिस छोड़ दिए जाते हैं, जिसका फायदा नशेड़ी और चोर उठाते हैं। ग्रामीणों ने पुलिस से मांग की है कि बाईपास थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में रात की गश्ती (Night Patrolling) को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। विशेष रूप से उन पॉकेट्स में पुलिस की पैनी नजर होनी चाहिए जहां नशा करने वालों का अड्डा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर आज मंदिर के बर्तन चोरी हुए हैं, तो कल ये अपराधी किसी के घर में घुसने से भी परहेज नहीं करेंगे। नशे की लत अपराधियों को हिंसक भी बना सकती है। इसलिए, पुलिस को केवल चोरी की जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इलाके में बिक रहे ‘ब्राउन शुगर’ के नेटवर्क को भी ध्वस्त करना चाहिए। जब तक नशीले पदार्थों की आपूर्ति बंद नहीं होगी, तब तक इस तरह की वारदातों पर पूरी तरह अंकुश लगाना नामुमकिन होगा।
थाना अध्यक्ष की अपील: “आपकी सूचना, हमारी कार्रवाई”
बाईपास थाना अध्यक्ष सुमन कुमार राय ने ग्रामीणों के बीच एक नया आत्मविश्वास भरने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पुलिस और जनता के बीच का तालमेल ही अपराध को रोक सकता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपने गांव में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या नए व्यक्ति के आने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें। उन्होंने विशेष रूप से यह भरोसा दिलाया कि नशा करने वालों या बेचने वालों की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ग्रामीण स्तर पर भी ‘ग्राम रक्षा दल’ जैसी समितियों को सक्रिय किया जाना चाहिए जो रात के समय मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों की निगरानी कर सकें। पुलिस ने वादा किया है कि बैजानी में हुई इस चोरी के आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर ही वे दम लेंगे। फिलहाल, गांव में तनावपूर्ण शांति है और लोग जल्द से जल्द अपनी आस्था के केंद्र में फिर से वही सुरक्षा और शुद्धता देखना चाहते हैं।
निष्कर्ष: समाज को भी लड़नी होगी यह जंग
बैजानी के मंदिरों में हुई चोरी केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के भीतर पनप रहे ‘कैंसर’ का लक्षण है। जब आस्था के केंद्र सुरक्षित नहीं रह जाते, तो समझ लेना चाहिए कि सामाजिक नैतिकताओं का पतन हो रहा है। नशाखोरी ने भागलपुर के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में अपनी जड़ें जमा ली हैं।
पुलिस की कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन समाज के बुद्धिजीवियों और अभिभावकों को भी यह सोचना होगा कि उनके बच्चे किस रास्ते पर जा रहे हैं। मंदिरों से पीतल के बर्तन चोरी होना एक आर्थिक क्षति हो सकती है, लेकिन युवाओं का नशे की ओर मुड़ना एक पीढ़ी की क्षति है। उम्मीद है कि बाईपास थाना पुलिस जल्द ही उन चोरों को पकड़ेगी, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या भागलपुर की गलियों से उस नशे के धुएं को साफ किया जा सकेगा जो अब मंदिरों के आंगन तक पहुँच गया है? ‘द वॉइस ऑफ बिहार’ इस मामले की निरंतर फॉलो-अप रिपोर्टिंग जारी रखेगा ताकि बैजानी के लोगों को न्याय मिल सके।


