भागलपुर की लाइफलाइन पर हाहाकार: अजय कुमार मंडल और मिथुन यादव ने किया क्षतिग्रस्त महासेतु का मुआयना; विशेषज्ञों की रिपोर्ट पर उठाए सवाल, रेल मंत्री से मांगी विशेष ट्रेनें

भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 133 के पास स्लैब गिर जाने से उत्पन्न हुए संकट ने पूरे अंग जनपद की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। इस गंभीर स्थिति का जायजा लेने और आम जनता को हो रही परेशानियों को करीब से समझने के लिए सोमवार, 04 मई 2026 को सांसद अजय कुमार मंडल और नाथनगर विधायक मिथुन यादव ने क्षतिग्रस्त महासेतु का विस्तृत निरीक्षण किया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने गंगा के दोनों तटों—भागलपुर और नवगछिया छोर—पर जाकर जमीनी हकीकत देखी। महासेतु के टूटने से उत्तर और दक्षिण बिहार का संपर्क जिस तरह से कटा है, उसका सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ा है। आवागमन पूर्णतः बाधित होने के कारण छात्र, मरीज, व्यापारी और दैनिक यात्री भारी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। निरीक्षण के दौरान सांसद और विधायक ने न केवल प्रशासनिक चूक पर नाराजगी जताई, बल्कि भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश और मांगें भी रखीं, ताकि लोगों को इस महासंकट से कुछ राहत मिल सके।

निरीक्षण और प्रशासनिक निर्देश: सुरक्षा सर्वोपरि

​सांसद अजय कुमार मंडल और विधायक मिथुन यादव ने क्षतिग्रस्त हिस्से को देखने के बाद स्पष्ट किया कि इस समय सबसे बड़ी चुनौती उन हजारों लोगों को सुरक्षित तरीके से गंगा पार कराना है जो अपनी रोजी-रोटी के लिए पुल पर निर्भर थे। सांसद ने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि गंगा में संचालित की जा रही स्टीमर और नौका सेवा को पूरी तरह निशुल्क रखा जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यात्रियों से किसी भी प्रकार का शुल्क लेना इस आपदा की स्थिति में अनुचित होगा।

​सुरक्षा के मानकों पर बात करते हुए सांसद ने कहा कि सभी स्टीमर और नौकाओं में यात्रियों की सुरक्षा हेतु लाइफ जैकेट सहित अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने घाटों पर एसडीआरएफ (SDRF) टीम की स्थायी तैनाती का निर्देश दिया ताकि किसी भी आपात स्थिति या दुर्घटना की सूरत में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य किया जा सके। विधायक मिथुन यादव ने भी अधिकारियों को सचेत किया कि नावों पर क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने की प्रवृत्ति पर सख्त रोक लगाई जाए और घाटों पर भीड़ प्रबंधन के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए।

विशेषज्ञों की रिपोर्ट और तकनीकी विफलता पर बड़ा सवाल

​निरीक्षण के दौरान सांसद अजय कुमार मंडल ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सांसद ने बताया कि वे 16 सितंबर 2025 से ही लगातार इस पुल की जर्जर स्थिति के बारे में संबंधित मंत्रियों और उच्चाधिकारियों को पत्र लिख रहे थे। उनकी सक्रियता के बाद 20 मार्च 2026 को राष्ट्रीय उच्च पथ और पुल निर्माण निगम के विशेषज्ञों द्वारा एक संयुक्त निरीक्षण भी किया गया था।

​हैरानी की बात यह है कि उस निरीक्षण के बाद विशेषज्ञों ने अपनी रिपोर्ट में पुल की मुख्य संरचना को पूरी तरह सुरक्षित बताया था और इस पर भारी वाहनों के आवागमन को जारी रखने की अनुमति दी थी। सांसद ने आक्रोश जताते हुए कहा कि विशेषज्ञों के उस ‘क्लीन चिट’ के महज डेढ़ महीने के भीतर 3 मई 2026 की रात्रि को लगभग 34 मीटर लंबा स्लैब अचानक गिरकर गंगा में समा गया। यह विशेषज्ञों की तकनीकी समझ और जांच की गुणवत्ता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। सांसद ने इस पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर किस आधार पर जर्जर पुल को सुरक्षित घोषित किया गया था।

सीढ़ी और टोटो का ‘लोकल कनेक्ट’ फॉर्मूला

​आम यात्रियों की तात्कालिक समस्या को देखते हुए सांसद ने एक व्यवहारिक सुझाव और निर्देश प्रशासन को दिया है। उन्होंने कहा कि यदि तकनीकी टीम अनुमोदन दे देती है, तो टूटे हुए पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से के निकट तत्काल सीढ़ी लगाने की व्यवस्था की जाए। इस सीढ़ी का उद्देश्य पैदल यात्रियों को पुल के शेष सुरक्षित हिस्से तक पहुँचाना है।

​सांसद का मानना है कि यदि यात्री सीढ़ी का प्रयोग करके पुल के उस पार पहुँच जाते हैं, तो वहां से वे टोटो या ई-रिक्शा के माध्यम से नवगछिया की ओर आसानी से आ-जा सकेंगे। इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जो लंबी दूरी का चक्कर काटकर मुंगेर नहीं जा सकते या जो नाव की लंबी कतारों में नहीं फंसना चाहते। उन्होंने कहा कि पुल के दोनों तरफ टोटो और ई-रिक्शा के सुचारू परिचालन के लिए भी पुलिस को व्यवस्था देखनी होगी ताकि यात्रियों को मनमाना किराया न देना पड़े।

रेलवे से बड़ी राहत की मांग: विशेष ट्रेनों का प्रस्ताव

​सड़क मार्ग पूरी तरह ठप होने के कारण अब रेलवे ही भागलपुर और नवगछिया/कटिहार के बीच आवागमन का एकमात्र सुरक्षित और तेज जरिया बचा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सांसद अजय कुमार मंडल ने रेल मंत्री से पत्र लिखकर और दूरभाष पर संपर्क कर विशेष ट्रेनों के परिचालन की मांग की है।

​सांसद ने रेल मंत्री से निम्नलिखित ट्रेनों को तुरंत शुरू करने का आग्रह किया है:

  • भागलपुर से खगड़िया (भाया जमालपुर): यात्रियों की सुविधा के लिए इस रूट पर कम से कम 2 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेन चलाई जाएं।
  • भागलपुर से कटिहार: इस महत्वपूर्ण मार्ग पर भी 2 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेन शुरू की जाएं ताकि सीमांचल और अंग प्रदेश का संपर्क बना रहे।

​सांसद ने तर्क दिया कि यदि ये ट्रेनें शुरू हो जाती हैं, तो सड़क मार्ग पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और हजारों दैनिक यात्री समय पर अपने गंतव्य तक पहुँच सकेंगे। उन्होंने रेलवे अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि वर्तमान में चल रही ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़े जाएं ताकि यात्रियों को भीड़ की समस्या न हो।

जनजीवन पर प्रभाव और सामाजिक सरोकार

​निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने अपनी व्यथा दोनों जनप्रतिनिधियों के सामने रखी। भागलपुर और नवगछिया के बीच हजारों छात्र पढ़ाई के लिए आते-जाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल पर निर्भर हैं। पुल टूटने से सबसे अधिक मार इन्हीं वर्गों पर पड़ी है। सांसद और विधायक ने भरोसा दिलाया कि वे इस मुद्दे को न केवल राज्य सरकार बल्कि केंद्र के समक्ष भी प्रमुखता से रखेंगे।

​मिथुन यादव ने कहा कि भागलपुर की अर्थव्यवस्था खेती और व्यापार पर टिकी है। दूध, सब्जी और अन्य अनाज का बड़ा हिस्सा इसी पुल के जरिए शहर पहुँचता था। अब किसानों के सामने अपनी उपज बाजार तक पहुँचाने की चुनौती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि किसानों के लिए विशेष नावों की व्यवस्था की जाए ताकि उनकी फसल बर्बाद न हो। सांसद अजय कुमार मंडल ने अंत में दोहराया कि वे इस समस्या के स्थायी समाधान तक चैन से नहीं बैठेंगे और समांतर बन रहे नए फोर-लेन पुल के निर्माण में भी तेजी लाने का दबाव बनाएंगे। प्रशासन को हिदायत दी गई है कि वैकल्पिक मार्गों पर रोशनी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहें ताकि रात के समय यात्रियों को कोई डर न रहे।

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