विक्रमशिला सेतु पर पहले बेली ब्रिज का ढांचा खड़ा: पांच दिनों में तैयार होगा पहला वैकल्पिक मार्ग, आला अधिकारियों ने लिया सुरक्षा व्यवस्था का जायजा

भागलपुर, 17 मई 2026। भागलपुर की लाइफलाइन और उत्तर व दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग विक्रमशिला सेतु पर यातायात को दोबारा चालू करने की प्रशासनिक और तकनीकी कवायद बेहद तेज हो गई है। सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने और आवागमन को सुरक्षित बनाने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की विशेष टीम दिन-रात युद्धस्तर पर काम कर रही है। शनिवार की देर शाम तक इस दिशा में एक बड़ी और महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई, जब पहले बेली ब्रिज का मुख्य ढांचा भौतिक रूप से खड़ा कर लिया गया। बीआरओ की तकनीकी कोर टीम के साथ काम कर रहे इंजीनियरों और पर्यवेक्षकों से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी पांच दिनों के भीतर पहला बेली ब्रिज पूरी तरह से निर्मित होकर अपनी विधिक संरचना प्राप्त कर लेगा। हालांकि, प्रशासनिक रूप से यह स्पष्ट किया गया है कि विक्रमशिला सेतु पर वाहनों का नियमित परिचालन तब तक शुरू नहीं कराया जा सकेगा, जब तक कि कुल तीन बेली ब्रिज का निर्माण पूरी तरह से संपन्न नहीं हो जाता। पहले ढांचे के सफलतापूर्व खड़े हो जाने से तकनीकी टीम का हौसला बढ़ा है और माना जा रहा है कि शेष दो स्लैबों पर बेली ब्रिज स्थापित करने में उम्मीद से काफी कम समय लगेगा।

बीआरओ का तकनीकी कौशल और तीन बेली ब्रिज की विधा

​विक्रमशिला सेतु के टूटे हुए हिस्से की विधिक मरम्मत के लिए बीआरओ की टीम अत्याधुनिक उपकरणों और लोहे के उच्च घनत्व वाले गर्डर्स का उपयोग कर रही है। वर्तमान समय में सबसे पहले सेतु के उस विशिष्ट हिस्से पर ध्यान केंद्रित किया गया है जहां का स्लैब पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। इस मुख्य हिस्से पर पहला बेली ब्रिज पांच दिनों में खड़ा हो जाने के बाद, सुरक्षा मानकों के तहत अगले दो पड़ोसी स्लैबों की भी गहराई से विधिक जांच की जाएगी।

​तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्य स्लैब के ढहने से आसपास के दो अन्य स्लैबों के आंतरिक ढांचे पर भी अत्यधिक यांत्रिक दबाव पड़ा है। इसी कारण सुरक्षा के दृष्टिकोण से उन दोनों स्लैबों के ऊपर भी दो अतिरिक्त बेली ब्रिज का निर्माण कराया जाना अनिवार्य है। जब तक ये तीनों अस्थाई लोहे के पुल आपस में पूरी तरह से विधिक रूप से जुड़ नहीं जाते, तब तक भारी या मध्यम वाहनों के भार को संभालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बीआरओ के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि पहले पुल के निर्माण से जो व्यावहारिक अनुभव और गति मिली है, उसका सीधा लाभ शेष दो पुलों के निर्माण में मिलेगा और पूरी परियोजना को तय समय-सीमा के भीतर समेट लिया जाएगा।

बरारी पुल घाट पर प्रशासनिक अमले की विधिक उपस्थिति और औचक निरीक्षण

​जैसे-जैसे पुल निर्माण का कार्य आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे गंगा नदी के दोनों छोरों पर यात्रियों की भारी भीड़ को नियंत्रित करने और उन्हें नावों के जरिए सुरक्षित पार कराने की प्रशासनिक चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इसी प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक जमीनी हकीकत को परखने के लिए शनिवार की शाम करीब 5:30 बजे जिले के शीर्ष अधिकारियों ने ग्राउंड जीरो का एक विस्तृत और औचक निरीक्षण किया। इस उच्चस्तरीय निरीक्षण दल में भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमोद कुमार यादव और अनुमंडलाधिकारी (एसडीओ) विकास कुमार मुख्य रूप से शामिल थे।

​अधिकारियों का यह काफिला सीधे बरारी पुल घाट पर पहुंचा, जहां वर्तमान में नावों का परिचालन किया जा रहा है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बेली ब्रिज निर्माण स्थल के समीप जाकर बीआरओ के मुख्य अभियंताओं से मुलाकात की और क्रेन व मशीनों के परिचालन की सुरक्षा कड़ियों की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि निर्माण कार्य की गति में तेजी लाने के साथ-साथ वहां काम कर रहे मजदूरों और सुरक्षा बलों के जीवन की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने एसएसपी प्रमोद कुमार यादव से चर्चा करते हुए निर्देश दिया कि निर्माण स्थल के आसपास आम लोगों की आवाजाही को पूरी तरह से विधिक रूप से प्रतिबंधित रखा जाए ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की गुंजाइश न रहे।

भीषण गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य शिविरों और मेडिकल विंग को कड़े निर्देश

​निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी का मुख्य ध्यान जेठ प्रक्षेत्र की इस चिलचिलाती धूप और भीषण उमस भरी गर्मी के बीच सफर करने वाले आम यात्रियों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर था। वर्तमान समय में पुल बंद होने के कारण हजारों यात्री नावों के जरिए बरारी घाट से नवगछिया की ओर आ-जा रहे हैं। नदी के खुले वातावरण में सीधी धूप और अत्यधिक तापमान के कारण यात्रियों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बनी रहती है।

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर जिलाधिकारी द्वारा जारी विधिक निर्देश:

  • दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता: बरारी पुल घाट पर स्थापित किए गए अस्थाई प्रशासनिक स्वास्थ्य शिविर में जीवन रक्षक दवाओं की प्रचुर मात्रा सुनिश्चित की जाए।
  • ओआरएस पैकेट्स का वितरण: गर्मी जनित विसंगतियों और डिहाइड्रेशन (जलाभाव) से निपटने के लिए शिविर में ओआरएस (ORS) के पैकेट्स पर्याप्त संख्या में रखे जाएं और आने-जाने वाले जरूरतमंद यात्रियों के बीच इसका विधिक वितरण कराया जाए।
  • कंट्रोल रूम से सतत अनाउंसमेंट: घाट पर बनाए गए पब्लिक एड्रेस सिस्टम (लाउडस्पीकर) के जरिए कंट्रोल रूम से लगातार यह अनाउंसमेंट (घोषणा) कराई जाए कि स्वास्थ्य शिविर कहां स्थित है और लोग आवश्यकता पड़ने पर वहां से विधिक चिकित्सा सहायता निःशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।
  • मेडिकल टीम की तत्परता: शिविर में प्रतिनियुक्त डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीज को तुरंत प्राथमिक उपचार देकर मायागंज अस्पताल रेफर किया जा सके।

नाविकों को लाइफ जैकेट की विधिक हिदायत और पटना से आपूर्ति का रोडमैप

​प्रशासनिक निरीक्षण के अंतिम चरण में अनुमंडलाधिकारी (एसडीओ) विकास कुमार ने बरारी पुल घाट से संचालित होने वाली सभी छोटी-बड़ी नावों के परिचालन नियमों की कड़ाई से समीक्षा की। सुरक्षा मानकों का उल्लंघन कर क्षमता से अधिक यात्रियों को नाव पर बैठाने वाले नाविकों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई। एसडीओ विकास कुमार ने सभी नाविकों को सख्त हिदायत जारी करते हुए कहा है कि प्रत्येक नाव पर यात्रियों की विधिक संख्या के अनुपात में पर्याप्त लाइफ जैकेट (जीवन रक्षक जैकेट) की उपलब्धता अनिवार्य होनी चाहिए। जो भी यात्री सुरक्षा कारणों से लाइफ जैकेट की मांग करते हैं, उन्हें नाविकों द्वारा तुरंत यह उपकरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

​इस विधिक विमर्श के दौरान कुछ स्थानीय नाविकों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी व्यावहारिक और वित्तीय समस्याओं को भी रखा। नाविकों ने बताया कि स्थानीय भागलपुर के बाजारों में अचानक लाइफ जैकेट्स की मांग बढ़ने के कारण इसकी उपलब्धता का एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है और उन्हें उचित मूल्य पर पर्याप्त संख्या में जैकेट्स नहीं मिल पा रहे हैं। नाविकों की इस व्यावहारिक समस्या को गंभीरता से लेते हुए एसडीओ विकास कुमार ने मौके पर ही सहानुभूतिपूर्वक विचार किया। उन्होंने नाविकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे इस संकट के निवारण के लिए राज्य मुख्यालय पटना के आपदा प्रबंधन विभाग से सीधे संपर्क साध रहे हैं, ताकि सरकारी स्तर पर थोक मात्रा में लाइफ जैकेट की आपूर्ति भागलपुर जिला प्रशासन को जल्द से जल्द सुनिश्चित कराई जा सके। इसके साथ ही उन्होंने नाविकों को यह विधिक निर्देश भी दिया कि वे स्वयं भी अपनी क्षमता के अनुसार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध लाइफ जैकेट की खरीद तुरंत पूरी कर लें, क्योंकि यात्रियों के जीवन की सुरक्षा के विधा में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या व्यक्तिगत शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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