बिहार में ‘सम्राट मॉडल’ का आगाज: रामधनी यादव के एनकाउंटर पर जेडीयू की दोटूक, अब पैर नहीं सीधे कलेजे पर चलेगी ‘फटाफट’ गोली; अपराधियों को संभलने की आखिरी चेतावनी

भागलपुर/पटना। बिहार की धरती पर सुशासन के इकबाल को चुनौती देने वाले अपराधियों के खिलाफ अब नीति और नियति दोनों बदल चुकी हैं। भागलपुर के सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय के भीतर घुसकर जांबाज कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) कृष्ण भूषण कुमार की हत्या करने वाले मास्टरमाइंड रामधनी यादव को पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर यमराज के पास भेज दिया है। इस एनकाउंटर ने बिहार की सियासत में ‘सम्राट मॉडल’ की एक ऐसी बहस छेड़ दी है, जिसने अपराधियों की रूह कंपा दी है। बुधवार, 29 अप्रैल 2026 की सुबह हुई इस मुठभेड़ पर सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने अपना अब तक का सबसे आक्रामक रुख अख्तियार किया है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अपराधी अपनी खैर मना लें, क्योंकि पुलिस की बंदूकों का रुख अब केवल आत्मरक्षा के लिए नहीं, बल्कि आतंक के पूर्ण खात्मे के लिए मुड़ चुका है। जेडीयू के कड़े बयान ने यह साफ कर दिया है कि बिहार में अब ‘ठोक दो’ की नीति प्रभावी हो गई है और पुलिस पर हाथ डालने वालों का हश्र रामधनी यादव जैसा ही होगा।

‘पैर’ का जमाना गया, अब ‘कलेजे’ की बारी: जेडीयू का रौद्र रूप

​सुल्तानगंज गोलीकांड के मास्टरमाइंड रामधनी यादव के एनकाउंटर के बाद जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य (MLC) नीरज कुमार ने जो बयान दिया है, उसने अपराधियों के साथ-साथ विपक्षी खेमे में भी खलबली मचा दी है। नीरज कुमार ने कहा कि रामधनी यादव को अपराध का ऐसा ‘सनक’ चढ़ गया था कि उसे न तो कानून का डर रहा और न ही मानवीय संवेदनाओं का ख्याल। उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि लोकतंत्र में जनता के द्वारा चुने गए सभापति पर गोलियों की बौछार करना और एक निहत्थे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की जान लेना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​नीरज कुमार ने पुलिसिया कार्रवाई का बचाव करते हुए एक बड़ा नीतिगत बदलाव संकेत दिया। उन्होंने कहा, “बिहार में कानून का राज है और इसे चुनौती देने वालों को अब उनकी भाषा में ही जवाब मिलेगा। अभी तक तो अपराधियों के पैर में गोली लग रही थी, लेकिन अगर वे पुलिस पर हमला करने की जुर्रत करेंगे, तो अब कलेजे पर फटाफट गोली चलेगी।” जेडीयू प्रवक्ता का यह ‘कलेजा और फटाफट’ वाला मुहावरा अब बिहार की नई क्राइम पॉलिसी के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अपराधियों का अंजाम अब केवल कड़ा ही नहीं होगा, बल्कि ऐसा होगा जिसे आने वाले दशकों तक एक खौफनाक नजीर के रूप में याद रखा जाएगा।

अपराध का ‘सनक’ और मासूमों के आंसू: एनकाउंटर के पीछे का दर्द

​प्रशासनिक गलियारों में इस समय शहीद ईओ कृष्ण भूषण कुमार की जांबाजी की चर्चा है, लेकिन उनके परिवार का विलाप सत्ता के गलियारों में गुस्से की लहर पैदा कर रहा है। जेडीयू ने इस मानवीय पक्ष को उठाते हुए कहा कि जो लोग मानवाधिकारों की दुहाई देते हैं, उन्हें कृष्ण भूषण के मासूम बच्चों और रोती हुई पत्नी के आंसू नहीं दिखते। रामधनी यादव जैसे अपराधी, जिन्हें हत्या और आतंक का नशा चढ़ चुका था, वे समाज के लिए कैंसर बन चुके थे।

​बताया जाता है कि रामधनी यादव का आपराधिक इतिहास इतना वीभत्स था कि वह पहले भी कई नरसंहारों और जघन्य हत्याओं में शामिल रहा था। उसके भीतर कानून का डर पूरी तरह खत्म हो चुका था। जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर से सुल्तानगंज की सत्ता और संसाधनों पर कब्जा करने के लिए खूनी साजिश रची। मंगलवार की शाम उसने जो किया, वह उसके ‘सनक’ की पराकाष्ठा थी। जेडीयू ने स्पष्ट किया कि जब अपराधी सनकी हो जाए, तो समाज की रक्षा के लिए पुलिस का आक्रामक होना अनिवार्य हो जाता है।

12 घंटे का न्याय और ‘सम्राट मॉडल’ की गूँज

​बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कड़े रुख को अब ‘सम्राट मॉडल’ कहा जाने लगा है। सुल्तानगंज की घटना के महज 12 घंटे के भीतर मास्टरमाइंड का खात्मा होना इस मॉडल की पहली बड़ी सफलता मानी जा रही है। मंगलवार शाम करीब 4 बजे वारदात हुई और बुधवार सुबह तड़के ही रामधनी यादव को उसके किए की सजा मिल गई।

​पुलिस ने जब रामधनी को हथियार बरामदगी के लिए घेरा, तो उसने आत्मसमर्पण करने के बजाय अपने सहयोगियों के साथ मिलकर पुलिस टीम पर ही गोलियां चला दीं। इस मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में रामधनी ढेर हो गया। जेडीयू के अनुसार, यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि बिहार पुलिस अब अपराधियों के पीछे भागने के बजाय उन्हें उनके अंजाम तक पहुँचाने में सक्षम है। सरकार ने साफ संकेत दे दिया है कि वर्दी पर लगने वाला हर दाग अब अपराधियों के खून से ही धुलेगा।

विपक्ष के सवालों पर जेडीयू का कड़ा प्रहार

​सुल्तानगंज कांड के बाद विपक्ष ने सरकार को सुरक्षा व्यवस्था पर घेरा था, लेकिन एनकाउंटर के बाद विपक्ष की बोलती बंद नजर आ रही है। जेडीयू ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग ‘जंगलराज’ के पुरोधा रहे हैं, उन्हें पुलिसिया इकबाल पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। नीरज कुमार ने कहा कि कुछ लोग अपराधियों के मानवाधिकारों की बात करते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि समाज की सुरक्षा सबसे बड़ा अधिकार है।

​पार्टी का कहना है कि सुल्तानगंज में जो हुआ वह एक प्रशासनिक अधिकारी की शहादत थी और सरकार अपने अधिकारियों का मनोबल गिरने नहीं देगी। यदि अधिकारी अपनी ड्यूटी के दौरान शहीद होंगे, तो सरकार अपराधियों के साथ कोई नरमी नहीं बरतेगी। जेडीयू ने यह संदेश भी दिया कि यह एनकाउंटर उन तमाम टेंडर माफियाओं और वर्चस्व की लड़ाई लड़ने वाले गिरोहों के लिए एक सबक है जो सरकारी तंत्र को अपनी जागीर समझते हैं।

सुल्तानगंज से पटना तक हाई-अलर्ट: अपराधियों की घेराबंदी तेज

​रामधनी यादव के अंत के बाद भागलपुर पुलिस अब उसके गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में है। जेडीयू ने भरोसा दिलाया है कि इस हत्याकांड की साजिश में शामिल एक-एक शख्स को खोज निकाला जाएगा। “कलेजे पर गोली” वाला बयान केवल एक नेता की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सरकार के बदले हुए तेवरों की आधिकारिक घोषणा मानी जा रही है।

​सुल्तानगंज नगर परिषद की उपाध्यक्ष नीलम देवी के पति होने के नाते रामधनी को लगता था कि उसकी राजनैतिक पहुंच उसे बचा लेगी, लेकिन कानून ने उसे यह समझा दिया कि सत्ता का संरक्षण अब अपराध के लिए उपलब्ध नहीं है। पूरे बिहार के नगर निकायों में इस कार्रवाई के बाद एक तरफ जहाँ सुरक्षा की मांग तेज है, वहीं अपराधियों के बीच यह दहशत फैल गई है कि अब पुलिस केवल ‘पकड़ती’ नहीं है, बल्कि ‘हिसाब’ भी चुकता करती है।

एक नजीर जो बदलेगी बिहार का भविष्य

​भागलपुर का यह एनकाउंटर आने वाले समय में बिहार की कानून-व्यवस्था के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। जेडीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, यदि वह पुलिस पर गोली चलाएगा, तो उसे ‘फटाफट’ मौत की सजा मिलेगी। यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए भी एक आश्वासन है जो अपनी जान जोखिम में डालकर ड्यूटी करते हैं।

​कृष्ण भूषण कुमार की जांबाजी ने जहाँ अपराधियों को अचंभे में डाल दिया था, वहीं पुलिस के एनकाउंटर ने उस जांबाजी को एक सम्मानजनक निष्कर्ष दिया है। बिहार की सम्राट सरकार अब इस ‘एक्शन मोड’ को राज्य के अन्य जिलों में भी लागू करने की तैयारी में है। भागलपुर पुलिस की इस सक्रियता ने यह साबित कर दिया है कि अपराध का ‘सनक’ यदि अपराधियों के सिर चढ़कर बोलता है, तो कानून का डंडा भी उनके अंत का कारण बनता है। अब 7 मई की सुनवाई और अन्य जांचों में कई और सफेदपोशों के बेनकाब होने की उम्मीद है।

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