सुल्तानगंज के ऑटो चालक ने पत्नी के दुपट्टे से लगाया फंदा, इलाज के दौरान मायागंज अस्पताल में मौत; शादी को हुए थे महज दो महीने

भागलपुर, 19 मई 2026। भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रक्षेत्र से पारिवारिक अवसाद, आर्थिक तंगी और सामाजिक विसंगतियों से जुड़ा एक अत्यंत दुखद और हृदयविदारक मामला सामने आया है। यहाँ एक 28 वर्षीय ऑटो चालक ने बीते रविवार की देर रात अपने ही कमरे के भीतर पत्नी के दुपट्टे का फंदा बनाकर पंखे से लटककर खुदकुशी (आत्महत्या) कर ली। घटना के तुरंत बाद जब परिजनों को इसकी जानकारी मिली, तो वे फंदे को काटकर युवक को अत्यंत गंभीर अवस्था में इलाज के लिए जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज अस्पताल) लेकर भागे। प्रक्षेत्र के डॉक्टरों ने आपातकालीन प्रणालियों के तहत उसे बचाने का कड़ा प्रयास किया, परंतु इलाज के दौरान अस्पताल में ही युवक ने दम तोड़ दिया। इस असमय मौत के बाद मृतक के परिजनों और सुल्तानगंज स्थित उसके पैतृक गांव में कोहराम मचा हुआ है। सोमवार को पुलिस की उपस्थिति में शव का विधिक पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है।

कमरे में खाना परोसने के बाद छत पर गई थी पत्नी, नीचे लौटते ही खुला खौफनाक सच

​इस दुखद घटनाक्रम के संदर्भ में सोमवार को बरारी पुलिस कैंप की उपस्थिति में शव का विधिक पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान मृतक की 19 वर्षीय पत्नी साक्षी कुमारी ने पुलिस के समक्ष अपना आधिकारिक फर्दबयान (लिखित आवेदन) दर्ज कराया है। साक्षी द्वारा प्रस्तुत किए गए विलेखों के अनुसार:

  • समय और अवस्थिति: बीते रविवार की रात करीब 09:00 बजे वह अपने पति रोशन कुमार के साथ निजी कमरे में भौतिक रूप से मौजूद थी।
  • अंतिम संवाद: पति द्वारा रात्रि भोजन की मांग किए जाने पर साक्षी ने पूरी आत्मीयता के साथ बेड (पलंग) पर ही खाना परोस कर दे दिया।
  • घटना का क्रम: इसके कुछ देर बाद वह अपने ससुर को भोजन देने के उद्देश्य से छत पर बने प्रभाग में चली गई। जब वह नीचे वापस लौटी, तो उसने देखा कि कमरे का मुख्य दरवाजा अंदर से पूरी कड़ाई के साथ बंद था।
  • खिड़की से दिखा खौफनाक मंजर: अनहोनी की आशंका को देखते हुए जब साक्षी ने कमरे की खिड़की के संरेखण से भीतर झांका, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई; उसका पति रोशन पंखे के हुक से दुपट्टे के सहारे झूल रहा था। इसके बाद शोर मचाने पर जुटे स्थानीय पड़ोसियों की मदद से कड़े प्रयास कर दरवाजा तोड़ा गया और रोशन को नीचे उतारकर इलाज के लिए मायागंज अस्पताल ले जाया गया।

वट सावित्री की मेहंदी भी नहीं छूटी थी, दो माह पूर्व ही हुई थी अरेंज मैरेज

​इस संपूर्ण घटनाक्रम का सबसे संवेगात्मक और कारुणिक कोण यह है कि मृतक रोशन कुमार की शादी को अभी महज दो महीने का ही संक्षिप्त समय बीता था। बीते मार्च महीने में ही रोशन की अरेंज मैरेज (पारिवारिक सहमति से विवाह) बांका जिले के अमरपुर प्रक्षेत्र की रहने वाली साक्षी कुमारी के साथ कड़े पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत संपन्न हुई थी।

​अस्पताल परिसर में पति के शव से लिपटकर दहाड़ मारकर रोती पीड़ित पत्नी साक्षी ने बताया कि रोशन पिछले तीन दिनों से किसी अज्ञात आंतरिक बात को लेकर मानसिक रूप से अत्यधिक परेशान और तनाव में संधारित थे। वे बाहर की कोई भी बात या तनाव घर में साझा नहीं करते थे। दोनों के बीच व्यक्तिगत तौर पर कभी कोई विवाद या नोकझोंक नहीं हुई थी। साक्षी ने बताया कि अभी दो दिन पहले ही उसने पति की लंबी आयु के लिए कड़े नियमों के साथ वट सावित्री की विधिक पूजा संपन्न की थी, जिसके हाथों की मेहंदी का रंग भी अभी ठीक से नहीं छूटा था कि वैवाहिक जीवन के शुरुआती दौर में ही उसका सुहाग उजड़ गया।

गहन विश्लेषण: सूखे नशे की लत, आर्थिक तंगी और पिता की डांट बनी खुदकुशी की वजह

​इस दुखद सुसाइड केस के पीछे छिपे कड़वे सामाजिक सच और बुनियादी कारणों का तकनीकी विश्लेषण करने पर ‘नशे की लत’ का एक भयानक चेहरा सामने आता है। पारिवारिक सूत्रों और स्थानीय जांच इनपुट्स के अनुसार:

  • सूखे नशे का पुराना आदी: मृतक रोशन कुमार (28), जो सुल्तानगंज के शिवनंदनपुर निवासी घनश्याम यादव का पुत्र था, वह पिछले काफी समय से ‘सूखे नशे’ (ब्राउन शुगर या स्मैक जैसे घातक मादक पदार्थों) के चंगुल में पूरी तरह फंस चुका था।
  • सुधार के लिए कराई थी शादी: घर वालों ने इस उम्मीद और विन्यास के साथ मार्च में उसकी अरेंज मैरेज कराई थी कि वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियां आने के बाद शायद उसके आचरण और आदतों में कोई सकारात्मक सुधार दर्ज होगा।
  • गंभीर आर्थिक तंगी का चक्रव्यूह: विवाह के उपरांत भी रोशन की सूखे नशे की लत पूरी तरह ब्लॉक नहीं हो सकी। वह दिन भर ऑटो चलाकर जो भी आंशिक पूंजी कमाता था, वह अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं को पूरा करने के बजाय नशे की विसंगतियों में ही खर्च (स्वाहा) कर देता था, जिसके कारण पूरा घर गंभीर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा था।
  • पिता की डांट से उपजा अवसाद: घटना से ठीक तीन दिन पहले, लगातार बढ़ती आर्थिक तंगी और नशे की डिफाल्टर प्रवृत्तियों को लेकर रोशन के पिता घंस्याम यादव ने उसे कड़े शब्दों में डांट लगाई थी और फटकार लगाई थी। पिता की इसी डांट और नशे की लत से उपजे मानसिक तनाव को रोशन बर्दाश्त नहीं कर सका और उसने अपनी जीवन लीला को विराम दे दिया। सुल्तानगंज थाना पुलिस पत्नी के बयान के आधार पर विधिक यूडी (Unnatural Death) केस दर्ज कर आगे की जांच मुकम्मल करने में जुटी है।
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