प्रेम विवाह से टूट गया परिवार का रिश्ता, सौतेली बेटी की बात से आहत महिला ने खाया जहर, इलाज के दौरान हुई मौत

बिहार के बांका जिले से एक बेहद भावुक और दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां पारिवारिक रिश्तों में आई दरार ने एक महिला की जान ले ली। बताया जा रहा है कि सौतेली बेटी द्वारा प्रेम विवाह किए जाने और उसके बाद हुई बातचीत से आहत होकर एक महिला ने जहरीला पदार्थ खा लिया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे परिवार में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

घटना बांका जिले के अमरपुर थाना क्षेत्र स्थित कोहिंडा गांव की बताई जा रही है। मृत महिला की पहचान 45 वर्षीय रीना देवी के रूप में हुई है। वह अपने परिवार के साथ गांव में रहती थीं। परिजनों के अनुसार, परिवार में पिछले कुछ दिनों से बेटी के प्रेम विवाह को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई थी। इसी तनाव के बीच महिला ने यह कदम उठा लिया।

जानकारी के अनुसार, रीना देवी को जहरीला पदार्थ खाने के बाद पहले अमरपुर रेफरल अस्पताल ले जाया गया था। वहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए भागलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज अस्पताल) रेफर कर दिया। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार के लोग अस्पताल पहुंच गए, जहां मातम का माहौल बन गया।

परिवार के सदस्यों ने बताया कि रीना देवी पिछले कई वर्षों से अपनी सौतेली बेटी की परवरिश कर रही थीं। परिवार के अनुसार, उन्होंने बेटी को बचपन से अपने बच्चों की तरह पाला-पोसा और उसकी शिक्षा-दीक्षा का भी पूरा ध्यान रखा। इसी कारण वह बेटी से भावनात्मक रूप से काफी जुड़ी हुई थीं।

प्रेम विवाह से टूट गया परिवार का रिश्ता, सौतेली बेटी की बात से आहत महिला ने खाया जहर, इलाज के दौरान हुई मौत

परिजनों के मुताबिक, मृतका के पति मोहन दास की पहली पत्नी का निधन वर्ष 2002 में प्रसव के दौरान हो गया था। पहली पत्नी से उन्हें एक बेटी हुई थी। बाद में उन्होंने रीना देवी से दूसरी शादी की। दूसरी शादी के बाद परिवार में तीन बेटों का जन्म हुआ। हालांकि रीना देवी ने पहली पत्नी की बेटी को भी अपने बच्चों की तरह ही पाला और उसकी देखभाल की।

बताया जा रहा है कि 19 वर्षीय युवती एक युवक से प्रेम करती थी। परिवार को इसकी जानकारी नहीं थी। कुछ दिनों पहले वह अपने प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली गई और बाद में दोनों ने विवाह कर लिया। इस घटना के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया। विशेष रूप से रीना देवी इस बात को लेकर काफी परेशान रहने लगी थीं।

परिवार वालों का कहना है कि बेटी के घर छोड़कर जाने के बाद रीना देवी लगातार उससे संपर्क करने का प्रयास कर रही थीं। वह यह जानना चाहती थीं कि उसने बिना परिवार की सहमति के ऐसा कदम क्यों उठाया। कई बार फोन करने के बावजूद बातचीत नहीं हो पा रही थी। जब आखिरकार दोनों के बीच संपर्क हुआ, तो बातचीत के दौरान ऐसी बातें हुईं, जिसने महिला को गहरे मानसिक आघात में डाल दिया।

परिजनों के अनुसार, बातचीत के दौरान रीना देवी ने बेटी से कहा था कि उन्होंने उसे बचपन से पाल-पोसकर बड़ा किया है और परिवार की इज्जत तथा रिश्तों का भी ध्यान रखना चाहिए था। आरोप है कि जवाब में बेटी ने ऐसी बातें कहीं, जिससे महिला बेहद आहत हो गईं। इसके बाद वह मानसिक रूप से टूट गईं और उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि घटना के बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। महिला की मौत के बाद परिवार के तीनों बेटे और अन्य परिजन गहरे सदमे में हैं। गांव में भी इस घटना की चर्चा हो रही है और लोग इसे पारिवारिक संवाद की कमी और भावनात्मक तनाव का परिणाम बता रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, रीना देवी अपने परिवार और बच्चों के प्रति बेहद समर्पित थीं। उन्होंने वर्षों तक पूरे परिवार को संभाला और बेटी की परवरिश में भी कोई कमी नहीं छोड़ी। यही कारण है कि बेटी के इस फैसले और बाद की परिस्थितियों ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया।

मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि परिवार के भीतर उत्पन्न भावनात्मक तनाव कई बार लोगों को मानसिक रूप से बेहद कमजोर बना देता है। ऐसे मामलों में संवाद और भावनात्मक सहयोग की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। जब किसी व्यक्ति को लगता है कि उसकी भावनाओं की अनदेखी की जा रही है, तो वह गहरे अवसाद और निराशा का शिकार हो सकता है।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बदलते सामाजिक परिवेश में परिवारों के भीतर संवाद कितना आवश्यक है। प्रेम विवाह, पीढ़ियों के बीच सोच का अंतर और पारिवारिक अपेक्षाओं के टकराव जैसी परिस्थितियां कई बार गंभीर विवादों का रूप ले लेती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में भावनात्मक संतुलन और परामर्श की जरूरत होती है ताकि किसी भी प्रकार की दुखद स्थिति से बचा जा सके।

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की तैयारी की गई और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले किन परिस्थितियों में महिला ने यह कदम उठाया।

गांव के लोगों का कहना है कि यह घटना पूरे समाज के लिए एक सीख है। रिश्तों में संवाद की कमी और भावनात्मक दूरी कभी-कभी ऐसे दर्दनाक परिणामों का कारण बन सकती है। परिवार के लोग अभी भी इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं और घर में शोक का माहौल बना हुआ है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, जबकि परिजन महिला की मौत से टूट चुके हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि पारिवारिक रिश्तों में संवेदनशीलता, संवाद और आपसी समझ कितनी महत्वपूर्ण होती है। एक निर्णय और उससे उपजे भावनात्मक तनाव ने पूरे परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है।

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