
भागलपुर समाहरणालय में मंगलवार को जिला पदाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में दर्ज SC/ST अत्याचार से जुड़े मामलों की प्रगति, पीड़ितों को दी जा रही सहायता राशि, लंबित मामलों की स्थिति और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोगों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में त्वरित न्याय मिले तथा सरकार द्वारा निर्धारित सभी लाभ समय पर पीड़ितों तक पहुंच सकें। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस कानून के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए सभी संबंधित विभागों को संवेदनशील और जवाबदेह बनना होगा।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक SC/ST Act के अंतर्गत आवंटित राशि से कुल 83 पीड़ितों एवं आश्रितों को मुआवजा राशि प्रदान की जा चुकी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्रशासन प्रभावित परिवारों को आर्थिक राहत उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। अधिकारियों ने बताया कि राहत राशि का भुगतान नियमों के अनुसार और निर्धारित समयसीमा के भीतर किया जा रहा है, ताकि पीड़ित परिवारों को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि चालू वर्ष में अब तक अधिनियम के तहत कुल 50 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इन सभी मामलों में पीड़ितों और आश्रितों को अधिनियम की संबंधित धाराओं के अनुरूप अनुमन्य मुआवजा राशि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जिला पदाधिकारी ने इस कार्य में और तेजी लाने का निर्देश दिया ताकि किसी भी पीड़ित को राहत के लिए अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि SC/ST Act के तहत कुल 48 आश्रितों को अनुमन्य पेंशन राशि का भुगतान प्रतिमाह नियमित रूप से किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि पेंशन भुगतान व्यवस्था को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे लाभार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बैठक में अधिनियम के नियम 15(1)(घ) के अंतर्गत दर्ज हत्या के मामलों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि अब तक ऐसे दो मामलों में मृतक के आश्रितों को सरकारी नौकरी का लाभ दिया गया है। जिला प्रशासन ने इसे पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि गंभीर मामलों में पीड़ित परिवारों को दी जाने वाली सहायता हर हाल में समय पर सुनिश्चित की जाएगी।
जिला पदाधिकारी ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया कि SC/ST Act का किसी भी स्तर पर दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने जांच अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक मामले की निष्पक्ष, संवेदनशील और गहन जांच की जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि जिन मामलों में आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हों, उनमें जल्द कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बैठक में उपस्थित SC/ST Act के नोडल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की जांच और अनुसंधान कार्य पर लगातार निगरानी रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी मामले में लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ पीड़ितों की शिकायत सुनने और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक में लंबित मामलों को लेकर भी चिंता जताई गई। जानकारी के अनुसार, वर्तमान में कुल 287 मामले ऐसे हैं जिनमें न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जाना लंबित है। जिला पदाधिकारी ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन मामलों में तेजी से अनुसंधान पूरा कर आरोप पत्र न्यायालय में समर्पित किया जाए। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी पीड़ितों के लिए अतिरिक्त मानसिक और सामाजिक बोझ बनती है, इसलिए सभी लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन आवश्यक है।
बैठक में विशेष लोक अभियोजक एवं संबंधित पुलिस अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि जघन्य प्रकृति के मामलों में स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित कराने के लिए आवश्यक प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर न्यायालय में उपलब्ध कराया जाए। प्रशासन का मानना है कि गंभीर अपराधों में त्वरित सुनवाई से पीड़ितों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा।
इसके अतिरिक्त, समिति के गैर-सरकारी सदस्यों ने अनुसूचित जाति समुदाय में बढ़ते सूखे नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। इस विषय पर जिला पदाधिकारी ने जिला कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया कि प्रभावित क्षेत्रों और अनुसूचित जाति बहुल टोलों में जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएं। इन शिविरों के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों और सामाजिक नुकसान के बारे में जानकारी दी जाएगी।
बैठक के अंत में जिला प्रशासन ने दोहराया कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि अत्याचार से जुड़े प्रत्येक मामले में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस समीक्षा बैठक से स्पष्ट संदेश गया कि भागलपुर प्रशासन SC/ST Act के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर गंभीर है और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है।


