
पटना। बिहार के हवाई नेटवर्क में एक क्रांतिकारी विस्तार की दिशा में राज्य सरकार ने ठोस कदम बढ़ा दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली कैबिनेट के हालिया फैसलों को अमली जामा पहनाते हुए नागरिक विमानन विभाग ने दो नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के विकास हेतु महत्वपूर्ण प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। भागलपुर के अजगैबीनाथ धाम (सुल्तानगंज) और सारण जिले के सोनपुर में प्रस्तावित इन अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए आधिकारिक तौर पर एजेंसी का चयन कर लिया गया है। विभाग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित तकनीकी एजेंसी राइट्स लिमिटेड (M/s RITES Ltd) को इस कार्य के लिए कार्य आवंटित किया गया है। इस रणनीतिक कदम से न केवल अंग जनपद और उत्तर बिहार के बीच की दूरी सिमटेगी, बल्कि राज्य के पर्यटन और औद्योगिक विकास को वैश्विक स्तर पर एक नई रफ़्तार मिलेगी।
वित्तीय आवंटन और एजेंसी का चयन
नागरिक विमानन विभाग ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के प्रारंभिक चरण के लिए वित्तीय संसाधनों की मंजूरी दे दी है। विभाग के अपर सचिव अखिलेश कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निविदा प्रक्रिया के आधार पर राइट्स लिमिटेड का चयन किया गया है।
परियोजना के वित्तीय और तकनीकी पहलुओं का विवरण इस प्रकार है:
- परामर्श शुल्क: राइट्स लिमिटेड को परामर्श शुल्क के रूप में ₹5,06,22,000 (पांच करोड़ छह लाख बाईस हजार रुपये) की राशि का भुगतान किया जाएगा।
- टैक्स विवरण: इस स्वीकृत राशि में जी.एस.टी. (GST) का हिस्सा भी सम्मिलित है।
- चयन प्रक्रिया: यह आवंटन पूरी तरह से पारदर्शी निविदा (Tender) प्रक्रिया के आधार पर किया गया है।
राइट्स लिमिटेड की भूमिका: मास्टर प्लान से ‘इन-प्रिंसिपल’ अप्रूवल तक
चयनित एजेंसी राइट्स लिमिटेड को केवल एक रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे हवाई अड्डों के धरातल पर उतरने तक की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
एजेंसी द्वारा निष्पादित किए जाने वाले प्रमुख कार्य:
- मास्टर प्लान और रिपोर्ट: दोनों ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान और आवश्यक तकनीकी प्रतिवेदन तैयार करना।
- केंद्र से स्वीकृति: भारत सरकार के नागरिक विमानन मंत्रालय (MoCA) से इन हवाई अड्डों के लिए ‘In Principle approval’ (सैद्धांतिक सहमति) प्राप्त करना।
- निविदा प्रबंधन: निर्माण कार्य शुरू करने के लिए निविदा प्रक्रियाओं का संचालन और उनका प्रबंधन करना।
- परामर्श सहयोग: विभाग को समस्त प्रक्रियाओं में आवश्यक तकनीकी और प्रबंधकीय परामर्श प्रदान करना।
अजगैबीनाथ धाम (भागलपुर): अंग जनपद के लिए नया ‘टेक-ऑफ’
भागलपुर में हवाई अड्डे का सपना दशकों पुराना है। वर्तमान में यहाँ एक छोटा हवाई अड्डा मौजूद है, लेकिन बड़े विमानों के परिचालन के लिए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम को इस परियोजना के लिए चुनना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
यह स्थान धार्मिक और भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- धार्मिक पर्यटन: उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर स्थित अजगैबीनाथ धाम से ही श्रावणी मेले की शुरुआत होती है। यहाँ हवाई अड्डा बनने से देश-विदेश के श्रद्धालुओं को सुगम यात्रा की सुविधा मिलेगी।
- सिल्क और कृषि व्यापार: भागलपुर का तसर रेशम और कतरनी चावल अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अधिक तेजी से पहुँच सकेगा।
- पर्यटन विकास: विक्रमशिला के खंडहर और डॉल्फिन अभयारण्य तक वैश्विक पर्यटकों की पहुँच आसान होगी।
सोनपुर (सारण): उत्तर बिहार की नई लाइफलाइन
सोनपुर न केवल ऐतिहासिक हरिहर क्षेत्र मेले के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह उत्तर और मध्य बिहार के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क बिंदु भी है। यहाँ ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का निर्माण पूरे सारण प्रमंडल और तिरहुत के कुछ हिस्सों के लिए वरदान साबित होगा।
इस स्थान के चयन के पीछे के मुख्य कारण:
- सोनपुर मेला: एशिया के सबसे बड़े पशु मेले के दौरान विदेशी पर्यटकों की भारी भीड़ यहाँ पहुँचती है।
- पटना पर दबाव कम करना: पटना एयरपोर्ट पर बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए सोनपुर एक आदर्श विकल्प (Alternative) के रूप में उभरेगा।
- कनेक्टिविटी: यहाँ से मुजफ्फरपुर, छपरा और हाजीपुर जैसे व्यापारिक केंद्रों तक पहुँचना अत्यंत सुलभ होगा।
ग्रीनफील्ड बनाम ब्राउनफील्ड: क्यों खास है यह चुनाव?
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राउनफील्ड (पुराने हवाई अड्डे का विस्तार) के मुकाबले ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के कई फायदे होते हैं। एक नई जमीन पर हवाई अड्डा विकसित करने से मास्टर प्लान को भविष्य की 50 वर्षों की जरूरतों के अनुसार बनाया जा सकता है। इसमें रनवे की लंबाई, अत्याधुनिक एटीसी टावर और कार्गो सुविधाओं के लिए पर्याप्त स्थान होता है। सरकार का राइट्स लिमिटेड जैसी संस्था को मास्टर प्लान की जिम्मेदारी देना यह सुनिश्चित करता है कि ये हवाई अड्डे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होंगे।
विकसित बिहार की मजबूत उड़ान
22 अप्रैल 2026 को जारी यह प्रेस नोट केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों लोगों के विश्वास का प्रतिबिंब है जो बिहार को एक आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर वाले राज्य के रूप में देखना चाहते हैं। ₹5.06 करोड़ की यह प्रारंभिक राशि उस नींव का पत्थर है, जिस पर आने वाले वर्षों में बिहार की आर्थिक समृद्धि की इमारत खड़ी होगी। अखिलेश कुमार सिंह (अपर सचिव) के नेतृत्व में विभाग अब इस परियोजना की ‘डेडलाइन’ को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहा है। अब सबकी नजरें राइट्स लिमिटेड द्वारा तैयार किए जाने वाले मास्टर प्लान पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि भागलपुर और सोनपुर के आसमान में पहली कमर्शियल फ्लाइट कब उड़ान भरेगी।


