पशुपतिनाथ धाम यात्रा: भागलपुर से काठमांडू के लिए श्रद्धालुओं का जत्था रवाना; पंचमुखी हनुमान दरबार में गूंजे जयकारे

भागलपुर। अंग जनपद की आध्यात्मिक ऊर्जा और शिव भक्ति की गूंज अब हिमालय की तराई में बसे नेपाल के काठमांडू तक पहुँचने वाली है। रेशम नगरी भागलपुर के श्रद्धालुओं के लिए शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 की सुबह एक नए धार्मिक संकल्प की साक्षी बनी। ‘महाकालदर्शन.इन’ संस्था के तत्वावधान में आयोजित नेपाल स्थित भगवान पशुपतिनाथ मंदिर की विशेष यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। शहर के कैंप जेल, जबारीपुर स्थित सुप्रसिद्ध पंचमुखी हनुमान दरबार से श्रद्धालुओं का एक विशाल जत्था पूरे उत्साह, उमंग और अटूट भक्ति भाव के साथ रवाना हुआ। यह यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं है, बल्कि यह दो देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु और आस्था के गहरे जुड़ाव का प्रतीक है। जबारीपुर के इस पावन परिसर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा और ‘हर-हर महादेव’ व ‘जय पशुपतिनाथ’ के जयकारों से पूरा इलाका शिवमय हो गया।

भक्ति और अनुष्ठान के बीच मंगल प्रस्थान

​यात्रा के प्रस्थान से पहले पंचमुखी हनुमान दरबार मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। जत्थे में शामिल होने वाले यात्रियों ने भगवान हनुमान और महादेव का आशीर्वाद लिया ताकि उनकी यह लंबी यात्रा निर्विवाद और सुखद संपन्न हो सके। मंदिर के पुजारियों द्वारा मंगल कामना के मंत्रोच्चार किए गए और यात्रियों को तिलक लगाकर विदा किया गया।

​श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था; कई बुजुर्ग और युवा पहली बार इस अंतरराष्ट्रीय धार्मिक यात्रा का हिस्सा बन रहे हैं। जबारीपुर का यह मंदिर परिसर उस समय भावुक और उत्साहपूर्ण क्षणों का गवाह बना जब स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं के साथ जत्थे का अभिनंदन किया। यात्रियों के अनुसार, पशुपतिनाथ के दर्शन की अभिलाषा उनके मन में लंबे समय से थी, जो अब इस सुव्यवस्थित आयोजन के माध्यम से साकार हो रही है।

निशुल्क यात्रा का उपहार: लकी ड्रॉ ने बढ़ाया रोमांच

​इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता और आकर्षण का केंद्र पूर्व निर्धारित ‘लकी ड्रॉ’ का आयोजन रहा। महाकालदर्शन.इन संस्था ने सामाजिक सरोकार और उन भक्तों के प्रति संवेदना दिखाते हुए, जो आर्थिक कारणों से ऐसी लंबी यात्राओं पर नहीं जा पाते, एक विशेष योजना चलाई थी। यात्रा प्रस्थान से ठीक पहले मंदिर परिसर में ही सभी उपस्थित लोगों के बीच लकी ड्रॉ निकाला गया।

​इस प्रक्रिया में 5 भाग्यशाली श्रद्धालुओं का चयन किया गया, जिन्हें पशुपतिनाथ धाम की यह पूरी यात्रा पूर्णतः निशुल्क (मुफ्त) कराई जा रही है। लकी ड्रॉ में जैसे ही विजेताओं के नामों की घोषणा हुई, पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। चयनित लाभार्थियों की आँखों में खुशी के आंसू साफ देखे जा सकते थे। संस्था की इस पहल की स्थानीय स्तर पर काफी सराहना हो रही है, क्योंकि इसने भक्ति के मार्ग में आर्थिक बाधाओं को दूर करने का एक सफल उदाहरण पेश किया है।

पशुपतिनाथ मंदिर की महिमा और यात्रा का महत्व

​नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के किनारे स्थित भगवान पशुपतिनाथ का मंदिर हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और प्राचीन मंदिरों में से एक माना जाता है। यह मंदिर न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि अपनी वास्तुकला और आध्यात्मिक आभा के लिए विश्व प्रसिद्ध है। भागलपुर से रवाना हुए इस जत्थे के लिए यह दर्शन विशेष महत्व रखता है क्योंकि अंग क्षेत्र और नेपाल के बीच सदियों पुराने व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं।

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पशुपतिनाथ के दर्शन से व्यक्ति को पशुत्व (अज्ञानता और मोह) से मुक्ति मिलती है। भागलपुर के श्रद्धालु इस यात्रा के दौरान न केवल पशुपतिनाथ मंदिर, बल्कि काठमांडू के अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों जैसे स्वयंभूनाथ और बुढानीलकंठ के दर्शन भी करेंगे। यह यात्रा भक्तों को अपनी जड़ों और पड़ोसी देश की सनातन संस्कृति को करीब से देखने का अवसर प्रदान करेगी।

महाकालदर्शन.इन की मुस्तैदी और सुरक्षा व्यवस्था

​संस्था ‘महाकालदर्शन.इन’ के सदस्यों ने बताया कि भागलपुर से नेपाल तक की इस यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रबंध किए गए हैं। चूंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा है, इसलिए सीमा पार करने के नियमों (बॉर्डर क्रॉसिंग) से लेकर आवास और भोजन तक की हर छोटी-बड़ी जानकारी का ध्यान रखा गया है।

​संस्था की ओर से यात्रियों के लिए विशेष गाड़ियों की व्यवस्था की गई है, जिसमें आरामदायक सफर सुनिश्चित किया गया है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए प्राथमिक चिकित्सा और जरूरी दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। संस्था के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनकी प्राथमिकता है कि हर श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के भगवान के दर्शन शांतिपूर्वक कर सके। यात्रियों के ठहरने के लिए काठमांडू में उचित स्थान पहले से ही आरक्षित किए जा चुके हैं।

अंग जनपद में धार्मिक पर्यटन की नई लहर

​भागलपुर के कैंप जेल जबारीपुर से इस जत्थे का रवाना होना यह दर्शाता है कि अंग क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और सामूहिक यात्राओं के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय संस्थाओं ने जिस तरह से संगठित होकर ऐसी यात्राओं का आयोजन शुरू किया है, उससे आम लोगों को कम खर्च में सुरक्षित यात्रा की सुविधा मिलने लगी है।

​बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि भागलपुर की मिट्टी में भक्ति की जड़ें कितनी गहरी हैं। यात्रा में शामिल यात्रियों के परिजनों ने भी संस्था के प्रति आभार व्यक्त किया कि उन्होंने पारदर्शी तरीके से और इतने भक्तिमय वातावरण में इस जत्थे को रवाना किया है। अब सबकी नजरें इस जत्थे की सकुशल वापसी और वहां से आने वाले आध्यात्मिक अनुभवों पर टिकी हैं।

श्रद्धा की डगर पर बढ़ते कदम

​अंततः, 24 अप्रैल 2026 की यह दोपहर भागलपुर के धार्मिक इतिहास में एक सुखद अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है। पशुपतिनाथ धाम के लिए निकला यह जत्था न केवल दर्शन करने जा रहा है, बल्कि भागलपुर की दुआएं और श्रद्धा भी अपने साथ लेकर गया है। लकी ड्रॉ के माध्यम से 5 परिवारों को मिली यह खुशी समाज में परोपकार का संदेश देती है। जबारीपुर के पंचमुखी हनुमान दरबार से शुरू हुई यह यात्रा पशुपतिनाथ के चरणों में मत्था टेकने के बाद जब वापस लौटेगी, तो अपने साथ नेपाल की पावन स्मृतियां और महादेव का आशीर्वाद लेकर आएगी।

​वॉयस ऑफ बिहार (VOB) इस पूरी यात्रा पर अपनी नजर बनाए रखेगा और श्रद्धालुओं की वापसी पर उनके अनुभवों को साझा करेगा। भागलपुर की इस नई परंपरा ने यह सिद्ध कर दिया है कि आस्था जब सामूहिक होती है, तो वह एक महोत्सव का रूप ले लेती है। पशुपतिनाथ की कृपा सभी यात्रियों पर बनी रहे और उनकी यात्रा मंगलमय हो।

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