भागलपुर: पक्कीसराय के तीन बच्चों के ‘अपहरण’ की खबर से सनसनी; घर लौटे बच्चों की कहानी पर पुलिस को शक, स्कूल से बचने का पैंतरा?

भागलपुर (घोघा/रसलपुर) | 21 फरवरी, 2026: जिले के घोघा थाना क्षेत्र अंतर्गत पक्कीसराय गांव में तीन स्कूली बच्चों के अचानक लापता होने और फिर रहस्यमयी तरीके से घर लौटने के मामले ने सनसनी फैला दी है। जहाँ एक ओर बच्चों के सनसनीखेज दावों ने इलाके में डर पैदा कर दिया है, वहीं पुलिस की प्रारंभिक जांच इस पूरी घटना को ‘अपहरण की फर्जी कहानी’ की ओर इशारा कर रही है।

घटनाक्रम: स्कूल के लिए निकले और हो गए लापता

​पक्कीसराय निवासी एक व्यक्ति के तीन पुत्र, जो मध्य विद्यालय आमापुर के छात्र हैं, गुरुवार सुबह करीब 9 बजे घर से स्कूल के लिए निकले थे। स्कूल से जब उनके न पहुँचने की सूचना मिली, तो परिजनों के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस और स्थानीय लोगों ने तलाश शुरू की, लेकिन करीब तीन घंटे बाद तीनों बच्चे खुद-ब-खुद घर लौट आए।

बच्चों की जुबानी: “चॉकलेट, कार और बेहोशी का खेल”

​शुक्रवार सुबह जब यह मामला रसलपुर थाना क्षेत्र के एकचारी तक पहुँचा, तो हंगामा खड़ा हो गया। बच्चों ने अपने परिजनों को जो कहानी सुनाई, वह किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी थी:

  • लालच: 12 वर्षीय बड़े भाई ने बताया कि बाइक सवार दो लोगों ने उन्हें बिस्किट और चॉकलेट का लालच दिया।
  • अपहरण: इसके बाद एक कार आई, जिसमें उन्हें जबरन बैठाया गया और रूमाल में कुछ सुंघाकर बेहोश कर दिया गया।
  • कैद: होश आने पर उन्होंने खुद को एकचारी (कालेश्वरी पोखर) के पास एक घर में पाया, जहाँ उनके जैसे और भी बच्चे थे।
  • फरार: मौका मिलते ही तीनों भाई वहां से भाग निकले और सुरक्षित घर पहुँचे।

पुलिसिया जांच में खुली पोल: बंद मकान और विरोधाभास

​शुक्रवार को परिजनों और ग्रामीणों ने एकचारी स्थित उस मकान पर पहुँचकर हंगामा शुरू कर दिया, जिसे बच्चों ने ‘किडनैपिंग पॉइंट’ बताया था। सूचना मिलते ही रसलपुर और घोघा पुलिस मौके पर पहुँची। जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं:

  1. बंद था मकान: रसलपुर थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह ने बताया कि जिस मकान पर हंगामा हो रहा था, वह कई दिनों से बंद है और उस पर ताला लटका था।
  2. मालिक का अलबी (Alibi): पुलिस जांच में पता चला कि मकान मालिक रेलवे में कार्यरत हैं और वर्तमान में अपने पूरे परिवार के साथ हावड़ा (पश्चिम बंगाल) में रहते हैं। ऐसे में बंद मकान में बच्चों को कैद करने का दावा संदिग्ध लग रहा है।
  3. बयानों में अंतर: घोघा थानाध्यक्ष अजीत कुमार ने स्पष्ट किया कि बच्चों और परिजनों के बयानों में काफी विरोधाभास है।

पुलिस का संदेह: पढ़ाई के डर से रची कहानी?

​घोघा पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच यह संकेत दे रही है कि बच्चे शायद पढ़ाई के डर से स्कूल नहीं गए और रास्ता भटककर या जानबूझकर एकचारी क्षेत्र चले गए थे। घर लौटने पर डांट और सजा से बचने के लिए उन्होंने ‘अपहरण और बहादुरी से भागने’ की मनगढ़ंत कहानी गढ़ ली।

​”प्रथम दृष्टया यह मामला संदिग्ध लग रहा है। बच्चे जिस मकान को कैदखाना बता रहे हैं, वहां कोई गतिविधि नहीं मिली। आशंका है कि बच्चों ने स्कूल न जाने के कारण यह कहानी बनाई है। हालांकि, हम सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।”

अजीत कुमार, थानाध्यक्ष, घोघा

द वॉयस ऑफ बिहार की अपील

​क्षेत्र में बच्चों के अपहरण की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ नागरिकों से अपील करता है कि बिना पुष्टि के किसी भी खबर को साझा न करें। माता-पिता अपने बच्चों से संवाद करें और उन्हें सुरक्षित महसूस कराएं, ताकि वे डर के कारण ऐसी कहानियाँ न गढ़ें।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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