भागलपुर नगर निगम का ‘एक्शन अवतार’: अवैध पोस्टरबाजी पर अब सीधी तालाबंदी; उर्दू बाजार में कोचिंग संस्थान सील, 21 अन्य पर लटकी तलवार

भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर की खूबसूरती को दागदार करने वाले कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक इकाइयों के खिलाफ नगर प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। शहर की दीवारों, बिजली के खंभों और सार्वजनिक भवनों पर अवैध तरीके से पोस्टर व बैनर चिपकाकर ‘सूरत’ बिगाड़ने वालों के खिलाफ केवल कागजी कार्रवाई या प्राथमिकी (FIR) का दौर अब पीछे छूट चुका है। मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को नगर निगम की टीम ने सीधे धरातल पर उतरकर ‘तालाबंदी’ की कार्रवाई शुरू कर दी। इसकी शुरुआत शहर के व्यस्ततम इलाकों में से एक उर्दू बाजार से हुई, जहाँ नियमों को ताक पर रखकर प्रचार-प्रसार करने वाले एक बड़े शिक्षण संस्थान को नगर निगम की टीम ने विधिवत सील कर दिया। नगर आयुक्त के इस कड़े आदेश ने शहर के उन तमाम कोचिंग संचालकों और विज्ञापनदाताओं के बीच हड़कंप मचा दिया है जो बार-बार की चेतावनी के बावजूद अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे थे। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि शहर की सुंदरता से खिलवाड़ करने वाले संस्थानों का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।

उर्दू बाजार में पहली बड़ी चोट: पोस्टरबाजी का ‘महंगा’ पड़ा शौक

​मंगलवार की सुबह जब नगर निगम के अधिकारी और कर्मी उर्दू बाजार इलाके में पहुँचे, तो वहां के कोचिंग संचालकों में खलबली मच गई। निगम की टीम ने पाया कि प्रशासन की ओर से पूर्व में दर्ज कराई गई प्राथमिकियों और सार्वजनिक सूचनाओं के बावजूद एक शिक्षण संस्थान ने शहर के सौंदर्य को बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। खंभों से लेकर दीवारों तक को पोस्टर और बैनर से पाट दिया गया था।

​नगर आयुक्त के स्पष्ट निर्देश पर कार्रवाई करते हुए निगम की टीम ने उक्त संस्थान के मुख्य द्वार पर ताला जड़ते हुए उसे सील कर दिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई सांकेतिक नहीं है, बल्कि एक व्यापक अभियान का हिस्सा है। उर्दू बाजार में हुई इस सीलिंग ने यह संदेश दिया है कि प्रशासन अब शहर के हृदय स्थल को विज्ञापनों के कबाड़खाने में तब्दील नहीं होने देगा। स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों ने भी निगम की इस कार्रवाई का स्वागत किया है, क्योंकि बेतरतीब पोस्टरबाजी न केवल देखने में खराब लगती है बल्कि यह शहर की आधुनिक छवि को भी धूमिल करती है।

21 संस्थानों की सूची तैयार: अब हर तरफ चलेगा निगम का ‘हंटर’

​नगर निगम प्रशासन ने इस कार्रवाई से पहले एक विस्तृत सर्वे कराया था। इस सर्वे के दौरान शहर के विभिन्न वार्डों और मुख्य चौराहों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई। इसके आधार पर कुल 21 ऐसी संस्थाओं को चिह्नित किया गया था जिन्होंने अवैध पोस्टरबाजी के जरिए शहर की सुंदरता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया था। इन 21 संस्थानों के खिलाफ नगर निगम पहले ही तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज करा चुका था।

​नगर आयुक्त ने अब उन सभी 21 चिह्नित संस्थानों के विरुद्ध सीलिंग का आदेश जारी कर दिया है। आदेश की मुख्य शर्तें निम्नलिखित हैं:

  • सीधी तालाबंदी: जो भी संस्थान पूर्व में दर्ज FIR की सूची में शामिल हैं, उन्हें बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के तुरंत सील किया जाएगा।
  • भारी जुर्माना: इन संस्थानों पर न केवल सीलिंग की कार्रवाई होगी, बल्कि उन पर विज्ञापन नियमों के उल्लंघन के लिए मोटा जुर्माना भी लगाया जाएगा।
  • सशर्त बहाली: किसी भी संस्थान की सील तभी खोली जाएगी जब वह निर्धारित जुर्माने की पूरी राशि निगम के कोष में जमा कर देगा।
  • पुनरावृत्ति पर प्रतिबंध: जुर्माना जमा करने के बाद भी यदि कोई संस्थान दोबारा पोस्टरबाजी करता पाया गया, तो उसका निबंधन रद्द करने की अनुशंसा की जाएगी।

शहर की सुंदरता से खिलवाड़: शाखा प्रभारी की दो टूक

​सीलिंग की कार्रवाई के दौरान नगर निगम के शाखा प्रभारी जयप्रकाश यादव ने प्रशासन का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि भागलपुर को एक ‘स्मार्ट सिटी’ और सुंदर शहर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। पेंटिंग, लाइटिंग और सड़कों के चौड़ीकरण के जरिए शहर का कायाकल्प किया जा रहा है, लेकिन कुछ स्वार्थी संस्थान अपने छोटे से व्यावसायिक लाभ के लिए पूरी सुंदरता पर कालिख पोतने का काम कर रहे हैं।

​जयप्रकाश यादव ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “शहर की सुंदरता से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने बताया कि पोस्टर चिपकाने वाले मजदूर तो पकड़े ही जाते हैं, लेकिन अब असली जिम्मेदारी संस्थान के मालिकों की तय की जा रही है। अगर किसी खंभे पर किसी कोचिंग का पोस्टर दिखता है, तो यह माना जाएगा कि उस कोचिंग के संचालक ने ही यह निर्देश दिया है। शाखा प्रभारी ने साफ किया कि उर्दू बाजार की कार्रवाई महज एक शुरुआत है, आने वाले दिनों में खलीफाबाग, स्टेशन रोड और तिलकामांझी जैसे इलाकों में भी ऐसी ही कार्रवाई देखने को मिलेगी।

कोचिंग संचालकों के बीच हड़कंप और ‘डिजिटल’ होने की सलाह

​नगर निगम के इस ‘एक्शन अवतार’ ने भागलपुर के कोचिंग हब कहे जाने वाले इलाकों में एक नया डर पैदा कर दिया है। कई संचालक जो अब तक जुर्माने को एक सामान्य प्रक्रिया मानते थे, वे अब अपने बैनर और पोस्टर खुद ही उतारते नजर आ रहे हैं। प्रशासन ने सलाह दी है कि यदि किसी को प्रचार करना है, तो वे डिजिटल माध्यमों या निगम द्वारा निर्धारित ‘यूनिपोल’ और ‘होर्डिंग’ साइट्स का उपयोग करें।

​शहर के प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि भागलपुर की दीवारों को ‘नोट्स’ और ‘एडमिशन ओपन’ के विज्ञापनों से मुक्त कराना जरूरी है। कई बार ये पोस्टर ऐतिहासिक स्मारकों और सरकारी भवनों की पहचान तक को ढक देते हैं। निगम की इस कार्रवाई से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि शहर के प्रति नागरिकों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। कोचिंग संचालकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हालांकि इस कार्रवाई को ‘अचानक’ बताया है, लेकिन निगम का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद किसी भी अतिरिक्त चेतावनी की आवश्यकता नहीं रह जाती।

जुर्माने की राशि और बहाली की प्रक्रिया

​नगर निगम के सूत्रों के अनुसार, जुर्माने की राशि का निर्धारण पोस्टर की संख्या और विज्ञापन के क्षेत्रफल के आधार पर किया जा रहा है। कुछ संस्थानों पर जुर्माना लाखों में भी पहुँच सकता है। सीलिंग हटने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए निगम ने एक विशेष सेल का गठन किया है। संस्थान के प्रतिनिधियों को पहले अपनी गलती का शपथ पत्र देना होगा और फिर बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जुर्माने की राशि जमा करनी होगी।

​इसके बाद ही नगर आयुक्त के स्तर से सील हटाने की फाइल को मंजूरी मिलेगी। इस लंबी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संस्थान नियमों को हल्के में न ले। निगम प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन संस्थानों ने सरकारी पोल या ट्रांसफार्मर के पास खतरनाक तरीके से लोहे के फ्रेम टांग रखे हैं, उन्हें हटाने का खर्च भी उन्हीं संस्थानों से वसूला जाएगा।

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