भागलपुर में अवैध हथियार सप्लाई नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, STF-DIU की संयुक्त कार्रवाई में दो अपराधी गिरफ्तार

भागलपुर, 28 मई 2026। बिहार के भागलपुर जिले में अवैध हथियार और कारतूस की सप्लाई करने वाले नेटवर्क के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कोतवाली थाना क्षेत्र में स्टेशन चौक के पास स्थित उल्टा पुल इलाके में स्पेशल टास्क फोर्स (STF), जिला खुफिया इकाई (DIU) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने 100 जिंदा कारतूस, दो देशी कट्टे और दो मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इस कार्रवाई के बाद जिले में सक्रिय हथियार तस्करों और आपराधिक गिरोहों में हड़कंप मच गया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार अपराधी किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। बरामद हथियारों और कारतूसों की संख्या को देखते हुए जांच एजेंसियां इसे संगठित अपराध नेटवर्क से जोड़कर देख रही हैं। मामले में आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।

गुप्त सूचना के बाद बनाई गई विशेष टीम

भागलपुर पुलिस को 27 मई की रात एक गोपनीय सूचना मिली थी कि कोतवाली थाना क्षेत्र में कुछ अपराधी अवैध हथियार और भारी मात्रा में कारतूस की डील करने वाले हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक ने तुरंत एक विशेष टीम गठित की। इस टीम में सिटी एसपी, एसडीपीओ नगर, कोतवाली थाना पुलिस, STF और DIU के अधिकारियों को शामिल किया गया।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को यह भी अंदेशा था कि हथियारों की यह खेप किसी बड़ी वारदात या गैंगवार के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। इसी वजह से पूरे ऑपरेशन को बेहद गोपनीय रखा गया। पुलिस टीम ने देर रात स्टेशन चौक और उल्टा पुल इलाके में रणनीतिक तरीके से घेराबंदी शुरू की।

उल्टा पुल के पास दबोचा गया पहला आरोपी

जैसे ही संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं, पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए पहले आरोपी को पकड़ लिया। गिरफ्तार युवक की पहचान हबीबपुर थाना क्षेत्र के सतघरा निवासी सुबोध मंडल के रूप में हुई। तलाशी के दौरान उसके पास से 100 जिंदा कारतूस बरामद किए गए।

इतनी बड़ी संख्या में कारतूस मिलने के बाद पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ गए। जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी इन कारतूसों को आगे सप्लाई करने वाला था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये कारतूस कहां से लाए गए थे और किन लोगों तक पहुंचाए जाने वाले थे।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में यह मामला साधारण तस्करी से कहीं बड़ा प्रतीत हो रहा है। संभावना जताई जा रही है कि इसके पीछे अंतरजिला हथियार तस्करी गिरोह सक्रिय है।

पूछताछ में खुलासा, दूसरा आरोपी भी गिरफ्तार

सुबोध मंडल को हिरासत में लेकर जब सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने अपने साथी का नाम उजागर कर दिया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने तुरंत दूसरी जगह छापेमारी की और पीरपैंती थाना क्षेत्र के टोपरा गांव निवासी अमित कुमार तिवारी को गिरफ्तार कर लिया।

अमित तिवारी की तलाशी लेने पर उसके पास से दो देशी कट्टे बरामद हुए। पुलिस के मुताबिक, ये हथियार पूरी तरह उपयोग की स्थिति में थे और इन्हें किसी आपराधिक वारदात में इस्तेमाल किया जा सकता था।

जांच एजेंसियों का मानना है कि दोनों आरोपी लंबे समय से अवैध हथियार नेटवर्क से जुड़े हुए थे और कई अपराधियों तक हथियार पहुंचाने का काम कर रहे थे। मोबाइल फोन की जांच से इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी मिलने की उम्मीद है।

बरामद सामान ने बढ़ाई चिंता

पुलिस ने इस कार्रवाई में जिन सामानों को बरामद किया है, उनमें शामिल हैं:

  • 02 देशी कट्टे
  • 100 जिंदा कारतूस
  • 02 मोबाइल फोन

जांच अधिकारियों के अनुसार, मोबाइल फोन से कई अहम सुराग मिल सकते हैं। साइबर सेल और तकनीकी टीम अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड, चैट हिस्ट्री और डिलीट किए गए डेटा की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि इन मोबाइल फोन से हथियार तस्करी नेटवर्क के कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी

पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:

  1. सुबोध मंडल, निवासी सतघरा, थाना हबीबपुर, जिला भागलपुर
  2. अमित कुमार तिवारी, निवासी टोपरा, थाना पीरपैंती, जिला भागलपुर

दोनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इनका संबंध किसी बड़े गिरोह या बाहरी अपराधियों से भी है।

STF और DIU की संयुक्त कार्रवाई रही सफल

इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने में STF और DIU की महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर इन टीमों ने बेहद सुनियोजित तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। ऑपरेशन में शामिल पुलिस अधिकारियों ने कई घंटों तक इलाके में निगरानी रखी और सही समय पर दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो हथियारों की यह खेप किसी बड़ी आपराधिक घटना में इस्तेमाल हो सकती थी।

हथियारों की सप्लाई चेन की जांच तेज

भागलपुर पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच का सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में कारतूस आखिर कहां से आए। पुलिस को शक है कि इन हथियारों और कारतूसों का कनेक्शन बिहार के अन्य जिलों या अंतरराज्यीय नेटवर्क से हो सकता है।

सूत्रों की मानें तो जांच एजेंसियां मुंगेर कनेक्शन पर भी नजर बनाए हुए हैं। बिहार में अवैध हथियार निर्माण और सप्लाई के मामलों में मुंगेर का नाम पहले भी सामने आता रहा है। हालांकि पुलिस ने अभी इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

न्यायालय में पेशी के बाद भेजे गए जेल

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच स्थानीय अदालत में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि मामले में आगे भी छापेमारी जारी रहेगी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि जिले में अवैध हथियार कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भागलपुर पुलिस की इस कार्रवाई को हाल के दिनों में जिले की सबसे बड़ी हथियार बरामदगी में से एक माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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