भागलपुर में कयाकिंग एंड कैनोइंग खिलाड़ियों के चयन ट्रायल का आयोजन, एकलव्य खेल प्रशिक्षण केंद्र में मिलेगा मुफ्त प्रशिक्षण

भागलपुर, 20 मई 2026। बिहार में जल क्रीड़ा को बढ़ावा देने और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। खेल विभाग बिहार सरकार, और जिला प्रशासन भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के अंतर्गत संचालित किए जाने वाले एकलव्य राज्य आवासीय खेल प्रशिक्षण केंद्रों के लिए कयाकिंग एंड कैनोइंग खिलाड़ियों का चयन ट्रायल आयोजित किया गया। भागलपुर के सैंडीस कंपाउंड स्थित खेल भवन में आयोजित इस ट्रायल में बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में युवा खिलाड़ियों ने भाग लिया।

इस चयन ट्रायल का आयोजन 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बालक और बालिका खिलाड़ियों के लिए किया गया था। प्रतियोगिता में लगभग 45 बालक और 17 बालिका खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। खिलाड़ियों में खासा उत्साह देखने को मिला, क्योंकि पहली बार बिहार में वॉटर स्पोर्ट्स के लिए एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र शुरू किए जाने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार चयन प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीकी मानकों के आधार पर आयोजित की गई। खिलाड़ियों का चयन बैटरी टेस्ट और स्किल टेस्ट के आधार पर किया गया, ताकि वास्तविक प्रतिभा और शारीरिक क्षमता का आकलन किया जा सके।

चयन ट्रायल के दौरान खिलाड़ियों के लिए कई प्रकार की शारीरिक और कौशल आधारित प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें 800 मीटर दौड़, ऊंचाई और वजन मापन, ब्रॉड जंप, 30 मीटर शटल रन और मेडिसिन बॉल थ्रो जैसे टेस्ट शामिल थे। विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने खिलाड़ियों की फिटनेस, सहनशक्ति, संतुलन और खेल क्षमता का मूल्यांकन किया।

खेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि चयनित खिलाड़ियों को बिहार सरकार की ओर से पूरी तरह मुफ्त आवासीय प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें रहने की व्यवस्था, पौष्टिक भोजन, खेल सामग्री, शिक्षा और प्रशिक्षित कोच द्वारा नियमित प्रशिक्षण शामिल होगा।

अधिकारियों के अनुसार चयनित खिलाड़ियों को खेल सामग्री और स्पोर्ट्स किट भी सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही उन्हें पेशेवर स्तर की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

विशेषज्ञों का कहना है कि कयाकिंग एंड कैनोइंग जैसे वॉटर स्पोर्ट्स में बिहार की संभावनाएं काफी मजबूत हैं। गंगा और अन्य नदियों वाले क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता इस खेल को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल मानी जाती है। हालांकि अब तक इस क्षेत्र में संगठित प्रशिक्षण और संसाधनों की कमी महसूस की जाती रही है।

खेल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बिहार में पिछले 15 वर्षों से विभिन्न खेल विधाओं के लिए एकलव्य प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से कई खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। अब पहली बार वॉटर स्पोर्ट्स को भी इस योजना से जोड़ा गया है।

सरकार का मानना है कि कयाकिंग और कैनोइंग जैसे खेलों को बढ़ावा देने से बिहार के खिलाड़ियों को नए अवसर मिलेंगे। खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के प्रतिभाशाली बच्चों को मुफ्त प्रशिक्षण सुविधा मिलने से वे बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।

इस पहल को लेकर खिलाड़ियों और अभिभावकों में भी उत्साह देखने को मिला। कई खिलाड़ियों ने कहा कि अब तक उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिलती थीं, लेकिन अब सरकार की पहल से उनके लिए नए अवसर खुलेंगे।

चयन ट्रायल के लिए पटना से वॉटर स्पोर्ट्स के विशेषज्ञ और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के प्रशिक्षक और को भेजा गया था। दोनों प्रशिक्षकों ने खिलाड़ियों की क्षमता का मूल्यांकन किया और तकनीकी परीक्षणों की निगरानी की।

चयन ट्रायल को सफल बनाने के लिए कई शारीरिक शिक्षकों और खेल कर्मियों की भी प्रतिनियुक्ति की गई थी। इनमें , , , , , और शामिल रहे।

कार्यक्रम के दौरान कयाकिंग एंड कैनोइंग संघ से जुड़े कई पदाधिकारी भी मौजूद रहे। इनमें जिला अध्यक्ष , , , , और उपस्थित रहे।

जिला खेल पदाधिकारी ने बताया कि खेल विभाग का उद्देश्य बिहार के खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि वॉटर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और आने वाले समय में इस क्षेत्र में और भी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर से वैज्ञानिक प्रशिक्षण और संसाधन मिलते हैं, तो बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। खासकर वॉटर स्पोर्ट्स में बिहार के युवाओं के लिए काफी संभावनाएं मौजूद हैं।

फिलहाल भागलपुर में आयोजित यह चयन ट्रायल बिहार में खेल संस्कृति को मजबूत करने और वॉटर स्पोर्ट्स को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि इस पहल से राज्य में जल क्रीड़ा के क्षेत्र में नई प्रतिभाएं उभरकर सामने आएंगी।

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