
कहलगांव/भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड स्थित सियां पंचायत का बरैनी गांव सोमवार को गम और गौरव के एक अनूठे सैलाब में डूबा रहा। जब जम्मू-कश्मीर की बर्फीली चोटियों पर देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौहार करने वाले असम राइफल्स के जवान शिव शंकर कुमार का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर गांव पहुँचा, तो हर आंख नम थी और हर दिल में अपने इस वीर सपूत के लिए सम्मान उमड़ रहा था। 11 मई 2026 की यह सुबह बरैनी गांव के इतिहास में एक अमिट शहादत की गवाह बनी। 25 वर्षीय शिव शंकर कुमार केवल एक सैनिक नहीं थे, बल्कि वे अपने माता-पिता के इकलौते चिराग थे, जो अब देश की माटी की खुशबू में हमेशा के लिए विलीन हो गए हैं। उनकी शहादत की खबर ने न केवल उनके परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में देशभक्ति की एक नई लहर पैदा कर दी है।
कर्तव्य की वेदी पर सर्वोच्च बलिदान: ऑक्सीजन की कमी बनी काल
शिव शंकर कुमार असम राइफल्स के मेडिकल विभाग में कार्यरत थे और वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के उन दुर्गम और अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में थी, जहाँ सांस लेना भी एक चुनौती होता है। मिली जानकारी के अनुसार, तीन वर्ष पूर्व ही वे भारतीय सेना का हिस्सा बने थे और उनमें देश सेवा का जज्बा कूट-कूट कर भरा था। बीते दिन जब वे अपनी ड्यूटी पर तैनात थे, तभी अचानक अत्यधिक ऊंचाई और बर्फीले वातावरण के कारण उनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरने लगा। सांस लेने में भारी तकलीफ होने के बाद उन्हें तुरंत उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली और वीरगति को प्राप्त हुए। एक मेडिकल विभाग का हिस्सा होने के नाते वे दूसरों की जान बचाने का प्रशिक्षण पाए थे, लेकिन देश की दुर्गम सीमाओं की रक्षा करते हुए उन्होंने स्वयं का जीवन बलिदान कर दिया।
बरैनी की गलियों में मातम और नारों की गूँज
शहीद शिव शंकर कुमार का पार्थिव शरीर सोमवार की सुबह जब पटना से होते हुए उनके पैतृक गांव बरैनी पहुँचा, तो सैन्य अधिकारियों के संरक्षण में लाए गए शहीद को देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। जैसे ही सेना का वाहन गांव की सीमा में दाखिल हुआ, ‘शिव शंकर अमर रहें’ और ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, शिव शंकर तेरा नाम रहेगा’ के नारों से पूरा आसमान गूँज उठा। उनके पिता विनय कुमार और माता की स्थिति देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति का कलेजा फट रहा था। इकलौते बेटे की शहादत ने घर के आंगन को सूना कर दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन इस असीम दुख के बीच भी उनके चेहरे पर एक गौरव था कि उनके बेटे ने कायरों की तरह नहीं, बल्कि एक योद्धा की तरह देश के लिए अपनी जान दी है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि शिव शंकर बचपन से ही मेधावी और मिलनसार स्वभाव के थे, और उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।
कर्नल जितेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में सैन्य सम्मान
शहीद के अंतिम संस्कार से पूर्व कर्नल जितेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में सेना की एक विशेष टुकड़ी ने शिव शंकर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कर्नल राणा ने शहीद के अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा को याद करते हुए उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया। सैन्य प्रोटोकॉल के तहत जवानों ने हवा में गोलियां दागकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी। कर्नल राणा ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और कहा कि भारतीय सेना अपने वीर सपूत के बलिदान को कभी नहीं भूलेगी। सेना के अधिकारियों ने परिवार को आश्वस्त किया कि इस संकट की घड़ी में पूरी सेना उनके साथ खड़ी है। सैन्य सम्मान की इस प्रक्रिया को देखकर गांव के युवाओं में भी देश सेवा के प्रति एक अलग ही उत्साह और संकल्प दिखाई दिया।
कहलगांव गंगा घाट पर उमड़ा जनसैलाब: पंचतत्व में विलीन हुए वीर
बरैनी गांव से शुरू हुई अंतिम यात्रा कहलगांव के पवित्र गंगा घाट तक पहुँची। इस शवयात्रा में हजारों की संख्या में स्थानीय लोग, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। सड़क के दोनों ओर खड़े लोग शहीद के पार्थिव शरीर पर फूल बरसा रहे थे। गंगा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की गई। मुखाग्नि दिए जाने के समय माहौल अत्यंत भावुक हो गया। पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान ने भी घाट पर पहुँचकर शहीद को अपनी श्रद्धांजलि दी। विधायक मुरारी पासवान ने कहा कि भागलपुर की इस माटी ने एक बार फिर साबित किया है कि यहाँ के सपूत देश की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर परिवार को सांत्वना दी और सरकार की ओर से मिलने वाली हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
प्रशासनिक मुस्तैदी और क्षेत्र में शोक की लहर
जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद रहे। कहलगांव के अनुमंडल पदाधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने एक सुर में कहा कि शिव शंकर की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी और उनकी याद में गांव में किसी स्मारक या सार्वजनिक स्थल का नामकरण करने पर विचार किया जाएगा। शहादत की खबर मिलते ही कहलगांव और आसपास के बाजारों में भी शोक की लहर देखी गई। कई लोगों ने अपनी दुकानें बंद रखकर शहीद के प्रति सम्मान प्रकट किया। बरैनी गांव के लोग अब अपने इस वीर के संस्मरणों को सहेजने में जुटे हैं।
यातायात और आपूर्ति पर पड़ा असर (विशेष संदर्भ)
शहीद की अंतिम यात्रा और क्षेत्र में उमड़ी भारी भीड़ के कारण स्थानीय स्तर पर यातायात व्यवस्था में भी बदलाव देखे गए। कहलगांव और पीरपैंती के बीच कई जगहों पर जाम की स्थिति बनी रही, जिससे स्टोन चिप्स और बोल्डर की आपूर्ति करने वाले वाहनों की आवाजाही पर अस्थायी रूप से असर पड़ा। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए रूट को डाइवर्ट किया ताकि अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले लोगों को कोई असुविधा न हो। बोल्डर की आपूर्ति बाधित होने के बावजूद स्थानीय व्यवसायियों ने कहा कि आज का दिन व्यापार का नहीं, बल्कि अपने वीर सपूत को विदाई देने का है।
भविष्य की यादों में जीवित रहेंगे शिव शंकर
शिव शंकर कुमार ने मात्र 25 वर्ष की आयु में जो ख्याति और सम्मान अर्जित किया है, वह दशकों तक कहलगांव की नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा। जम्मू-कश्मीर की उन पहाड़ियों पर जहाँ ऑक्सीजन की कमी ने उनके जिस्म की रफ़्तार रोक दी, वहीं से उनके नाम की गूँज पूरे देश में फैल गई है। असम राइफल्स के इस जांबाज ने साबित कर दिया कि वर्दी पहनने वाला हर जवान देश का गौरव होता है। गंगा की लहरों के बीच जब उनकी चिता की अग्नि शांत हुई, तब तक रात ढलने लगी थी, लेकिन बरैनी गांव के लोगों की आंखों में अब भी वह चेहरा घूम रहा था जो तीन साल पहले मुस्कुराते हुए सेना की भर्ती के लिए घर से निकला था। भागलपुर की इस धरती ने अपना एक और लाल भारत माता की गोद में समर्पित कर दिया है।
बिहार के भागलपुर जिले के कहलगांव में शहीद शिव शंकर की अंतिम विदाई में उमड़ा यह जनसैलाब और सेना का वह सम्मान यह बताने के लिए काफी है कि एक सैनिक का स्थान समाज में कितना ऊंचा होता है। पीरपैंती विधायक और सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी ने इस दुखद घड़ी में परिवार को संबल प्रदान किया। शहीद शिव शंकर कुमार अब केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक प्रेरणा पुंज बन चुके हैं।


